Rahul Gandhi की “अपमान” टिप्पणी पर Bhupen Borah का बयान: असम की राजनीति में हलचल
असम की राजनीति में हाल ही में बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष Bhupen बोरा ने दावा किया कि राहुल गांधी खुद को “अपमानित” महसूस कर रहे हैं। यह बयान एक प्रस्तावित स्टेडियम परियोजना और बोरा के संभावित इस्तीफे की अटकलों के बीच आया है। इस घटना ने कांग्रेस पार्टी के भीतर चल रही चुनौतियों को उजागर कर दिया है।
असम में फिलहाल Himanta Biswa Sarma के नेतृत्व में भाजपा सरकार मजबूत स्थिति में है, जबकि कांग्रेस अपने जनाधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है।
Bhupen बोरा का आरोप: “अपमान” की भावना
गुवाहाटी में एक प्रेस वार्ता के दौरान Bhupen बोरा ने कहा कि राहुल गांधी ने उनसे कहा कि वे हाल की राजनीतिक परिस्थितियों से “अपमानित” महसूस कर रहे हैं।
राजनीति में “अपमान” शब्द का इस्तेमाल गंभीर माना जाता है, क्योंकि यह नेतृत्व की कमजोरी का संकेत दे सकता है। भाजपा नेताओं ने तुरंत इस बयान को कांग्रेस की कमजोरी के प्रमाण के रूप में पेश किया।
कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस बयान को निजी भावना बताया, जबकि कुछ ने इसे पार्टी की अंदरूनी निराशा का संकेत माना। इससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी के भीतर मतभेद मौजूद हैं।

स्टेडियम परियोजना विवाद: राजनीति का केंद्र-Bhupen
विवाद की जड़ जोरहाट में प्रस्तावित एक बहुउद्देश्यीय स्टेडियम परियोजना है। कांग्रेस ने इसे युवाओं और खेल प्रतिभाओं के लिए बड़ा अवसर बताया था।
लेकिन राज्य सरकार ने इसे बजट और भूमि संबंधी कारणों से रोक दिया। भाजपा का तर्क है कि योजना व्यवहारिक नहीं थी, जबकि कांग्रेस का आरोप है कि विपक्षी दल के प्रस्तावों को जानबूझकर रोका जा रहा है।
यह मुद्दा केवल एक स्टेडियम तक सीमित नहीं है। असम जैसे राज्य में विकास परियोजनाएँ राजनीतिक प्रतीक बन जाती हैं। जब कोई योजना अटकती है, तो जनता में यह संदेश जाता है कि विपक्ष प्रभावी नहीं है।
इस्तीफे की अटकलें और नेतृत्व पर सवाल
Bhupen बोरा के बयान ऐसे समय में आए हैं जब उनके इस्तीफे की भी चर्चाएँ चल रही हैं। 2021 विधानसभा चुनाव में हार के बाद से असम कांग्रेस लगातार दबाव में है।
राहुल गांधी की असम यात्राओं और “भारत जोड़ो यात्रा” जैसे अभियानों के बावजूद पार्टी को अपेक्षित राजनीतिक लाभ नहीं मिला। इससे केंद्रीय नेतृत्व और राज्य इकाई के बीच तालमेल पर भी सवाल उठ रहे हैं।
भाजपा की रणनीति और जनधारणा
भाजपा ने इस विवाद को तुरंत राजनीतिक हथियार बना लिया। सोशल मीडिया और जनसभाओं में राहुल गांधी की “अपमान” वाली टिप्पणी को उछाला जा रहा है।
सरकार अपने विकास कार्यों—जैसे नए खेल परिसर और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं—को सामने रखकर यह संदेश दे रही है कि वह काम कर रही है, जबकि कांग्रेस केवल आरोप लगा रही है।
एक हालिया सर्वे में लगभग 45% उत्तरदाताओं ने असम में कांग्रेस की वापसी को कठिन बताया। यह दर्शाता है कि पार्टी को अपनी रणनीति और संदेश दोनों पर पुनर्विचार करना होगा।

आगे की राह
Bhupen बोरा का बयान केवल एक भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि असम कांग्रेस की गहरी चुनौतियों का संकेत है। एक रुकी हुई स्टेडियम परियोजना से शुरू हुआ विवाद अब नेतृत्व की विश्वसनीयता और पार्टी की एकजुटता तक पहुँच गया है।
आने वाले 2026 के चुनाव कांग्रेस के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। यदि पार्टी संगठन को मजबूत कर ठोस मुद्दों पर जनता के बीच जाती है, तो स्थिति बदल सकती है।
राजनीति में शब्दों की ताकत बहुत होती है—“अपमान” जैसे शब्द लंबे समय तक छवि को प्रभावित करते हैं। अब देखना होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस इस चुनौती को अवसर में बदल पाते हैं या नहीं।
क्या Adityanath दिल्ली की दौड़ में पीएम मोदी के ‘गुजरात मॉडल’ की रणनीति अपना रहे हैं?
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