‘शाम 4 बजे के बाद Real काम’: दिल्ली ब्लास्ट केस में जैश से जुड़ी महिला डॉक्टर पर गंभीर आरोपों की परतें खुलीं
कल्पना कीजिए — एक डॉक्टर जो दिन में मरीजों की जान बचाती है,
लेकिन शाम ढलते ही आतंक की साजिश बुनती है।
दिल्ली ब्लास्ट जांच में ऐसा ही चौंकाने वाला दावा सामने आया है।
एक महिला डॉक्टर, जो कथित रूप से जैश-ए-मोहम्मद (JeM) से जुड़ी है,
अपने सहयोगियों से अक्सर कहती थी —
“Real Work After 4 PM” (शाम 4 बजे के बाद असली काम शुरू होता है)।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह कोड वाक्य उसकी गुप्त गतिविधियों का संकेत था।
दिन में क्लिनिक चलाने वाली डॉक्टर, शाम को कथित तौर पर आतंकी नेटवर्क से जुड़ जाती थी।
यह मामला सवाल उठाता है — क्या भरोसे के पेशों में भी अब खतरे की दरारें हैं?
मुख्य आरोपी: डॉक्टर आयशा खान की प्रोफ़ाइल
पृष्ठभूमि और पेशेवर जीवन
डॉ. आयशा खान, दिल्ली की एक प्राइवेट क्लिनिक में जनरल फिजिशियन के रूप में काम करती थीं।
पांच साल से उनकी पहचान एक शांत, जिम्मेदार डॉक्टर के रूप में थी।
मरीजों को उन पर भरोसा था — किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि उनके पीछे ऐसा राज छिपा है।
उनकी ड्यूटी सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक चलती थी।
शाम के बाद का समय ही कथित तौर पर उनका “असली काम” था।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली आयशा पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहीं,
लेकिन NIA के मुताबिक, ऑनलाइन संपर्कों के ज़रिए वह धीरे-धीरे कट्टरपंथी बनती चली गईं।

जैश-ए-मोहम्मद से संबंध: कैसे जुड़ीं आतंक नेटवर्क से
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की रिपोर्ट में दावा है कि
डॉ. आयशा के मोबाइल इंटरसेप्ट में जैश के हैंडलर्स से बातचीत के सबूत मिले हैं।
उनका नाम कश्मीर में पकड़े गए एक आतंकवादी की डायरी में भी पाया गया।
जांच में सामने आया कि वह पिछले दो वर्षों से
ऑनलाइन कट्टरपंथी समूहों से जुड़ी हुई थीं।
कथित तौर पर उन्होंने फंडिंग और स्थानीय जानकारी जुटाने में मदद की थी।
हालांकि अभी तक उनके खिलाफ सीधे धमाके में शामिल होने के सबूत नहीं मिले,
लेकिन आतंकी गतिविधियों में सहयोग के गंभीर आरोप हैं।
“Real Work After 4 PM” — कोडवर्ड या कबूलनामा?
दिल्ली पुलिस की पूछताछ में यह वाक्य बार-बार सामने आया।
सहकर्मियों ने बताया कि वह अक्सर कहती थीं —
“अब असली काम शाम 4 बजे के बाद शुरू होता है।”
यह वाक्य सामान्य लग सकता है,
लेकिन जांच में सामने आया कि इसी समय वह
गुप्त बैठकों, कॉल्स और फंड ट्रांसफर जैसे काम करती थीं।
यह कोड लैंग्वेज आतंक नेटवर्क में सामान्य है —
जहां शब्दों के पीछे छिपे होते हैं साजिश के संकेत।

जैसे कुछ मामलों में “टी टाइम” का मतलब बम डिलीवरी होता था,
वैसे ही यहां “4 बजे के बाद” का मतलब था ऑपरेशन का समय।
दिल्ली ब्लास्ट कनेक्शन: साजिश का तरीका और भूमिका
जांच सूत्रों के अनुसार,
यह साजिश दिल्ली के एक भीड़भाड़ वाले बाजार को निशाना बनाने की थी।
बम बनाने के लिए खाद से मिलने वाले रसायनों का इस्तेमाल हुआ था।
डॉ. आयशा ने कथित तौर पर इन सामग्रियों की खरीद और जगह की पहचान में मदद की।
उनकी क्लिनिक का लोकेशन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था —
वह कई बाजारों के पास थी, जिससे वह सर्वे और जानकारी आसानी से जुटा सकती थीं।
| भूमिका | विवरण |
|---|---|
| डॉक्टर | कोऑर्डिनेशन और जानकारी पहुंचाना |
| फार्मासिस्ट | केमिकल सामग्री जुटाना |
| इंजीनियर | टाइमर और डिवाइस तैयार करना |
| नेटवर्क का आकार | 10 से अधिक सदस्य, कई राज्यों में सक्रिय |
यह सब एक अंडरग्राउंड नेटवर्क (Overground Workers) के जरिये चलाया जा रहा था —
जो हथियार नहीं चलाते, पर साजिश के हर धागे को जोड़ते हैं।
जांच एजेंसियों की कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
पिछले महीने मिली एक टिप-ऑफ के बाद NIA और दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने संयुक्त छापेमारी की।
डॉ. आयशा को उनके क्लिनिक से ही गिरफ्तार किया गया।
घर से लैपटॉप, तीन मोबाइल, और एन्क्रिप्टेड चैट रिकॉर्ड्स बरामद हुए।
अब एजेंसी AI टूल्स से उनके डिजिटल ट्रेल की जांच कर रही है।
उनसे जुड़े सभी संपर्कों पर 24 घंटे नजर रखी जा रही है।

विशेषज्ञों की राय: शिक्षित वर्ग में कट्टरपंथ की बढ़ती प्रवृत्ति
सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार,
शिक्षित और प्रोफेशनल वर्ग अब कट्टरपंथी संगठनों के लिए नई भर्ती का केंद्र बन गया है।
एक अध्ययन के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में
शहरों में ऐसे मामलों में 20% तक बढ़ोतरी हुई है।
डॉ. फ़ातिमा, एक आतंकवाद अध्ययन विशेषज्ञ, कहती हैं —
“सोशल मीडिया और वैचारिक अलगाव शिक्षित लोगों को भी जाल में फंसा देता है।
जब उन्हें जीवन का कोई ‘उद्देश्य’ नहीं दिखता, तो ऐसे समूह उन्हें अर्थ देते हैं।”
डॉक्टर जैसे भरोसेमंद पेशों में इस तरह का गिरना
सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई चुनौती है।
सफेद कोट के पीछे छिपे साये
“Real Work After 4 PM” का मामला बताता है कि
अब आतंकवाद सिर्फ बंदूक या बम तक सीमित नहीं रहा —
यह सामान्य चेहरों के पीछे छिपा खतरा है।
डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेशनल — कोई भी इससे अछूता नहीं।
दिल्ली ब्लास्ट की जांच अब एक बड़ा सबक बन रही है —
विश्वास, जागरूकता और सतर्कता ही सबसे मजबूत हथियार हैं।
अगर आसपास किसी की गतिविधियाँ संदिग्ध लगें —
रिपोर्ट करें, अफवाह नहीं फैलाएं।
सतर्क समाज ही सुरक्षित समाज बनाता है।
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