विकलांगता पेंशन पर टैक्स: एक विवाद
क्या है मुद्दा?
विकलांगता पेंशन उन सैनिकों को दी जाती है, जिन्हें सेवा के दौरान चोट या स्थायी विकलांगता हुई हो। पहले ऐसी पेंशन को आयकर से छूट मिलती थी। लेकिन हालिया व्याख्याओं और नियमों के कारण कई मामलों में यह कर के दायरे में आ गई है।
Rahul गांधी का तर्क है कि यह न केवल आर्थिक रूप से अन्यायपूर्ण है, बल्कि नैतिक रूप से भी गलत है—क्योंकि यह उन लोगों पर कर लगाना है, जिन्होंने देश के लिए अपनी सेहत गंवाई।
आर्थिक प्रभाव
मान लीजिए एक पूर्व सैनिक को हर महीने 25,000 रुपये विकलांगता पेंशन मिलती है। यदि उस पर 10% कर लगता है, तो 2,500 रुपये कम हो जाते हैं। बढ़ती महंगाई और चिकित्सा खर्चों के बीच यह राशि बहुत मायने रखती है।
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार हजारों पूर्व सैनिक विकलांगता पेंशन पर निर्भर हैं। उनमें से कई को नियमित दवाइयों, सर्जरी या सहायक उपकरणों की जरूरत होती है। ऐसे में कर बोझ उनकी स्थिर आय को और कमजोर करता है।
नैतिक और राजनीतिक पहलू
देश में समय-समय पर सैनिकों के हित में विशेष प्रावधान किए गए हैं। “वन रैंक वन पेंशन” (OROP) जैसी योजनाएं इसका उदाहरण हैं। Rahul गांधी का कहना है कि विकलांगता पेंशन पर टैक्स हटाना भी उसी सम्मान की निरंतरता होनी चाहिए।

ECHS में फंड की कमी: स्वास्थ्य सेवा पर असर
ECHS की भूमिका
Ex-Servicemen Contributory Health Scheme (ECHS) वर्ष 2003 में शुरू की गई थी। यह योजना लगभग 12 लाख पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराती है।
इसमें पॉलिक्लिनिक, सरकारी और निजी अस्पतालों का नेटवर्क शामिल है, जहां जांच, सर्जरी और उपचार की सुविधा मिलती है।
बजट की चुनौती
हाल के वर्षों में ECHS के लिए आवंटित बजट और वास्तविक आवश्यकता में अंतर सामने आया है। महंगाई और बढ़ती चिकित्सा लागत के कारण प्रति लाभार्थी खर्च में वृद्धि हुई है, लेकिन बजट में उसी अनुपात में बढ़ोतरी नहीं हुई।
पूर्व सैनिक संगठनों का दावा है कि भुगतान में देरी के कारण कई अस्पतालों ने सेवाएं सीमित कर दी हैं। इससे इलाज में देरी और अतिरिक्त निजी खर्च की नौबत आती है।
जमीनी असर
कई मामलों में सर्जरी या गंभीर उपचार में देरी की शिकायतें सामने आई हैं। यदि अस्पतालों को समय पर भुगतान न मिले, तो वे योजना के तहत मरीज लेने से हिचकिचाते हैं। इसका सीधा असर पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
संसद में Rahul गांधी की अपील
संसद में Rahul गांधी ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय सम्मान से जोड़ा। उनका कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक विषय नहीं, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति हमारी जिम्मेदारी का सवाल है।
सत्तापक्ष ने तर्क दिया कि सरकार रक्षा और कल्याण योजनाओं पर पहले से ही बड़ा खर्च कर रही है। लेकिन विपक्ष ने ECHS और पेंशन मुद्दे पर स्पष्ट समाधान की मांग की।

अन्य कल्याण योजनाओं से तुलना
देश में आयुष्मान भारत जैसी स्वास्थ्य योजनाओं के लिए बड़े बजट आवंटित किए जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि पूर्व सैनिकों की विशेष स्वास्थ्य योजना को पर्याप्त संसाधन क्यों नहीं मिल रहे।
पूर्व सैनिकों का तर्क है कि जिन लोगों ने राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित की, उन्हें स्वास्थ्य और पेंशन के मामले में सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
नीतिगत सुझाव
1. विकलांगता पेंशन पर टैक्स की तत्काल वापसी
आयकर अधिनियम में संशोधन कर विकलांगता पेंशन को पुनः पूर्ण कर-मुक्त किया जा सकता है। इससे हजारों परिवारों को तुरंत राहत मिलेगी।
2. ECHS के लिए स्थायी फंडिंग मॉडल
रक्षा बजट का एक निश्चित प्रतिशत ECHS के लिए आरक्षित किया जा सकता है। साथ ही, समयबद्ध भुगतान और पारदर्शी ऑडिट व्यवस्था से सेवा गुणवत्ता सुधारी जा सकती है।

3. पूर्व सैनिक संगठनों की भागीदारी
पूर्व सैनिक संगठनों को नीति निर्माण और निगरानी प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचें।
सम्मान और जिम्मेदारी का सवाल
Rahul गांधी की अपील दो मुख्य मुद्दों पर केंद्रित है—विकलांगता पेंशन पर कर समाप्त करना और ECHS के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराना।
यह केवल बजट का मामला नहीं, बल्कि उस “अलिखित अनुबंध” का सवाल है जो राष्ट्र अपने सैनिकों से करता है—कि सेवा के बाद भी उनका साथ नहीं छोड़ा जाएगा।
यदि सरकार इन मांगों पर त्वरित निर्णय लेती है, तो यह न केवल आर्थिक राहत देगा, बल्कि देश के रक्षकों के प्रति सम्मान को भी मजबूत करेगा।
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