अतीक अहमद-अशरफ हत्याकांड
अतीक अहमद-अशरफ हत्याकांड की तफ्तीश कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) को पता लगा है कि माफिया भाइयों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाने वाले तीनों शूटरों के साथ दो मददगार भी मौके पर ही मौजूद थे। यह लोग शूटरों को न सिर्फ गाइड कर रहे थे, बल्कि जरूरी दिशा-निर्देश भी दे रहे थे। इनमें से एक मददगार स्थानीय (प्रयागराज का) है। उसी ने शूटरों के रहने-खाने का बंदोबस्त करने से लेकर अतीक-अशरफ की रेकी तक कराई थी।
एनसीआर न्यूज पोर्टल के पत्रकार बनकर आए तीनों शूटरों ने अतीक-अशरफ को पुलिस कस्टडी में जिस तरह ढेर किया, उसे देखते हुए स्पष्ट अंदेशा था कि बांदा, हमीरपुर और कासंगज के तीन शूटर इस खौफनाक वारदात को अकेले अंजाम नहीं दे सकते। शूटरों के बीच न पुरानी दोस्ती थी, न ही प्रयागराज से सबका कोई पुराना कनेक्शन। इनसे कोई मोबाइल फोन नहीं मिलना भी शक का बड़ा कारण था।
बिना फोन इन्हें अतीक-अशरफ की सटीक सूचना कैसे मिली। कैसे मालूम चला कि धूमनगंज थाने से 15 अप्रैल की रात 10:37 बजे अतीक-अशरफ को मेडिकल चेकअप के लिए कॉल्विन हॉस्पिटल लाया जा रहा है। इनसे कोई रकम भी नहीं मिली, जिससे मोटी रकम के लिए कत्ल का संकेत मिलता। तुर्किये की जो दो पिस्टल बरामद हुईं, उनकी कुल कीमत 15 लाख है, जबकि शूटरों की हैसियत 10 हजार रुपये खर्च करने लायक नहीं। ये तथ्य घटनास्थल पर मददगारों की मौजूदगी को पुख्ता कर रहे थे।

