Rishabh

भारत और इंग्लैंड के बीच लॉर्ड्स टेस्ट के चौथे दिन एक दिलचस्प घटनाक्रम ने क्रिकेट प्रशंसकों और विशेषज्ञों का ध्यान खींचा।

जब टीम इंडिया ने अपनी दूसरी पारी शुरू की और जल्दी-जल्दी विकेट गिरने लगे, तब एक ऐसा निर्णय लिया गया जिसने सबको चौंका दिया—नाइटवॉचमैन के रूप में आकाश दीप को बल्लेबाजी के लिए भेजा गया, जबकि उम्मीद थी कि Rishabh पंत मैदान पर उतरेंगे। इस फैसले के पीछे की कहानी को रविचंद्रन अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर साझा किया, जिसमें उन्होंने पंत की एक आदत का खुलासा किया।

 घटनाक्रम की पृष्ठभूमि

लॉर्ड्स टेस्ट के चौथे दिन भारत को 193 रन का लक्ष्य मिला था। दिन के अंत तक भारत ने 4 विकेट पर 58 रन बना लिए थे। शुभमन गिल, यशस्वी जायसवाल और विराट कोहली जैसे शीर्ष बल्लेबाज जल्दी आउट हो गए थे। ऐसे में जब चौथा विकेट गिरा, तो सभी की नजरें इस बात पर थीं कि अगला बल्लेबाज कौन होगा। लेकिन टीम ने Rishabh पंत की जगह आकाश दीप को भेजा, जो नाइटवॉचमैन की भूमिका निभा रहे थे।

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अश्विन का खुलासा

अश्विन ने बताया कि यह कोई पहली बार नहीं था जब Rishabh पंत ने दिन के आखिरी ओवरों में बल्लेबाजी से इनकार किया हो। उन्होंने एक पुराना किस्सा साझा किया जब बांग्लादेश के खिलाफ मीरपुर टेस्ट में भी ऐसा ही हुआ था। उस समय भी Rishabh पंत ने कोच राहुल द्रविड़ से कहा था, “मैं नहीं जा रहा बैटिंग करने।” उस दिन भी 30-40 मिनट का खेल बाकी था और टीम को अक्षर पटेल और जयदेव उनादकट को क्रमशः बल्लेबाजी और नाइटवॉचमैन के रूप में भेजना पड़ा था

Rishabh  रणनीति या डर?

इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया और विशेषज्ञों के बीच बहस छिड़ गई। कुछ ने इसे रणनीतिक बताया, तो कुछ ने सवाल उठाए कि क्या भारतीय बल्लेबाज दबाव में आकर नाइटवॉचमैन का सहारा ले रहे हैं। अश्विन ने स्पष्ट किया कि Rishabh पंत को दिन के आखिरी 30-40 मिनट में बल्लेबाजी करना पसंद नहीं है। यह उनकी व्यक्तिगत मानसिकता का हिस्सा है, जिससे वह बचना चाहते हैं ताकि उनकी बल्लेबाजी पर असर न पड़े।

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अन्य उदाहरण

अश्विन ने न्यूजीलैंड के खिलाफ एक टेस्ट का भी जिक्र किया, जिसमें विराट कोहली के आउट होने के बाद पंत को भेजा जाना था, लेकिन उनकी जगह मोहम्मद सिराज को नाइटवॉचमैन के रूप में भेजा गया। यह दर्शाता है कि यह कोई एक बार की घटना नहीं है, बल्कि एक पैटर्न है जिसे टीम इंडिया ने कई बार अपनाया है।

 

टीम की सोच

अश्विन ने यह भी कहा कि टीम का उद्देश्य अपने प्रमुख बल्लेबाजों को बचाना होता है, खासकर जब लक्ष्य छोटा हो और विकेट जल्दी गिर रहे हों। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अगर नाइटवॉचमैन जल्दी आउट हो जाए, तो टीम और दबाव में आ जाती है। ऐसे में यह रणनीति जोखिम भरी भी हो सकती है।

Rishabh पंत का “मैं नहीं जा रहा बैटिंग करने” वाला बयान सिर्फ एक मजाकिया पल नहीं था, बल्कि एक गंभीर रणनीतिक निर्णय का हिस्सा था। अश्विन के खुलासे ने इस फैसले के पीछे की सोच को स्पष्ट किया और यह दिखाया कि कैसे व्यक्तिगत पसंद और टीम रणनीति एक-दूसरे से जुड़ी होती हैं। यह घटना भारतीय क्रिकेट में नाइटवॉचमैन की भूमिका और बल्लेबाजों की मानसिकता को समझने का एक दिलचस्प उदाहरण बन गई है।

Rishabh Pant breaks all-time record at Lord's | Cricket News – India TV

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