Rani मुखर्जी ने बेटी अदीरा को रखा गोद में: ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के राष्ट्रीय पुरस्कार ने बदला सब कुछ
Rani मुखर्जी की जिंदगी में एक ऐसा पल आया जब उन्होंने न सिर्फ अपना करियर छुआ नई ऊंचाइयों पर, बल्कि अपनी बेटी अदीरा को भी सीने से लगाया। फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए मिला पहला राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें इतना खुश कर गया कि उन्होंने फैसला लिया—अदीरा को हमेशा पास रखेंगी। यह कहानी सिर्फ एक अवॉर्ड की नहीं, बल्कि एक मां की ताकत और फैमिली की अहमियत की है। क्या आप जानते हैं कि यह पुरस्कार रानी के लिए कैसे गेम-चेंजर साबित हुआ? आइए, इसकी पूरी डिटेल में जाते हैं। इस लेख में हम रानी के सफर, फिल्म की कहानी और उनके व्यक्तिगत फैसले को समझेंगे। यह हर महिला के लिए एक बड़ा सबक है कि करियर और घर दोनों संभाले जा सकते हैं।
Rani मुखर्जी का करियर सफर: पुरस्कार तक का संघर्ष
शुरुआती दिनों से बॉलीवुड में एंट्री
Rani मुखर्जी ने 1998 में ‘घुलाम’ से बॉलीवुड में कदम रखा। वहां से उनका सफर शुरू हुआ जो आज तक चमकता है। ‘हम तुम’ में उनकी रोमांटिक भूमिका ने दिल जीत लिया। फिर ‘ब्लैक’ में एक अंधी लड़की का किरदार निभाया, जो अमिताभ बच्चन के साथ कमाल का था। ‘बंजारन’ जैसी फिल्मों में उन्होंने सशक्त महिलाओं को चुना, जो समाज को आईना दिखाती हैं। रानी को कई फिल्मफेयर अवॉर्ड्स मिले, जैसे ‘हम तुम’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस। उन्होंने हमेशा ऐसे रोल्स लिए जो महिलाओं की ताकत दिखाते हैं। रानी मुखर्जी फिल्में सर्च करने वाले फैंस जानते हैं कि उनका हर किरदार यादगार है। शुरुआत से ही संघर्ष किया, लेकिन कभी हारी नहीं। यह सफर बताता है कि मेहनत रंग लाती है।
‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ का चयन और चुनौतियां
Rani ने इस फिल्म में एक मां का रोल चुना जो अपने बच्चों के लिए नॉर्वे के सिस्टम से भिड़ती है। यह रोल उनके लिए आसान नहीं था। प्रोडक्शन के दौरान कई चुनौतियां आईं, जैसे रियल लाइफ स्टोरी को सही से दिखाना। फिल्म 2011 की सच्ची घटना पर बेस्ड है, जहां भारतीय मां ने विदेशी कानूनों से लड़ा। ट्रेलर रिलीज होते ही फैंस उत्साहित हो गए। क्रिटिक्स ने रानी की एक्टिंग को सराहा, कहा कि यह उनका अब तक का बेस्ट वर्क है। बॉक्स ऑफिस पर फिल्म ने अच्छा कलेक्शन किया, खासकर ओटीटी पर। रानी मुखर्जी नई फिल्म के सर्च में यह टॉप पर आ गई। एक इंटरव्यू में रानी ने कहा, “यह रोल मेरे दिल को छू गया, क्योंकि मैं भी मां हूं।” शूटिंग में इमोशंस कंट्रोल करना मुश्किल था। फिर भी, उन्होंने इसे परफेक्ट बनाया।

राष्ट्रीय पुरस्कार की प्राप्ति: पहली बार का जश्न
