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रायपुर/जांजगीर, 14 जून छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में बोरवेल के लिए खोदे गए गड्ढे में फंसे
राहुल साहू को निकालने में जुटी रेस्क्यू टीम को बड़ी सफलता मिली है। 88 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद रेस्क्यू

टीम राहुल के करीब पहुंच गई है।

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), सेना और पुलिसकर्मियों सहित बचाव
दल बच्चे तक पहुंचने के लिए समानांतर गड्ढे से सुरंग बनाने के मकसद से सतह के नीचे की चट्टानों को काटने
के लिए संघर्ष करते रहे।

रेस्क्यू टीम उसकी आवाज सुन रही है। अब से कुछ देर बाद राहुल को बोरवेल से बाहर निकाला जाएगा। मौके पर
मौजूद पुलिस अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है।

बाहर निकालने के बाद यहां से उन्हें सीधे अपोलो अस्पताल
ले जाया जाएगा। शुक्रवार शाम से चल रहे व्यापक बचाव अभियान में 500 से अधिक कर्मी जुटे हुए हैं। राहुल साहू

शुक्रवार दोपहर करीब दो बजे मलखरोदा विकासखंड के पिहरिड गांव में अपने घर के पिछवाड़े में 80 फुट गहरे

बोरवेल में गिर गया था। वह करीब 60 फीट की गहराई पर फंस गया था। ऑक्सीजन की आपूर्ति के लिए एक
पाइप लाइन लगाई गई है।

एनडीआरएफ के निरीक्षक महाबीर मोहंती के अनुसार कठोर चट्टानों के कारण बच्चे तक पहुंचने के लिए समानांतर
गड्ढे और बोरवेल के बीच लगभग 15 फीट लंबी एक सुरंग बनाने के काम में बाधा आ रही है।

बचावकर्मियों के
लिए ड्रिलिंग मशीनों से भी चट्टान को काटना मुश्किल हो रहा है।

उन्होंने बताया कि हम स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ लगातार कैमरे के माध्यम से राहुल की स्थिति की निगरानी
कर रहे हैं। एक स्पीकर को रस्सी से नीचे उतारा है ताकि उसके माता-पिता उससे बात कर सकें और उसका हौसला

बढ़ा सकें। उसे केला और ओआरएस का घोल दिया गया है। बच्चा मानसिक रूप से स्वस्थ नहीं है और ठीक से
बात नहीं कर पा रहा है। बोरवेल के अंदर कोई केसिंग पाइप नहीं है।

बोरवेल आठ इंच चौड़ा है, इसलिए मिट्टी
धंसने का खतरा है।

स्वास्थ्य कर्मियों की एक टीम ने बच्चे को तत्काल सहायता पहुंचाने के लिए सभी सुविधाओं के साथ एक एम्बुलेंस
भी तैयार रखी है। प्रशासन की विज्ञप्ति के अनुसार बोरवेल के अंदर कुछ पानी था जहां बच्चा फंसा था। क्षेत्र के

ग्रामीणों को अपने बोरवेल चालू करने के लिए कहा गया था, जबकि भूजल स्तर को कम करने के लिए पास के दो
बांध से भी पानी छोड़ा जा रहा है।