Tihar जेल में आत्मसमर्पण से पहले राजपाल यादव की दर्दभरी गुहार:
“सर क्या करूँ? मेरे पास पैसे नहीं हैं…”
बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया में राजपाल यादव उन चेहरों में शामिल हैं, जिनकी कॉमिक टाइमिंग और अनोखे किरदारों ने करोड़ों लोगों को हँसाया है। लेकिन अब वही चेहरा एक बेहद अलग और दुखद वजह से सुर्खियों में है। अदालत में खड़े होकर राजपाल यादव के मुँह से निकले शब्द—
“सर क्या करूँ? मेरे पास पैसे नहीं हैं…”
सीधे दिल को छू गए। यह गुहार उन्होंने Tihar जेल में आत्मसमर्पण से ठीक पहले लगाई।
जो अभिनेता दर्शकों को हँसी का तोहफा देता रहा, आज खुद एक गहरे आर्थिक और कानूनी संकट में फँसा नजर आया। उनके प्रशंसक हैरान हैं—आख़िर एक मशहूर अभिनेता इस हालत तक कैसे पहुँच गया?
Tihar जेल तक पहुँचा कानूनी संघर्ष
राजपाल यादव का Tihar जेल तक का सफर एक साधारण से कर्ज से शुरू हुआ था, जो समय के साथ एक गंभीर कानूनी लड़ाई में बदल गया। वर्षों तक मामला अदालत में चलता रहा और अंततः न्यायालय को सख्त कदम उठाना पड़ा—या तो भुगतान करें या जेल जाएँ। यह आत्मसमर्पण उस लंबे संघर्ष का परिणाम है।
चेक बाउंस केस की पूरी कहानी
साल 2007 में राजपाल यादव ने एक बिजनेसमैन नरेश जैन से करीब 5 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। यह रकम एक फिल्म प्रोजेक्ट के लिए थी, जो कभी पूरी ही नहीं हो सकी। भुगतान के लिए राजपाल ने चेक दिए, लेकिन वे चेक बाउंस हो गए।
इसके बाद नरेश जैन ने नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कराया। यह कानून चेक बाउंस को गंभीर अपराध मानता है। मामला करीब एक दशक से ज्यादा चला। राजपाल ने दलील दी कि पैसा एक असफल प्रोजेक्ट में चला गया, लेकिन अदालत ने इसे साफ तौर पर भुगतान में चूक माना।
साल 2023 में दिल्ली की अदालत ने उन्हें दोषी ठहराते हुए दो महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई।

अदालत का आदेश और अंतिम समयसीमा
2023 के अंत में अदालत ने साफ निर्देश दिया कि राजपाल यादव को 1.25 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर चुकाने होंगे। अगर तय समय तक रकम नहीं दी गई, तो तिहाड़ जेल जाना होगा।
राजपाल ने समय बढ़ाने की गुहार लगाई, अपील भी की, लेकिन हर बार अदालत ने इनकार कर दिया।
फरवरी 2026 में अंतिम तारीख आ गई। 10 फरवरी को वे थके और परेशान चेहरे के साथ अदालत पहुँचे, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। उसी दिन उन्हें तिहाड़ जेल में आत्मसमर्पण करना पड़ा।
“मेरे पास पैसे नहीं हैं…” — एक सितारे की बेबसी
राजपाल यादव का यह बयान—
“सर क्या करूँ? मेरे पास पैसे नहीं हैं…”
एक सेलिब्रिटी के लिए सार्वजनिक रूप से कहना बेहद पीड़ादायक होता है। यह वाक्य ग्लैमर की दुनिया के पीछे छिपी सच्चाई को सामने लाता है।
लोग अक्सर मान लेते हैं कि फिल्मी सितारे हमेशा पैसों में डूबे रहते हैं, लेकिन हकीकत इससे काफी अलग होती है। राजपाल का यह पल उनकी निजी मजबूरी को राष्ट्रीय चर्चा बना गया।
सार्वजनिक छवि बनाम निजी सच्चाई
हंगामा, चुप चुप के, भागम भाग जैसी फिल्मों में हँसी बिखेरने वाले राजपाल यादव को देखकर कोई नहीं सोच सकता था कि वे आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
2023 में ड्रीम गर्ल 2 जैसी फिल्मों में उनकी मौजूदगी से लगा कि सब ठीक है, लेकिन अदालत में दिए गए बयान ने एक अलग तस्वीर पेश कर दी।
कॉमेडी कलाकारों के लिए काम लगातार नहीं मिलता। एक लंबा ब्रेक पूरे आर्थिक संतुलन को बिगाड़ सकता है। समाज की उम्मीदें और निजी हकीकत—इन दोनों के बीच का फर्क राजपाल यादव के मामले में साफ दिखा।

