इंडिया सावधान न्यूज़ मजहर अंसारी
लखनऊ बदायूं , देश आजाद होने से अब तक बदायूं जनपद अपनी बदहाली के लिए आंसू बहा रहा है, इन सबके पीछे जनपद बदायूं में समाजवादी पार्टी सबसे ज्यादा जिम्मेवार हैं क्यूं कि यहां इस सीट पर तीस साल तक लगातार कब्जा
बनाकर रखा हुआ था और इस तरह सबसे ज्यादा बदायूं लोक सभा सीट पर राज करने वाली समाजवादी पार्टी जिम्मेदार है यह बात ज़रा कड़वी है दर हकीकत सच्ची है,बदायूं में आज जो भी पिछड़ापन नजर आता है उसमें समाजवादी पार्टी के
पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी एक बार कांग्रेस आई से और फिर चार बार समाजवादी पार्टी से सांसद बने उसके बाद यहां से सपा मुखिया के भाई धर्मेंद्र यादव दो बार लोक सभा में चुनाव जीतकर पहुंचे इस तरह इस लोक सभा सीट पर
तीस वर्ष तक एक क्षत्र राज करने वाली पार्टी यहां का विकास नहीं कर पाई ,देश को आजाद हुए लगभग पिचहत्तर वर्ष बीत चुके हैं जिसमें बदायूं सीट पर पूरे तीस वर्ष तक समजवादी पार्टी ने राज किया, मगर आज तक वोह ही पिछड़ापन
अपने आप में बना हुआ है यहां न ही कोई खेल कूद के लिए स्टेडियम हैं और न ही कोई बड़ा उद्योग लगा सके जिस से यहां की जनता को रोजगार मिल सकता
,और यहां विद्युत व्यवस्था को देख लीजिए पूरे जनपद में चरमराई हुई है
,अब आगे चलते हैं तो शिक्षा के नाम पर यहां कोई भी ऐसा विश्व विद्यालय नहीं खोला गया जिस से तमाम तरह के कोर्सों की पढ़ाई मौजूद होती,
लेकिन यहां के बच्चों को अन्य किसी न किसी प्रदेश में जाकर अपनी उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए जाना पड़ता है, यहां रेलवे की व्यवस्था की तरफ देखा जाए तो आज तक लंबी दूरी के लिए रेल गाड़ियों का संचालन नहीं हो पाया देश की
राजधानी को जोड़ने के नाम पर एक भी रेल गाड़ी यहां से नहीं चलाई जा सकी ,
और न ही जनपद की किसी अन्य तहसील को रेलवे लाइन से जोड़ा गया,
वहीं स्वास्थ्य की चर्चा की जाए तो वो भी बहुत ही ज्यादा दयनीय है और तो और मिनी मुख्यमंत्री ने यहां मात्र एक मेडिकल कॉलेज दिया मगर वोह भी सफेद हाथी साबित हो रहा है,
गंभीर बीमारियों का यहां इलाज पहले की ही तरह न मुमकिन है अब बदायूं जनपद की विधान सभाओं की ओर का रुख करते हैं तो दातागंज,सहसवान,बिल्सी, बिसौली,में स्वास्थ्य विभाग का बुरा हाल हैं
इन विधान सभाओं में प्राथमिकी उपचार के अलावा किसी भी रोग का इलाज न मुमकिन है,
समाजवादी पार्टी से पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी ने पच्चीस साल राज किया केंद्र सरकार में केंद्रीयमंत्री भी बनाए गए उसके बाद भी बदायूं आज भी अपने पिछड़े पन के लिए मशहूर है
उन्होंने बदायूं जनपद में विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ अपनी शुगर फैक्ट्री तक ही सीमित रखा विकास जनपद में कहीं नहीं जाने दिया उसके बाद सपा मुखिया के भाई मिनी मुख्यमंत्री के रूप में देखे जाने वाले मुख्यमंत्री अखिलेश यादव
के भाई धर्मेंद्र यादव ने लगातार दस वर्ष राज किया मगर विकास के नाम पर मात्र सिर्फ मेडिकल कॉलेज के अलावा और कुछ नहीं दे पाए ।
धर्मेंद्र यादव के बारे में कहा जाता है कि वो इलाहबाद में रह कर अपनी पढ़ाई करने में जुटे हुए थे. लेकिन 13 अक्तूबर 2002 को उनके ताऊ रतन सिंह यादव के बेटे रणवीर सिंह यादव की अचानक मौत हो गई.