18 अगस्त 2023 को 67वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की घोषणा हुई। Rani को बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड मिला ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ के लिए। यह उनका पहला नेशनल अवॉर्ड था, जो करियर का बड़ा मीलस्टोन है। समारोह में रानी की स्पीच इमोशनल थी। उन्होंने कहा, “यह अवॉर्ड मेरी बेटी और फैमिली को समर्पित है।” अन्य विनर्स में नयनीता चक्रवर्ती को भी सम्मान मिला। Rani ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट शेयर की, जिसमें खुशी साफ झलक रही थी। फैंस ने कमेंट्स में बधाई दी। यह जश्न सिर्फ रानी का नहीं, बल्कि पूरे क्रू का था। पुरस्कार ने साबित किया कि सच्ची एक्टिंग हमेशा जीतती है। Rani की आंखों में चमक आ गई उस पल।
फिल्म ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’: एक सच्ची कहानी का परिवर्तन
फिल्म की प्लॉट और थीम्स
फिल्म एक भारतीय मां की कहानी है जो नॉर्वे में रहती है। वहां चाइल्ड वेलफेयर सिस्टम उसके बच्चों को छीन लेता है। मां कोर्ट में लड़ती है, सांस्कृतिक अंतर से जूझती है। मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे स्टोरी सच्ची घटना से ली गई है। डायरेक्टर अश्विनी अय्यर तिवारी ने इसे इमोशनल तरीके से दिखाया। थीम्स में मातृत्व की ताकत और परिवार की अहमियत है। कोई स्पॉइलर नहीं देंगे, लेकिन यह फिल्म सोचने पर मजबूर कर देती है। भारतीय मूल्यों vs पश्चिमी कानून का टकराव दिलचस्प है। दर्शक इसे देखकर भावुक हो जाते हैं। फिल्म ने ग्लोबल मुद्दों को छुआ।
Rani मुखर्जी का परफॉर्मेंस: पुरस्कार विजेता रोल
Rani का रोल फिल्म का दिल है। उन्होंने मां के दर्द को इतना गहरा दिखाया कि दर्शक रो पड़े। इमोशनल सीन में उनकी आंखें बोलती हैं। ट्रेनिंग के लिए उन्होंने रिसर्च की, रियल मां से मिलीं। नीलाजी कोसर ने सपोर्टिंग रोल में कमाल किया। जिम सरभ का किरदार भी मजबूत है। हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा, “Rani का अब तक का बेस्ट परफॉर्मेंस।” फिल्म को कई अवॉर्ड्स मिले, जैसे बेस्ट फिल्म ऑन सोशल इश्यू। रानी की मेहनत साफ दिखती है। यह रोल उन्हें नेशनल लेवल पर ले गया। फैंस कहते हैं, रानी जैसी एक्ट्रेस कम हैं।
फिल्म का सामाजिक प्रभाव
फिल्म रिलीज के बाद पैरेंटिंग पर बहस छिड़ गई। सोशल मीडिया पर लोग अपनी स्टोरीज शेयर करने लगे। यह 2011 की रियल घटना से जुड़ी है, जहां एक मां ने बच्चों को वापस लिया। फिल्म का प्रभाव गहरा है, खासकर चाइल्ड राइट्स पर। दर्शकों ने कहा, यह फिल्म बदलाव लाएगी। इंटरनेशनल लेवल पर भी चर्चा हुई। रिलीज के बाद रिव्यूज पॉजिटिव आए। फिल्म का प्रभाव लंबे समय तक रहेगा। यह समाज को आईना दिखाती है।
Rani का व्यक्तिगत जीवन: बेटी अदीरा के साथ फैमिली बॉन्ड
विवाह और मातृत्व का सफर
