Punjab चुनाव परिणाम लाइव अपडेट्स: दो राउंड की गिनती के बाद AAP की शुरुआती बढ़त
आज Punjab का माहौल बेहद जोशीला है। मतदाताओं का फैसला सामने आने लगा है और गिनती के पहले दो राउंड में आम आदमी पार्टी (AAP) बड़ी बढ़त बनाती दिख रही है। यह कोई मामूली बदलाव नहीं, बल्कि ऐसा राजनीतिक उलटफेर है जो राज्य की दिशा बदल सकता है।
चंडीगढ़ से लेकर मालवा की गांव-गलियों तक उत्साह साफ महसूस हो रहा है। 117 सीटों वाली Punjab विधानसभा के चुनाव हमेशा अहम होते हैं—नौकरियां, मुफ्त बिजली, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और साफ-सुथरी शासन व्यवस्था जैसे वादे दांव पर हैं। मुकाबले में AAP, सत्तारूढ़ कांग्रेस, SAD-BSP गठबंधन और भाजपा का मोर्चा शामिल हैं। शुरुआती रुझान बताते हैं कि AAP मजबूत बढ़त बना रही है—जो कई लोगों के लिए चौंकाने वाला, लेकिन लंबे और कठिन चुनावी अभियान के बाद कई उम्मीदों के अनुरूप भी है। आगे हम इन लाइव अपडेट्स के आंकड़े और उनके मायने समझेंगे।
शुरुआती रुझानों का विश्लेषण: अहम क्षेत्रों में AAP का दबदबा
गिनती की शुरुआत धीमी रही, लेकिन तेजी से रफ्तार पकड़ी। दूसरे राउंड के अंत तक AAP 70 से ज्यादा सीटों पर आगे चल रही है। पहले राउंड में यह संख्या 55 थी। कांग्रेस करीब 25 सीटों पर पीछे है, SAD-BSP 12 पर और भाजपा लगभग 8 सीटों पर सिमटी हुई है।
वोट शेयर भी साफ तस्वीर दिखाते हैं:
AAP: 45%
कांग्रेस: 28%
SAD-BSP: 15%
भाजपा: 10%
अधिकांश सीटों पर AAP की औसत बढ़त 8–10% है, जबकि शहरी इलाकों में यह 12% तक पहुंच रही है। अगर यही रुझान कायम रहे, तो पंजाब में AAP की सरकार बनना तय माना जा रहा है।
मजबूत गढ़ों में प्रदर्शन: जहां AAP ने निर्णायक बढ़त बनाई
मालवा क्षेत्र में AAP सबसे मजबूत दिख रही है। 70 सीटों वाले इस कृषि-प्रधान इलाके में पार्टी करीब 40 सीटों पर आगे है। बठिंडा ग्रामीण सीट पर AAP उम्मीदवार SAD के मौजूदा विधायक से 5,000 वोटों से आगे है। किसान पानी और कर्ज राहत जैसे वादों से प्रभावित दिखते हैं।

