राजनीतिक आलोचना के बीच योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर विकास के लिए पीएम मोदी की सराहना की
अयोध्या में राम मंदिर आज आस्था और संकल्प का सशक्त प्रतीक बनकर खड़ा है। 2026 में निर्माण से जुड़े नए पड़ाव सामने आते ही, देश की political में भी बहस तेज़ हो गई है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका की खुलकर सराहना की और इसे “राष्ट्र की आत्मा की जीत” बताया। वहीं, विपक्षी दल लागत और प्राथमिकताओं को लेकर तीखे सवाल उठा रहे हैं।
योगी आदित्यनाथ का यह बयान केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि एक मज़बूत राजनीतिक संदेश भी है। यह दिखाता है कि भारत की political में धार्मिक प्रतीक किस तरह वोटों और सत्ता की रणनीति को प्रभावित करते हैं। आइए समझते हैं—योगी की समर्थन-रेखा, विपक्ष की आपत्तियाँ और आने वाले चुनावों पर इसका असर।
अडिग समर्थन: राम मंदिर परियोजना पर योगी आदित्यनाथ का रुख-political
योगी आदित्यनाथ ने हालिया रैलियों और कार्यक्रमों में राम मंदिर विकास के लिए प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को निर्णायक बताया। जनवरी 2026 में लखनऊ के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा,
“मोदी जी के विज़न ने सपनों को पत्थर में ढाल दिया।”
उनका कहना था कि केंद्र की निगरानी में न सिर्फ़ फंड समय पर उपलब्ध हुए, बल्कि न्यायालय द्वारा तय समयसीमा का भी पालन हुआ।
यह समर्थन केवल भावनात्मक नहीं है। योगी इसे “डबल इंजन सरकार” के मॉडल से जोड़ते हैं—जहाँ केंद्र और राज्य मिलकर काम करते हैं। उनके मुताबिक, राम मंदिर इस समन्वय का जीवंत उदाहरण है। बात सिर्फ़ निर्माण की नहीं, बल्कि यह दिखाने की है कि टीम वर्क से बड़े लक्ष्य पूरे किए जा सकते हैं।

पीएम मोदी के विज़न और कार्यान्वयन पर योगी की दलील-political
योगी आदित्यनाथ के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक मंदिर का 80% से अधिक काम पूरा हो चुका है। उन्होंने जोर देकर कहा कि न तो देरी हुई और न ही कोई बड़ा विवाद।
“हर रुपया अपने उद्देश्य के लिए इस्तेमाल हुआ,” कहकर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज किया।
योगी ने रोजगार और पर्यटन का भी ज़िक्र किया—अयोध्या में हज़ारों स्थानीय लोगों को काम मिला और आने वाले वर्षों में अरबों रुपये के पर्यटन लाभ की उम्मीद है। इस तरह, यह प्रशंसा मोदी सरकार को आलोचनाओं से बचाने की ढाल भी बनती है।
यूपी के मुख्यमंत्री का समर्थन क्यों अहम है?
बीजेपी के भीतर योगी आदित्यनाथ की आवाज़ बेहद प्रभावशाली है। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटें किसी भी राष्ट्रीय जीत की कुंजी मानी जाती हैं। योगी का समर्थन मोदी के नेतृत्व को और मज़बूती देता है।
राजनीतिक इतिहास बताता है कि 1990 के दशक में राम मंदिर आंदोलन ने बीजेपी को नई ऊँचाई दी। 2026 में योगी उसी भावनात्मक आधार को मज़बूत रखने की कोशिश कर रहे हैं—ताकि कोर वोटर भी जुड़े रहें और विकास चाहने वाले मतदाता भी।
प्रतिपक्ष की कहानी: राम मंदिर को लेकर राजनीतिक आलोचना
विपक्षी दलों ने राम मंदिर परियोजना के समय और लागत पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि मंदिर पर ज़ोर देकर सरकार किसानों, बेरोज़गारी और महंगाई जैसे मुद्दों से ध्यान हटा रही है।
एक विपक्षी सांसद ने दिसंबर 2025 में कहा,
“पत्थरों पर करोड़ों खर्च करने से पहले लोगों की थाली भरनी चाहिए।”

