समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले जाति जनगणना को ‘पीडीए सरकार’ के विजन से जोड़ा
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आगामी 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले जातीय जनगणना को अपनी पार्टी के ‘पीडीए सरकार’ के विजन से जोड़ते हुए एक महत्वपूर्ण बयान दिया है।
अखिलेश यादव का बयान
अखिलेश यादव ने कहा कि “2027 में उत्तर प्रदेश में पीडीए की सरकार बनते ही जातीय जनगणना कराई जाएगी”। उन्होंने इसे सामाजिक न्याय की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया और कहा कि इससे वंचित वर्गों को उनका हक मिल सकेगा। अखिलेश ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को संगठित कर सशक्त करेगी। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह जातीय जनगणना नहीं होने देना चाहती है, क्योंकि इससे सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोगों का वर्चस्व खत्म हो जाएगा।
पीडीए (PDA) का विजन
अखिलेश यादव ने पीडीए को “पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक” समुदायों का गठबंधन बताया, जो भाजपा के कथित “नफरत फैलाने वाली राजनीति” के खिलाफ एकजुट है। उन्होंने कहा कि पीडीए की एकता से ही जातीय जनगणना संभव हुई है, और यह “90% पीडीए की एकजुटता की 100% जीत” है। अखिलेश ने इसे “लोकतांत्रिक क्रांति का पहला कदम” करार दिया।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भाजपा ने जातीय जनगणना के निर्णय को “लोकतंत्र को मजबूत करने वाला” बताया है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लिया गया “ऐतिहासिक निर्णय” बताया, जो “देश की राजनीति में एक ऐतिहासिक क्षण” है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय “संविधान और लोकतंत्र की रक्षा” के लिए लिया गया है।
आगामी चुनावों पर असर
जातीय जनगणना के निर्णय के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण उभर रहे हैं। भाजपा ने “अगड़ा” (सवर्ण) और “पिछड़ा-दलित” समीकरण को उभारने की कोशिश की है, जबकि सपा ने “पीडीए” गठबंधन को मजबूत करने पर जोर दिया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह बदलाव आगामी विधानसभा चुनावों पर गहरा असर डाल सकता है।