माझा और दोआबा क्षेत्रों में भी मिलते-जुलते संकेत हैं। जालंधर जैसे शहरी इलाकों में युवा मतदाताओं की ज्यादा भागीदारी AAP को फायदा पहुंचा रही है। पराली जलाने, रोजगार की कमी और स्थानीय उम्मीदवारों की पकड़ ने पार्टी को बढ़त दिलाई।
विशेषज्ञ मानते हैं कि AAP का घर-घर संपर्क अभियान निर्णायक रहा—बिजली बिल, मोहल्ला क्लीनिक और रोजमर्रा की समस्याओं पर सीधी बात ने ग्रामीण और शहरी दोनों वोटरों को जोड़ा।
पारंपरिक दलों को शुरुआती झटके
कांग्रेस के लिए शुरुआत कठिन रही है। कुछ गिनी-चुनी सीटों—जैसे लुधियाना—में ही बढ़त दिख रही है। पटियाला में मुख्यमंत्री के करीबी उम्मीदवार 3,000 वोटों से पीछे हैं। किसान आंदोलन और बाढ़ के बाद धीमी रिकवरी से उपजी नाराजगी साफ झलकती है।
SAD को भी अपने पारंपरिक सिख बहुल इलाकों में नुकसान हो रहा है। बठिंडा शहरी सीट पर पार्टी का बड़ा चेहरा AAP से 7% पीछे है। भाजपा का गठबंधन भी खास असर नहीं दिखा पाया, कुछ सीमावर्ती सीटों को छोड़कर।
प्री-पोल सर्वे में कांग्रेस और SAD को ज्यादा आंकने के बावजूद, शुरुआती नतीजे मतदाताओं की थकान और बदलाव की चाह दिखाते हैं।
प्रमुख सीटों पर कांटे की टक्कर
कुछ सीटें प्रतीकात्मक महत्व रखती हैं—यहां की जीत हार पूरे चुनाव की कहानी बयां करती है।
पटियाला शहरी: AAP का नया चेहरा कांग्रेस के दिग्गज से 4,200 वोट आगे
अमृतसर ईस्ट: AAP भाजपा के स्टार उम्मीदवार से 6% आगे
लांबी: कभी SAD का किला रही सीट पर AAP 3,500 वोट से आगे
फिरोजपुर: कांग्रेस 1,000 वोटों की मामूली बढ़त बनाए हुए
ये मुकाबले “बदलाव बनाम यथास्थिति” की लड़ाई को उजागर करते हैं। आगे के राउंड में उलटफेर संभव है, लेकिन AAP की रफ्तार फिलहाल मजबूत है।
बागी उम्मीदवारों और छोटे दलों की भूमिका
कुछ इलाकों में निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों ने खेल पलटा है। तरनतारन जैसे क्षेत्रों में SAD के वोट बंटे, जिसका सीधा फायदा AAP को मिला। जालंधर में BSP उम्मीदवारों ने कांग्रेस के वोट काटे।
छोटे दल 2–3% वोट लेकर त्रिकोणीय मुकाबलों को एकतरफा बना रहे हैं। विश्लेषकों का मानना है कि जातीय आधार पर हुआ यह बंटवारा पारंपरिक दलों को ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है।

AAP की शुरुआती सफलता के कारण
मतदाता संरचना और युवा भागीदारी
30 साल से कम उम्र के मतदाता कुल टर्नआउट का करीब 35% हैं। मोहाली जैसे शहरों में मुफ्त शिक्षा और रोजगार वादों ने युवाओं को AAP की ओर खींचा। ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी भी 10% बढ़ी, जहां स्वास्थ्य और सुरक्षा योजनाएं असरदार रहीं।
एंटी-इनकंबेंसी बनाम सकारात्मक समर्थन
कांग्रेस के खिलाफ नाराजगी स्पष्ट है, लेकिन AAP को सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि दिल्ली मॉडल की वजह से सकारात्मक समर्थन भी मिला। दोआबा में नाराजगी हावी है, जबकि माझा में AAP का विज़न असर दिखा रहा है।

बाजार और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
शेयर बाजार में शुरुआती घंटों में हल्की गिरावट देखी गई, खासकर कृषि शेयरों में। वहीं नवीकरणीय ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में तेजी आई—AAP की हरित ऊर्जा नीतियों की उम्मीद के चलते।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज है। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “पंजाब ने पुरानी राजनीति के बजाय उम्मीद को चुना।” कांग्रेस ने इसे अस्थायी झटका बताया, जबकि SAD ने ईवीएम जांच की मांग की।
पहले दो राउंड क्या संकेत देते हैं?
दो राउंड के बाद AAP की पकड़ मजबूत दिखती है—करीब 75 सीटों पर बढ़त और 45% वोट शेयर के साथ। कांग्रेस या SAD के लिए वापसी तभी संभव है जब आने वाले राउंड में बड़े स्तर पर वोट शिफ्ट हों, जो फिलहाल मुश्किल लगता है।
मुख्य बातें:
मालवा और शहरी इलाकों में AAP का दबदबा, युवा और महिला वोटरों का समर्थन
एंटी-इनकंबेंसी और वोट बंटवारे से पारंपरिक दलों को नुकसान
तीसरे से पांचवें राउंड पर नजर जरूरी, लेकिन फिलहाल तस्वीर AAP के पक्ष में
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