आलोचना के मुख्य बिंदु
समय: विपक्ष का कहना है कि 2024 में जल्दबाज़ी में उद्घाटन किया गया, जबकि कोविड के बाद कई ज़रूरी सामाजिक मुद्दे अनदेखे रह गए।
लागत: ट्रस्ट के अनुसार अब तक लगभग 3,500 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन विपक्ष 20% अतिरिक्त खर्च का दावा करता है और विस्तृत ऑडिट की मांग कर रहा है।
शासन: सपा और अन्य दलों का आरोप है कि कल्याणकारी योजनाओं की तुलना में धार्मिक परियोजना को प्राथमिकता दी गई।
इन आरोपों का उद्देश्य शहरी युवाओं और अल्पसंख्यक मतदाताओं को साधना माना जा रहा है, जो मंदिर राजनीति को विभाजनकारी मानते हैं।
न्यायिक और प्रक्रियात्मक निगरानी पर सवाल
2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने कानूनी रास्ता साफ किया, लेकिन आलोचक कहते हैं कि उसके बाद की प्रक्रिया में पारदर्शिता कम रही। कुछ कानूनी विशेषज्ञों ने ठेकों और फंडिंग में खुले टेंडर न होने पर सवाल उठाए।
हालाँकि, अब तक किसी नए न्यायिक हस्तक्षेप की घोषणा नहीं हुई है, जिससे आलोचना राजनीतिक मंचों तक ही सीमित है।
रणनीतिक असर: यह प्रशंसा राजनीति को कैसे प्रभावित करती है?
योगी आदित्यनाथ की सराहना बीजेपी के कोर हिंदुत्व समर्थकों को एकजुट करती है। राम मंदिर भावनात्मक गर्व का विषय है, और इसे मोदी के नेतृत्व से जोड़ना पार्टी की स्थिति को मज़बूत करता है।
यह असर विदेशों तक दिखता है। प्रवासी भारतीय सोशल मीडिया पर मंदिर निर्माण की तस्वीरें साझा करते हैं, जिससे वैश्विक समर्थन भी बनता है।

हिंदुत्व आधार और वोटर एकजुटता
2026 के एक सर्वे के अनुसार, यूपी के लगभग 60% हिंदू मतदाता राम मंदिर परियोजना का पूर्ण समर्थन करते हैं। योगी का बयान इसी समर्थन को स्थायी बनाए रखने की कोशिश है—खासकर 2029 के चुनावों को ध्यान में रखते हुए।
आरोपों से बचाव की रणनीति
योगी की प्रशंसा आलोचनाओं के खिलाफ कवच की तरह काम करती है। वे ट्रस्ट की रिपोर्ट और सरकारी ऑडिट का हवाला देकर विपक्ष को “राजनीतिक शोर” बताने की रणनीति अपनाते हैं।
राजनीतिक संचार की सीख: नैरेटिव पर नियंत्रण
इतिहास गवाह है कि बड़े प्रोजेक्ट्स राजनीतिक पूंजी बनते हैं—नेहरू के बांध हों या गांधी का नमक सत्याग्रह। आज राम मंदिर उसी श्रेणी में रखा जा रहा है। योगी और मोदी की टीम इसे “विजन से विजय” की कहानी के रूप में पेश कर रही है।
राज्य और केंद्र के बीच संदेशों की यह तालमेल विपक्ष की बिखरी आवाज़ों पर भारी पड़ती है।
विरासत और भविष्य की राजनीति
राम मंदिर को लेकर पीएम मोदी की सराहना केवल प्रशंसा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है। यह परियोजना के बचाव, विपक्षी आरोपों के जवाब और वोटर एकजुटता—तीनों का काम करती है।
आने वाले वर्षों में, खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में, इसका असर और गहरा हो सकता है। राम मंदिर की विरासत अब सिर्फ़ धार्मिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और सांस्कृतिक भी बन चुकी है—जो भारत की कहानी को आगे आकार देती रहेगी।
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