Rajiv प्रताप रूडी बनाम संजीव बालियान: भाजपा के भीतर एक दिलचस्प मुकाबला
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो वरिष्ठ नेताओं—Rajiv प्रताप रूडी और संजीव बालियान—के बीच चल रहा मुकाबला इस बार संसद या विधानसभा चुनाव का नहीं, बल्कि दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के सचिव पद के लिए है। यह चुनाव न केवल पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन को दर्शाता है, बल्कि भाजपा के आंतरिक लोकतंत्र और रणनीतिक समीकरणों की भी झलक देता है।
कांस्टीट्यूशन क्लब का महत्व
- यह क्लब 1947 में संविधान सभा के सदस्यों के अनौपचारिक मिलन स्थल के रूप में शुरू हुआ था।
- 1965 में राष्ट्रपति एस. राधाकृष्णन द्वारा इसका औपचारिक उद्घाटन किया गया।
- वर्तमान और पूर्व सांसदों के लिए यह एक सामाजिक और बौद्धिक मंच है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राहुल गांधी, सोनिया गांधी जैसे नेता भी सदस्य हैं।
- क्लब में जिम, स्विमिंग पूल, लाइब्रेरी, बैडमिंटन कोर्ट जैसी सुविधाएं हैं।

Rajiv प्रताप रूडी: अनुभव और प्रतिष्ठा का चेहरा
- बिहार के सारण से सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री।
- पेशेवर पायलट और भाजपा के रणनीतिकारों में गिने जाते हैं।
- पिछले 25 वर्षों से क्लब के सचिव पद पर काबिज हैं।
- उनकी छवि एक सुसंस्कृत, शालीन और प्रशासनिक दक्षता वाले नेता की है।
संपत्ति विवरण:
- कुल संपत्ति: ₹8.37 करोड़
- अचल संपत्ति: ₹5.91 करोड़ (दिल्ली और बिहार में कई संपत्तियाँ)
- चल संपत्ति: ₹2.45 करोड़ (बैंक जमा, शेयर, वाहन, गहने)
- देनदारी: ₹6.56 लाख
संजीव बालियान: जमीनी नेता की चुनौती
- उत्तर प्रदेश के मुज़फ्फरनगर से पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री।
- पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के प्रभावशाली नेता।
- उनकी शैली सरल, स्पष्ट और आमजन से जुड़ी हुई है।
- इस बार उन्होंने रूडी को चुनौती देकर मुकाबले को रोमांचक बना दिया है।

संपत्ति विवरण:
- कुल संपत्ति: ₹3.11 करोड़
- अचल संपत्ति: ₹49.35 लाख (मुज़फ्फरनगर, नोएडा में संपत्तियाँ)
- चल संपत्ति: ₹2.62 करोड़ (बैंक जमा, शेयर, वाहन)
- देनदारी: कोई नहीं
मुकाबले की रणनीति और समीकरण
- यह चुनाव 12 अगस्त को होना है, और भाजपा के भीतर ही गुटबंदी देखने को मिल रही है।
- CM रमेश और निशिकांत दुबे जैसे नेता बालियान के समर्थन में सक्रिय हैं।
- बालियान दक्षिण भारत के सांसदों तक पहुंच बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे उनका प्रभाव क्षेत्र बढ़े।
- वहीं, रूडी अपने पुराने नेटवर्क और प्रशासनिक अनुभव पर भरोसा कर रहे हैं।
राजनीतिक रंग और सामाजिक विमर्श
- यह मुकाबला सिर्फ एक क्लब पद के लिए नहीं है, बल्कि भाजपा के भीतर बदलते समीकरणों का संकेत भी है।
- जातीय समीकरण भी अहम भूमिका निभा रहे हैं—रूडी ब्राह्मण समुदाय से हैं, जबकि बालियान जाट नेता हैं।
- युवा सांसदों की सक्रियता, डिनर डिप्लोमेसी और बैडमिंटन कोर्ट तक की चर्चा इस चुनाव को एक पॉलिटिकल पॉटबॉयलर बना रही है।

कौन जीतेगा यह मुकाबला?
Rajiv प्रताप रूडी का अनुभव और प्रतिष्ठा उन्हें एक मजबूत उम्मीदवार बनाता है, जबकि संजीव बालियान की जमीनी पकड़ और युवा सांसदों का समर्थन उन्हें एक चुनौतीपूर्ण प्रतिद्वंद्वी बनाता है। यह मुकाबला भाजपा के भीतर नेतृत्व, प्रभाव और रणनीति की परीक्षा है। परिणाम चाहे जो भी हो, यह चुनाव पार्टी के भीतर लोकतांत्रिक प्रक्रिया और प्रतिस्पर्धा की जीवंतता को दर्शाता है।
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