लखनऊ–वाराणसी हाईवे पर भीषण हादसा: अमेठी में मल्टी-व्हीकल टक्कर, 2 की मौत, 16 घायल-UP
UP के अमेठी ज़िले में लखनऊ–वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-31) पर एक व्यस्त सुबह अचानक मातम में बदल गई। एक भीषण मल्टी-व्हीकल सड़क हादसे में दो लोगों की मौके पर मौत हो गई, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। दुर्घटना की तस्वीरों में चारों तरफ़ टूटी गाड़ियाँ, बिखरा कांच और मुड़ा हुआ लोहे का मलबा दिखाई दिया।
लखनऊ–वाराणसी हाईवे प्रदेश की सबसे अहम सड़कों में से एक है, जिस पर रोज़ाना हज़ारों वाहन चलते हैं—यात्री बसें, ट्रक, व्यापारी और कामकाजी लोग। इस मार्ग पर हुआ कोई भी हादसा सिर्फ़ कुछ लोगों को नहीं, बल्कि पूरे यातायात तंत्र को प्रभावित करता है। यह दुर्घटना एक बार फिर सड़क सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रारंभिक रिपोर्ट और हताहतों का विवरण
हादसा कैसे हुआ?
पुलिस के अनुसार, यह दुर्घटना सुबह करीब 7 बजे, दिसंबर की घनी कोहरे वाली सुबह में हुई। तेज़ रफ्तार एक ट्रक ने पहले एक बस को टक्कर मारी, जिसके बाद पीछे से आ रहे वाहन भी एक-एक कर टकराते चले गए।
कम से कम 5 वाहन हादसे की चपेट में आए
बस में 40 से अधिक यात्री सवार थे, जो वाराणसी जा रहे थे
एक ट्रक लखनऊ से कृषि सामान लेकर आ रहा था
टक्कर इतनी ज़ोरदार थी कि दोनों लेन कई घंटों तक बंद रहीं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ब्रेक फेल हुए या तेज़ रफ्तार मुख्य कारण रही, लेकिन टक्कर का प्रभाव बेहद गंभीर था।
मृतक और घायलों की स्थिति
दो पुरुषों की मौके पर मौत
एक बस चालक
एक लगभग 40 वर्षीय यात्री
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16 घायल, जिन्हें अमेठी के गौरिगंज ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया
5 घायलों की हालत गंभीर, ICU में भर्ती
अन्य घायलों को फ्रैक्चर और चोटें आई हैं, स्थिति स्थिर बताई जा रही है
पुलिस, एंबुलेंस और स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। डॉक्टरों ने लगातार इलाज किया और आसपास के गांवों से रक्तदान भी शुरू हुआ, जिससे कई जानें बच सकीं।
हादसे की परिस्थितियाँ और संभावित कारण
किन वजहों से हुआ हादसा?
घना कोहरा, जिससे दृश्यता बेहद कम थी
शुरुआती जांच में तेज़ रफ्तार की आशंका
ट्रक चालक के थकान के कारण झपकी आने की संभावना
शराब सेवन की पुष्टि नहीं, जांच जारी
हादसे के बाद धुएँ और क्षतिग्रस्त इंजनों के बीच फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए कटर मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा। कई किलोमीटर तक ट्रैफिक जाम लग गया।
लखनऊ–वाराणसी हाईवे पर सुरक्षा की पुरानी समस्या
यह कोई पहला हादसा नहीं है।
पिछले साल इस मार्ग पर 50 से ज्यादा दुर्घटनाएँ
करीब 30 लोगों की मौत
कई जगह गड्ढे, तीखे मोड़ और गार्डरेल की कमी
भारी वाहनों के लिए पर्याप्त रेस्ट एरिया नहीं
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोहरा और बारिश के मौसम में यह सड़क और भी खतरनाक हो जाती है।
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जांच और जवाबदेही
पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई
स्थानीय थाने में FIR दर्ज
ट्रक चालक को हिरासत में लेकर पूछताछ
बस कंपनी के अधिकारी भी मौके पर पहुँचे
जिलाधिकारी राजेश कुमार ने हादसे को “टालने योग्य” बताते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने बताया कि वाहनों के डैश कैम फुटेज और ब्लड सैंपल की जांच की जा रही है।
सख्त नियम और ढांचे की मांग
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने स्पीड कैमरे लगाने की मांग की
सुरक्षा संगठनों ने रात में पेट्रोलिंग बढ़ाने की अपील की
राष्ट्रीय राजमार्गों की सुरक्षा समीक्षा के संकेत
एक स्थानीय याचिका पर पहले ही 500 से अधिक हस्ताक्षर हो चुके हैं।
भविष्य में हादसों से बचाव के उपाय
चालकों के लिए जरूरी सावधानियाँ
यदि आप इस मार्ग पर यात्रा करते हैं:
कोहरे में अधिक दूरी बनाए रखें
तय गति सीमा से नीचे चलें
हर 2 घंटे में ब्रेक लें
लो-विज़िबिलिटी में हेडलाइट्स का सही उपयोग करें
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यात्रा से पहले:
ब्रेक और टायर की जांच
पानी और फर्स्ट-एड किट साथ रखें
कोहरे की चेतावनी हो तो रात में यात्रा से बचें
बुनियादी ढांचे में सुधार की ज़रूरत
कोहरे में दिखने वाले रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड
मोड़ों और डिवाइडर पर बेहतर लाइटिंग
कस्बों के पास स्पीड कंट्रोल उपाय
ट्रक चालकों के लिए रेस्ट एरिया
स्पीड कैमरे और निगरानी सिस्टम
अन्य राज्यों में ऐसे उपायों से हादसों में 20% तक कमी आई है।
खोई जानों की याद और सुरक्षित सड़कों की मांग
अमेठी का यह हादसा दो परिवारों के लिए कभी न भरने वाला ज़ख्म है। 16 घायल शारीरिक और मानसिक चोटों से उबरने की कोशिश कर रहे हैं। समुदाय साथ खड़ा है, लेकिन दर्द गहरा है।
अब ज़रूरी है कि यह हादसा सिर्फ़ एक खबर बनकर न रह जाए।
प्रशासन को ठोस कदम उठाने होंगे
नियमों का सख्त पालन जरूरी है
और हर चालक की जिम्मेदारी है कि वह सतर्क रहे
सुरक्षित लखनऊ–वाराणसी हाईवे मतलब कम आंसू और ज़्यादा ज़िंदगियाँ।
इस कहानी को साझा करें, आवाज़ उठाएँ और सुरक्षित ड्राइविंग अपनाएँ।
आज सावधानी बरतें—ताकि कल किसी और की ज़िंदगी बच सके।