जिसके बाद मुलायम सिंह यादव ने धर्मेंद्र यादव को सैफई वापस बुला लिया. चूंकि रणवीर सिंह यादव निधन के समय सैफई के ब्लॉक प्रमुख थे, ऐसे में ब्लॉक की व्यवस्था देखने के लिए धर्मेद्र को बुलाया गया.
धर्मेंद्र यादव पहले मैनपुरी और बदायूं से सांसद रह चुके हैं और अब उन्हें आजमगढ़ संसदीय उप चुनाव मे उतारा गया है.
धर्मेंद्र यादव ने 2017 में शिवपाल यादव बनाम अखिलेश यादव के मतभेद में भी अहम भूमिका निभाई थी और बताया जाता है कि उन्होंने कई नेताओं को अखिलेश यादव के पाले में रखा था.
धर्मेंद्र यादव, मुलायम सिंह यादव के भाई अभय राम यादव के बेटे हैं.
धर्मेंद्र यादव का जन्म 3 फरवरी 1979 को हुआ था और उन्होंने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से राजनीतिशास्त्र से पीजी और एलएलबी की पढ़ाई की है. धर्मेंद्र यादव छात्र राजनीति के दिनों से ही सक्रिय हो गए थे.
साल 2004 मे धर्मेंद्र यादव ने मैनपुरी संसदीय सीट से चुनाव लड़ कर अपनी जीत दर्ज की.
जबकि इस वक्त प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार थी लेकिन 2007 में समाजवादी पार्टी को सत्ता से बाहर होना पड़ा और बहुजन समाज पार्टी सत्ता में आ गई.
इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी से चुनाव लड़ा और धर्मेंद्र यादव को बदायूं भेजा गया. मैनपुरी से बदायूं गए धर्मेंद्र यादव ने 2009 और 2014 में यहां से भी जीत दर्ज की लेकिन,
साल 2019 में यहां से बीजेपी ने स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी डॉ. संघमित्र मौर्य को चुनावी मैदान में उतारा था और धर्मेंद्र यादव को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था
चुनाव हारने के बाद से अब तक धर्मेंद्र यादव का जिले में काफी विरोध हो गया था जिसको लेकर धर्मेंद्र यादव किसी रास्ते की तलाश में थे,
बताया जाता है कि धर्मेंद्र यादव 2019 में हार के बाद विधानसभा चुनाव की तैयारी में भी जुटे हुए थे, लेकिन उन्हें टिकट ही नहीं दिया गया.उधर ब्लॉक प्रमुख पद से अपने कॅरियर की शुरुआत करने वाले धर्मेंद्रयादव ने 2004 में मैनपुरी में हुए
उपचुनाव में जीत दर्ज की. धर्मेंद्र यादव ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में एमए. के साथ ही एलएलबी भी.की थी 25 साल की उम्र के सबसे कम उम्र के सांसद बने.
15 वीं लोकसभा के लिए बदायूं से चुनाव लड़ा और माफिया डॉन डीपी यादव को हराया. मोदी लहर के
दौरान रिकॉर्ड जीत के साथ अलग पहचान बनाई.जबकि धर्मेंद्र यादव
कई महत्वपूर्ण संसदीय समितियों अध्यक्ष और कई अन्य समितियों के सदस्य भी रह चुके हैं.
2005 से 2007 तक यूपी को ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन रहे.
2012 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिन्दी में भाषण देकर चर्चा में आए.
सपा के स्टार प्रचारक के तौर पर जाने जाते हैं इसी लिए इनको विकास पुरुष कहा जाता था मगर बदायूं में विकास के नाम पर सिर्फ और सिर्फ यहां की भोली भाली जनता से वोट लेकर लूटने का ही काम किया .और 2019 में भाजपा की
लहर के आगे विकास पुरुष के नाम से जाने जाने वाले धर्मेंद्र यादव भाजपा की डॉक्टर संघमित्रा मौर्य से बुरी तरह हार गए,इतना सब कुछ होने के बाबजूद बदायूं के पिछड़ेपन को दूर नहीं कर पाए
उन्होंने अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने के सिबा और कुछ नहीं किया बदायूं जनपद आज भी अपने पिछड़ेपन के लिए मशहूर है ।

