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नई दिल्ली,। राजधानी में 42 और वाणिज्यिक अदालतों की स्थापना की मांग पर उच्च न्यायालय ने सोमवार को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा है। न्यायालय ने इसके साथ ही अदालतों के गठन के लिए बुनियादी ढांचे, न्यायिक अधिकारियों और अदालत कक्षों की उपलब्धता के संबंध में स्थिति रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने मामले में सरकार के अलावा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल से भी जवाब मांग है।

मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को होगी। पीठ ने अधिवक्ता अमित साहनी की ओर से दाखिल जनहित याचिका पर यह आदेश दिया है। उन्होंने याचिका में दिल्ली सरकार द्वारा 13 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित 42 और वाणिज्यिक न्यायालयों की स्थापना के लिए आदेश देने की मांग की है

ताकि व्यापक जनहित में लंबित वाणिज्यिक मामलों का त्वरित निपटारा हो सके। उन्होंने पीठ को बताया कि कानूनी प्रणाली की दक्षता और वाणिज्यिक विवादों को हल करने में लगने वाला समय निवेश की वृद्धि और देश के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास को तय करने में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कारक है।

साहनी ने पीठ को बताया कि ‘न्याय देने में हुई देरी को लेकर समय-समय पर उच्च न्यायालयों और सर्वोच्च न्यायालय ने संज्ञान में लिया है और देश की विभिन्न अदालतों में लंबे समय से रिक्तियों की भर्ती के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।

साहनी की ओेर से दाखिल याचिका में कहा गया है कि फिलहाल दिल्ली में कुल 22 वाणिज्यिक अदालतें काम कर रही हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने 42 और वाणिज्यिक अदालतों के गठन को 22 मार्च 2021 को मंजूरी दी थी, जो 13 अप्रैल, 2021 को अधिसूचित की गई। याचिका में कहा गया है कि करीब साल भर बाद भी इस दिशा में समुचित कदम नहीं उठाया गया। याचिका के अनुसार दिल्ली के 22 वाणिज्यिक अदालतों में 26959 मामले लंबित हैं।