चिकमगलुरू, 19 अगस्त कांग्रेस नेता सिद्धरमैया ने कर्नाटक में कोडागु दौरे के दौरान उनकी कार पर
अंडे फेंके जाने और काले झंडे दिखाये जाने की घटना के एक दिन बाद शुक्रवार को इस तरह के विरोध को ‘राज्य
प्रायोजित’ करार दिया। कर्नाटक विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सिद्धरमैया ने आरोप लगाया कि उनकी कार पर अंडे
फेंकने वाले लोग एक ‘ऐसे संगठन से थे जिससे महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का संबंध’ था।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि क्या ऐसे लोग उन्हें बख्शेंगे, क्योंकि वह
उनके खिलाफ बोल रहे थे।
सिद्धरमैया ने कहा, ‘‘कल तितिमती में करीब 10 युवक नारे लगा रहे थे, उसके बाद चार जगहों पर वे एकत्र हो
गए थे, क्या पुलिस उन्हें नहीं रोक सकती थी? अगर मुख्यमंत्री आते हैं, तो क्या वे लोगों को काले झंडे के साथ
विरोध करने देंगे? क्या वे एहतियाती गिरफ्तारी नहीं करेंगे?’’ उन्हें पूछा कि पुलिस अधीक्षक (एसपी) को क्या
परेशानी थी?
पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि 26 अगस्त को, वह कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ कोडागु में पुलिस
अधीक्षक कार्यालय की घेराबंदी करेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां कोई कानून-व्यवस्था नहीं थी और ‘गलत
मंशा’ वाले अधिकारियों की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बजरंग दल के साथ मिलीभगत थी, जिससे इस घटना को
होने दिया गया।
उन्होंने कहा कि कल का राज्य प्रायोजित विरोध था। उन्होंने पूछा कि क्या वे लोग काले झंडे लेकर (विरोध) नहीं
कर सकते? क्या उनके कार्यकर्ता मुख्यमंत्रियों के लिए ऐसा नहीं कर सकते?
सिद्धरमैया ने कहा कि यह कायरतापूर्ण कार्य तब किया गया, जब वह बारिश से हुए नुकसान का जायजा लेने और
किसानों की बात सुनने गये थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह गुरुवार को कोडागु में बारिश प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए गए तो
भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं और हिंदू समूहों के कार्यकर्ताओं ने ‘कोडागिना विरोधी सिद्धारमैया’, ‘सिद्धारमैया
वापस जाओ’ और ‘हिंदू विरोधी’ जैसे नारे लगाए थे। उन्होंने कहा कि वे उनके उस बयान का विरोध कर रहे थे
जिसमें उन्होंने पूछा था कि मुस्लिम इलाके में सावरकर की तस्वीर क्यों लगाई गई।
सिद्धरमैया ने कहा कि यह सरकार का कर्तव्य है कि वह उन्हें उचित सुरक्षा प्रदान करे।
इससे पहले एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कांग्रेस विधायक दल के नेता ने गुरुवार की घटना का जिक्र किया
और कहा, ‘‘इन लोगों ने गांधी का ‘अंत’ कर दिया। क्या वे मुझे छोड़ देंगे?
उन्होंने गांधी को मार डाला, गोडसे ने
गांधी को गोली मारी थी, लेकिन वे उसकी तस्वीर की पूजा करते हैं।’’
सिद्धरमैया ने कहा कि कल वे सावरकर के पोस्टर को हाथ में पकड़कर विरोध कर रहे थे, जिस व्यक्ति ने अंग्रेजों
से माफी मांगी थी उसे वे वीर सावरकर के रूप में पुकार रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सावरकर के खिलाफ उनकी कोई
व्यक्तिगत दुश्मनी या गुस्सा नहीं है, लेकिन उनका आचरण सही नहीं था।

