चेन्नई, 03 सितंबर ( तमिलनाडु के कुड्डालोर जिले के एक गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
(पीएचसी) में महिला ने मृत बच्चे को जन्म दिया। आरोप है कि इस दौरान पीएचसी में कोई भी
डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं था। स्वास्थ्य विभाग इस मामले में जांच कर रहा है।
एक 34 वर्षीय व्यक्ति अरोकियाजयराज सी ने दावा किया कि 31 अगस्त को सुबह 4 बजे जब
उनकी पत्नी को पीएचसी में भर्ती कराया गया तो नर्सें एक डॉक्टर से फोन पर निर्देश ले रही थीं।
उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी को सुबह करीब 8 बजे प्रसव पीड़ा हुई और दोनों नर्सों ने उन्हें लेबर
रूम में शिफ्ट कर दिया।
स्टाफ के दो सहयोगियों की मदद से नर्सों ने उसकी पत्नी की डिलिवरी कराई।
उन्होंने कहा कि उसी दिन सुबह 11.15 बजे, उन्होंने देखा कि बच्चा सांस नहीं ले रहा था। जिसके
बाद उन्होंने पीएचसी के आउट पेशेंट विभाग में एक डॉक्टर की सेवाओं का अनुरोध किया।
डॉक्टर ने जब नवजात को देखा, तो उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने कहा कि बच्चा मृत पैदा
हुआ था।
हालांकि, कुड्डालोर जिले के स्वास्थ्य सेवाओं के संयुक्त निदेशक डॉ. रमेश बाबू ने बताया कि बच्चों
के मृत पैदा होने के कई कारण हैं और यह बेहतर सुविधाओं वाले बड़े अस्पतालों में भी होता है।
उन्होंने आरोपों से इनकार किया और कहा कि जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा की गई प्रारंभिक जांच में
कोई विसंगति नहीं मिली है।
संयुक्त निदेशक डॉ. रमेश बाबू ने बताया, यह 30 बिस्तरों वाला एक अपग्रेड पीएचसी है। यहां
चौबीसों घंटे डॉक्टर उपलब्ध रहते है और प्रशिक्षित नर्सें मरीजों की देखभाल करती हैं। प्रारंभिक
पूछताछ में पीएचसी की ओर से कोई लापरवाही सामने नहीं आई है। हालांकि, डॉक्टरों की एक विशेष
टीम के साथ सोमवार को विस्तृत जांच की जाएगी।

