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बिजनौर,  जुएं और सट्टे का कारोबार दिन पर दिन कुकर मुक्तो की तरीके से गली मोहल्लों
में फैलता जा रहा है

प्रशासन ऐसे कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही करने को तैयार नहीं है जिधर देखो
सट्टेबाज और जुआरी की गली मोहल्लों में दिखाई देते हैं जिस तरह से सरकार इन लोगों को बढ़ावा दे रही है

उससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि आने वाले समय में लोग इनसे अपना पूर्ण व्यवसाय अपनी जीविका चलाएंगे
इतना ही नहीं लोग जिस तरह से इस अवैध कारोबार में लगे हैं

उससे घरों में आए दिन झगड़े होते हैं और जिसका
परिणाम या तो पत्नी भूखी मर जाती है

या पति पत्नी के झगड़े में कोई ना कोई एक आत्महत्या जैसा घिनौना
अपराध कर बैठता है

ऐसे कारोबारियों जोकि इस कारोबार को चला रहे हैं उन पर यदि अंकुश लगाया जाए तो लोग
बाग़ अपने घरों में अपना जीवन खुशाली से व्यतीत कर सकते हैं किंतु जो लोग सुबह से लेकर शाम तक मजदूरी
करते हैं

और शाम को धन दुखने के लालच में सट्टा लगाते हैं और हार जाने पर वह अपने घर में पत्नी और
बच्चों के साथ झगड़ा करते हैं कई ऐसे घर हैं जो सट्टे की लता के चलते बर्बाद हो चुके हैं

पुलिस प्रशासन दोनों ही
इसको अंकुश लगाने में असमर्थ नजर आते हैं पुलिस सटोरियों से मोटी रकम वसूल रही है और सटोरियों को बढ़ावा
दे रही है