अभूतपूर्व दृश्य: केनेस्सेट में ऐतिहासिक भाषण के बाद PM मोदी के साथ सेल्फ़ी की होड़
कल्पना कीजिए—एक विश्व नेता संसद के गंभीर माहौल से बाहर निकलता है और अचानक उत्साहित लोगों की भीड़ उसे घेर लेती है, सिर्फ एक सेल्फ़ी के लिए। ऐसा ही दृश्य देखने को मिला जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इज़राइल की संसद Knesset में ऐतिहासिक भाषण दिया।
औपचारिक माहौल के बाद उमड़ा यह उत्साह सभी के लिए चौंकाने वाला था। यह सिर्फ एक राजनयिक यात्रा नहीं थी, बल्कि दो देशों के बीच बढ़ती आत्मीयता का प्रतीक बन गई।
केनेस्सेट संबोधन का महत्व
रणनीतिक दृष्टि से अहम भाषण
अपने संबोधन में PM मोदी ने भारत और इज़राइल के बीच मजबूत संबंधों, तकनीकी सहयोग और लोकतांत्रिक मूल्यों की साझेदारी पर जोर दिया।
उन्होंने जल प्रबंधन, कृषि तकनीक और सुरक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया। इज़राइल जल संरक्षण और ड्रिप सिंचाई तकनीक में अग्रणी है, जो भारत की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
यह यात्रा 2017 में हुई थी और यह पहली बार था जब कोई भारतीय PM आधिकारिक रूप से इज़राइल गया। इससे पहले संबंध तो थे, लेकिन इतने खुले और सार्वजनिक रूप में नहीं।
परंपरा से अलग एक नई शुरुआत
PM मोदी की यात्रा ने पुराने कूटनीतिक ढांचे को बदल दिया। उन्होंने हिब्रू उद्धरणों का उल्लेख किया और इज़राइल की नवाचार क्षमता की सराहना की।
यह केवल सरकारी स्तर का संवाद नहीं था, बल्कि जनता से सीधा जुड़ाव था। यही कारण रहा कि भाषण के बाद माहौल भावनात्मक हो उठा।
‘सेल्फ़ी मोमेंट’ क्यों बना खास?
जनता से जुड़ाव की झलक
जब PM मोदी संसद भवन से बाहर आए, तो लोग अपने मोबाइल फोन लेकर आगे बढ़े। सुरक्षा घेरा कुछ क्षणों के लिए हल्का पड़ा और लोग उनके साथ तस्वीर लेने के लिए उत्सुक दिखे।
स्थानीय मीडिया ने इसे “रॉक-स्टार वेलकम” बताया। अंतरराष्ट्रीय चैनलों ने भी इस दृश्य को प्रमुखता से दिखाया। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से वायरल हुए।
यह दृश्य इस बात का संकेत था कि कूटनीति अब सिर्फ बंद कमरों की बातचीत नहीं रही—यह जनता के बीच भी जीवंत हो चुकी है।
डिजिटल डिप्लोमेसी का प्रभाव
आज के दौर में एक सेल्फ़ी सिर्फ तस्वीर नहीं होती, बल्कि इतिहास का हिस्सा बनने का एहसास देती है।
PM मोदी की सहज और मिलनसार शैली ने इस पल को और खास बना दिया। उन्होंने लोगों से हाथ मिलाया, मुस्कुराकर तस्वीरें खिंचवाईं और माहौल को आत्मीय बना दिया।
यह “डिजिटल डिप्लोमेसी” का उदाहरण है—जहां एक तस्वीर दो देशों के रिश्तों को और मजबूत बनाने का प्रतीक बन जाती है।
भारत-इज़राइल संबंधों पर दीर्घकालिक असर
सहयोग के प्रमुख क्षेत्र
जल प्रबंधन: ड्रिप सिंचाई और जल पुनर्चक्रण परियोजनाएं
कृषि तकनीक: उच्च उत्पादकता वाले बीज और संयुक्त अनुसंधान
रक्षा सहयोग: उन्नत तकनीक और खुफिया साझेदारी
व्यापार: द्विपक्षीय व्यापार में लगातार वृद्धि
इस यात्रा के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार और तकनीकी सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
भविष्य की दिशा
इस तरह के जन-उत्साहपूर्ण स्वागत से यह स्पष्ट संदेश जाता है कि दोनों देशों की जनता भी मजबूत संबंध चाहती है।
आने वाले समय में सांस्कृतिक आदान-प्रदान, छात्र विनिमय कार्यक्रम और संयुक्त नवाचार परियोजनाएं इस रिश्ते को और गहराई दे सकती हैं।
केनेस्सेट में भाषण के बाद PM मोदी के साथ सेल्फ़ी की यह अभूतपूर्व होड़ सिर्फ एक क्षणिक घटना नहीं थी। यह भारत और इज़राइल के बीच बढ़ती नजदीकियों का जीवंत प्रतीक थी।
इस घटना ने दिखाया कि जब कूटनीति में जन-भावनाएं जुड़ती हैं, तो रिश्ते और भी मजबूत बनते हैं। आने वाले वर्षों में यह दोस्ती किस दिशा में आगे बढ़ेगी, यह देखने योग्य होगा।

