Tejashwi यादव का बड़ा वादा: बिहार की हर परिवार को सरकारी नौकरी
इसका क्या मतलब है और क्या असर पड़ेगा?
बिहार की राजनीति में एक नई हलचल पैदा हो गई है। 15 अक्टूबर 2023, पटना में एक रैली के दौरान राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के युवा नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा ऐलान किया:
“अगर हमारी सरकार बनी, तो बिहार के हर परिवार को एक सरकारी नौकरी दी जाएगी।”
इस वादे ने युवाओं के दिलों में नई उम्मीद जगा दी है—खासकर उस राज्य में जहां बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है और लाखों नौजवान रोज़गार के लिए दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों की ओर पलायन करते हैं।
इस लेख में हम तेजस्वी यादव के इस वादे का पूरा विश्लेषण करेंगे—इसका उद्देश्य क्या है, कितना व्यावहारिक है, और इसका सामाजिक-आर्थिक असर क्या हो सकता है।
Tejashwi यादव का वादा क्या है?
Tejashwi यादव ने घोषणा की है कि हर परिवार को कम से कम एक सरकारी नौकरी मिलेगी। इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस जैसे प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया जाएगा। यह वादा राज्य की सभी 38 जिलों के 3 करोड़ से अधिक परिवारों को लक्षित करता है।
वादे की मुख्य बातें:
हर परिवार को एक स्थायी सरकारी नौकरी
पहले वर्ष में लागू करने का दावा
नौकरी में पेंशन, सुरक्षा और सम्मान जैसे लाभ
विशेष ध्यान बेरोजगार, गरीब और पिछड़े वर्गों पर
वादे की पृष्ठभूमि
Tejashwi यादव, लालू प्रसाद यादव के बेटे हैं, और 2020 के चुनाव में उन्होंने 10 लाख नौकरी का वादा करके काफी समर्थन बटोरा था।
अब, 2025 की ओर बढ़ते हुए, उन्होंने उस वादे को और बड़ा रूप दे दिया है। बिहार की सामाजिक न्याय और आरक्षण की राजनीति के संदर्भ में यह एक बड़ा चुनावी कार्ड है।
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इस वादे की प्रासंगिकता: बिहार की बेरोजगारी की सच्चाई
आंकड़ों में बेरोजगारी:
बिहार में बेरोजगारी दर: 7.6% (राष्ट्रीय औसत: 3.2%)
15–29 आयु वर्ग में बेरोजगारी: 23%
हर साल 40 लाख युवा जॉब मार्केट में आ रहे हैं
लाखों स्नातक चाय की दुकान चला रहे हैं या पलायन कर रहे हैं
सरकारी नौकरियों की भूमिका:
स्थिर वेतन और सामाजिक सुरक्षा
ग्रामीण इलाकों में गरीबी घटाने में असरदार
शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन को मजबूत बनाती है
सामाजिक सम्मान और आगे बढ़ने का मौका देती है
इस वादे का आर्थिक प्रभाव
अगर यह योजना सफल होती है तो:
बिहार की जीडीपी में 2–3% तक सालाना वृद्धि संभव
खपत बढ़ेगी, जिससे बाजार में रौनक आएगी
गांवों में स्थानीय विकास होगा—सड़कें, स्कूल, सेवाएं बढ़ेंगी
लेकिन इसके लिए संतुलित खर्च और फंडिंग की योजना जरूरी होगी
इस वादे को लागू कैसे किया जाए?
बजट और संसाधन:
बिहार का सालाना बजट: ₹2.5 लाख करोड़
यदि 20% बजट नौकरी योजनाओं को दिया जाए, तो शुरुआत हो सकती है
केंद्र सरकार की सहायता या टैक्स सुधार से अतिरिक्त फंड मिल सकता है
युवाओं के लिए स्किल डेवेलपमेंट:
IT, नर्सिंग, प्लंबिंग जैसे वोकेशनल कोर्स
कुशल युवा कार्यक्रम और स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना जैसी मौजूदा स्कीम का विस्तार
ऑनलाइन ट्रेनिंग (Coursera, YouTube, आदि) को बढ़ावा
पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया:
BPSC जैसी परीक्षाओं के माध्यम से मेरिट पर नियुक्ति
डिजिटल एप्स और वेबसाइट से आवेदन की सुविधा
नियमित ऑडिट और सोशल मीडिया ट्रैकिंग से भ्रष्टाचार पर अंकुश
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों की राय
आर्थिक विशेषज्ञों का मत:
डॉ. शैबाल गुप्ता (CSDS, पटना): “राज्य की आर्थिक स्थिति अभी तंग है, लेकिन सोच सकारात्मक है”
मिहिर शाह (नीति विशेषज्ञ): “लक्ष्य आधारित योजनाएं सफल हो सकती हैं, जैसे मनरेगा हुआ था”
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं:
BJP: “यह खोखला चुनावी जुमला है”
JDU: “हमने पहले ही 10 लाख नौकरी की योजना शुरू की है”
विपक्ष इसे युवाओं को लुभाने का प्रयास बता रहा है, लेकिन युवाओं में यह वादा चर्चा का विषय है
अन्य राज्यों से सबक
केरल: 15% से अधिक श्रमिक सरकारी नौकरियों में, बेरोजगारी दर केवल 5%
तमिलनाडु: स्किल हब्स ने निजी और सरकारी दोनों सेक्टरों में रोजगार दिलाया
बिहार इन मॉडलों से सीख लेकर लोकल + डिजिटल + सरकारी मॉडल अपना सकता है।
युवाओं के लिए अवसर और चुनौतियाँ
अवसर:
सरकारी नौकरी का वादा, स्थिरता और सम्मान लाता है
पलायन रोकने में मदद
गांव के युवाओं को भी बड़ा मौका
चुनौतियाँ:
भर्ती में देरी या राजनीति का हस्तक्षेप
पात्रता (शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा) का संकट
ज्यादा प्रतिस्पर्धा: एक पद के लिए 10+ आवेदक संभव
तैयारी कैसे करें?
रोज़ 2–3 घंटे पढ़ाई करें
Arihant या Lucent जैसी किताबें उपयोगी
Mock Tests और Telegram ग्रुप्स से अपडेट रहें
Local ITI या ऑनलाइन कोर्स से स्किल्स बढ़ाएं
Tejashwi यादव का “हर परिवार को सरकारी नौकरी” का वादा बिहार की राजनीति में बड़ी हलचल पैदा कर रहा है। यह न सिर्फ रोजगार का समाधान पेश करता है, बल्कि आर्थिक और सामाजिक बदलाव का रास्ता खोलता है।
मुख्य बातें:
यह वादा युवा शक्ति को केंद्र में लाता है
स्थायी सरकारी नौकरी गरीबी और पलायन रोक सकती है
असली सफलता क्रियान्वयन और पारदर्शिता पर निर्भर करती है
आपकी भूमिका:
स्किल्स पर काम करें
चुनाव पर नजर रखें
जानकारी साझा करें और जागरूक रहें
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