Rani ने 2014 में आदित्य चोपड़ा से शादी की। 2015 में बेटी अदीरा का जन्म हुआ। मातृत्व ने उनकी जिंदगी बदल दी। करियर ब्रेक लिया, लेकिन जल्दी वापसी की। एक इंटरव्यू में Rani ने कहा, “फैमिली मेरी ताकत है।” रानी मुखर्जी फैमिली के बारे में फैंस हमेशा उत्सुक रहते हैं। उन्होंने प्राइवेसी रखी, लेकिन खुशियां शेयर कीं। अदीरा अब 8 साल की है। यह सफर आसान नहीं था। रानी ने बैलेंस बनाया।
पुरस्कार के समय अदीरा को पास रखने का निर्णय
पुरस्कार इवेंट पर Rani ने अदीरा को गोद में लिया। भावनात्मक वजह थी—यह मॉमेंट अपनी बेटी के साथ जीना चाहती थीं। रानी ने कहा, “अदीरा के बिना यह खुशी अधूरी है।” रेड कार्पेट पर उनका लुक सिंपल लेकिन स्टनिंग था। सफेद साड़ी में Rani चमक रही थीं। अदीरा की मुस्कान सबको प्यारी लगी। यह फैसला मातृत्व की मिसाल है। Rani ने करियर के बीच फैमिली को प्राथमिकता दी।
वर्क-लाइफ बैलेंस: चुनौतियां और समाधान
बॉलीवुड में मां बनने के बाद कमबैक मुश्किल है। Rani ने इसे चैलेंज किया। करीना कपूर जैसे सितारे भी ऐसा ही करते हैं। Rani की स्ट्रैटेजी: समय का सही इस्तेमाल। सुबह फैमिली के साथ, शाम शूटिंग। सपोर्ट सिस्टम जरूरी है, जैसे पति का साथ। चुनौतियां आती हैं, लेकिन हल निकलता है। महिलाएं सीख सकती हैं—प्राथमिकताएं सेट करें। Rani का उदाहरण प्रेरक है।
Rani मुखर्जी की प्रेरणा: अन्य महिलाओं के लिए संदेश
पुरस्कार से मिली नई ऊर्जा
यह अवॉर्ड Rani को वैलिडेशन दिया। अब वे और सशक्त रोल्स चुनेंगी। अपकमिंग फिल्म ‘मिस्टर एंड मिसेज महेश्वरी’ में भी मजा आएगा। पुरस्कार ने कॉन्फिडेंस बढ़ाया। Rani कहती हैं, “यह नई शुरुआत है।” फैंस इंतजार कर रहे हैं। ऊर्जा मिली तो क्रिएटिविटी बढ़ेगी।
सशक्तिकरण और एक्शनेबल सलाह
Rani महिलाओं को कहती हैं, करियर और घर बैलेंस करें। टिप्स:
- प्राथमिकताएं तय करें।
- फैमिली सपोर्ट लें।
- खुद पर भरोसा रखें।
एक कोट: “मातृत्व ने मुझे मजबूत बनाया।” महिलाओं के लिए प्रेरणा यह है कि हार न मानें। Rani की तरह स्ट्रॉन्ग बनें। यह संभव है।
उद्योग में बदलाव की उम्मीद
बॉलीवुड में महिला-केंद्रित फिल्में बढ़ रही हैं। Rani का योगदान बड़ा है। अब ज्यादा सशक्त स्टोरीज आ रही हैं। ट्रेंड पॉजिटिव है। रानी जैसे सितारे बदलाव ला रहे हैं। उम्मीद है, और बेहतर होगा।
Rani मुखर्जी की जीत का सार
Rani मुखर्जी ने ‘मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे’ से नेशनल अवॉर्ड जीता और बेटी अदीरा को पास रखा। यह जीत करियर और मातृत्व का बैलेंस दिखाती है। सफलता तब पूरी होती है जब फैमिली साथ हो।
की टेकअवेज:
- माइलस्टोन फैमिली के साथ सेलिब्रेट करें।
- सशक्त रोल्स चुनें जो बदलाव लाएं।
- बैलेंस के लिए प्राथमिकताएं सेट करें।
Rani की यात्रा हर महिला को प्रेरित करती है। आप भी अपना सफर शुरू करें। क्या आप रानी की तरह मजबूत हैं? सोचिए और एक्शन लें।
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