मुआवजा न चुका पाने के कानूनी परिणाम
राजपाल यादव का यह स्वीकार करना कि उनके पास पैसे नहीं हैं, कानूनी रूप से उनके खिलाफ चला गया। चूंकि मुआवजा नहीं चुकाया गया, इसलिए जेल की सजा टालना संभव नहीं रहा।
अदालत ने किसी तरह की आंशिक भुगतान या समझौते की अनुमति नहीं दी। यह बयान उनके लिए अंतिम झटका साबित हुआ और मामला सीधे तिहाड़ जेल तक पहुँच गया।
Tihar जेल: आत्मसमर्पण के बाद की हकीकत
Tihar जेल भारत का सबसे बड़ा जेल परिसर है। यहाँ हर कैदी के लिए नियम समान होते हैं, चाहे वह आम इंसान हो या बड़ा सितारा।
राजपाल यादव को जेल में प्रवेश से पहले मेडिकल जांच, कागजी प्रक्रिया और सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा। उन्हें सामान्य वार्ड में रखा गया है। सुविधाएँ बेहद सीमित हैं—साधारण भोजन, साझा बैरक और सीमित मुलाकातें।
आत्मसमर्पण के बाद कानूनी विकल्प
जेल में प्रवेश के बाद भी उनके वकील जमानत या सजा में राहत के लिए प्रयास कर सकते हैं। अगर मुआवजे की रकम किसी तरह चुकाई जाती है, तो रिहाई की संभावना बन सकती है।
हालांकि कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार चेक बाउंस मामलों में राहत पाना आसान नहीं होता।
बॉलीवुड के लिए एक चेतावनी
राजपाल यादव का मामला सिर्फ एक अभिनेता की कहानी नहीं है। यह पूरे फिल्म उद्योग के लिए चेतावनी है।
किरदार अभिनेता अक्सर अनियमित आय, महंगे खर्च और जोखिम भरे निवेश में फँस जाते हैं।
2024 में फिल्म कर्मचारी संघ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 30% मिड-लेवल कलाकार हर साल आर्थिक तंगी का सामना करते हैं।

सीख: कर्ज और अनुबंध को हल्के में न लें
हर लेन-देन लिखित में रखें
बिना बैकअप प्लान के बड़ा कर्ज न लें
कम से कम 6 महीने का इमरजेंसी फंड रखें
वित्तीय सलाहकार से समय पर सलाह लें
राजपाल यादव का अनुभव बताता है कि एक छोटी सी चूक सालों तक पीछा कर सकती है।
एक कठिन दौर की कहानी
राजपाल यादव की Tihar जेल से पहले की गुहार एक दर्दनाक सच बयां करती है।
हँसी का बादशाह आज कानूनी और आर्थिक संकट से गुजर रहा है।
चेक बाउंस केस, अदालत की सख्ती और जेल—यह पूरा घटनाक्रम बॉलीवुड के उस पहलू को दिखाता है, जिस पर कम बात होती है।
अब सवाल यह है—क्या राजपाल यादव इस मुश्किल दौर से उबर पाएँगे?
फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की कहानियाँ नई नहीं हैं।
आप क्या सोचते हैं?
क्या राजपाल यादव फिर से दर्शकों को हँसाते नजर आएँगे?
अपनी राय जरूर साझा करें।
BJP अध्यक्ष नितिन नबीन का उनके गृह नगर पटना में जोरदार स्वागत हुआ।
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