Trump और नरेंद्र मोदी के बीच
डोनाल्डTrump और नरेंद्र मोदी के बीच हालिया व्यापारिक बयानबाज़ी ने भारत-अमेरिका संबंधों में एक नया मोड़ ला दिया है। आइए इस घटनाक्रम को विस्तार से समझते हैं।
Trump का भारत पर नया बयान: क्या कहा?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump ने भारत पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बाद एक अहम बयान दिया। उन्होंने कहा:
- Trump“प्रधानमंत्री मोदी मेरे मित्र हैं, लेकिन व्यापार के लिहाज से वे हमारे साथ बहुत ज्यादा व्यापार नहीं करते, क्योंकि टैरिफ बहुत ज़्यादा है।”
- Trump ने भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा टैरिफ लगाने वाला देश बताया।
- Trump यह भी कहा कि भारत रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदता है, जिससे यूक्रेन युद्ध को समर्थन मिलता है। इसी कारण अमेरिका भारत पर अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने जा रहा है।
🇮🇳 पीएम मोदी का करारा जवाब
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Trump के टैरिफ फैसले पर दो टूक जवाब दिया:
- “भारत कभी अपने किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से समझौता नहीं करेगा।”
- उन्होंने कहा कि वे व्यक्तिगत और राजनीतिक कीमत चुकाने को तैयार हैं, लेकिन देश के हितों से पीछे नहीं हटेंगे।
- मोदी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत की ऊर्जा नीति उसकी जरूरतों और सुरक्षा पर आधारित है, और रूस से तेल खरीदना इसी का हिस्सा है
टैरिफ विवाद की पृष्ठभूमि-Trump
| विषय | विवरण |
|---|---|
| टैरिफ की घोषणा | अमेरिका ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगा दिया है (25% पहले से + 25% नया) |
| कारण | भारत द्वारा रूस से तेल और सैन्य उपकरण खरीदना |
| अमेरिका का तर्क | रूस-यूक्रेन युद्ध में भारत की भूमिका पर सवाल |
| भारत का जवाब | ऊर्जा सुरक्षा और किसानों के हित सर्वोपरि |
भारत की रणनीति और प्रतिक्रिया-Trump
- वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि भारत और अमेरिका निष्पक्ष व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं।
- विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी फैसले को “अनुचित, भेदभावपूर्ण और अव्यावहारिक” बताया।
- भारत ने यह भी कहा कि कई अन्य देश भी रूस से तेल खरीद रहे हैं, लेकिन अमेरिका ने सिर्फ भारत को निशाना बनाया
वैश्विक प्रभाव और आगे की राह-Trump
विशेषज्ञों के अनुसार:
- यह टैरिफ विवाद भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों को प्रभावित कर सकता है।
- भारत का रुख यह दर्शाता है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव में नहीं झुकेगा।
- अमेरिका भारत को चीन के खिलाफ एक रणनीतिक साझेदार मानता है, ऐसे में यह तनाव दीर्घकालिक साझेदारी को चुनौती दे सकता है।
यह बयानबाज़ी केवल व्यापारिक नहीं, बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक भी है। Trump का बयान जहां अमेरिका की आंतरिक राजनीति और वैश्विक दबावों को दर्शाता है, वहीं मोदी का जवाब भारत की आत्मनिर्भरता और नीति की दृढ़ता को उजागर करता है।
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