Moradabad (उ.प्र.) के ब्लड बैंक अधिकारी की दुखद मौत: कड़े SIR टारगेट के दबाव से जुड़ा आत्महत्या का मामला
Moradabad में एक दर्दनाक घटना सामने आई है। उत्तर प्रदेश के एक ब्लड बैंक अधिकारी ने कथित रूप से आत्महत्या कर ली। मौके से मिली एक नोट में उन्होंने SIR (Specific Inventory Requirements) जैसे कड़े लक्ष्यों के भारी दबाव का ज़िक्र किया। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है और यह सवाल खड़े किए हैं कि जीवनरक्षक सेवाओं में काम करने वाले कर्मचारियों पर कितना तनाव होता है।
यह क्षति बहुत गहरी है। यह बताती है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने वाले लोगों को किस तरह के मानसिक और कार्य-भार संबंधी संकटों का सामना करना पड़ता है। ऐसे दुखद घटनाओं के पीछे के कारणों को गंभीरता से समझने की ज़रूरत है।
घटना का विवरण: शुरुआती जांच और घटनाक्रम
यह घटना Moradabad शहर में सामने आई। अधिकारी, जो स्थानीय स्तर पर रक्त संग्रह अभियानों में सक्रिय रहते थे, अपने घर में मृत पाए गए। पुलिस के अनुसार, यह घटना पिछले सप्ताह की है और नवंबर 2025 के शुरुआती दिनों में इसकी जानकारी सामने आई।
यह घटना फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कर्मियों की रोज़मर्रा की चुनौतियों पर रोशनी डालती है। परिवार और मित्र गहरे सदमे में हैं।
शव मिलने की जानकारी और पुलिस की कार्रवाई
शरीर को परिजनों ने घर में फंदे से लटका पाया।
शाम क़रीब 8 बजे पुलिस को फोन किया गया।
पुलिस तुरंत पहुँची और क्षेत्र को सील कर जांच शुरू की।
स्थानीय थाने ने आत्महत्या से संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया।
परिजनों और सहकर्मियों से पूछताछ की गई।
फिलहाल किसी तरह की साज़िश या बाहरी हस्तक्षेप के संकेत नहीं मिले।
लोगों के मन में सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है, लेकिन पुलिस की त्वरित कार्रवाई से स्थिति नियंत्रित रही।
कथित सुसाइड नोट की बातें
मौके से एक नोट मिला जिसमें SIR टारगेट पूरा करने के दबाव का ज़िक्र था।
उन्होंने लिखा कि—
लगातार फोन कॉल,
असंभव लक्ष्य,
और असफलता का भय
उनके मानसिक तनाव का कारण बने।
“असहनीय दबाव” जैसे शब्द नोट में मौजूद थे।
नोट ने साफ़ किया कि काम का बोझ उनकी क्षमता से कहीं ज्यादा हो गया था।
पुलिस ने पारदर्शिता बरतते हुए नोट की कुछ बातों को मीडिया से साझा किया। इससे सिस्टम पर उठ रहे सवाल और गंभीर हो गए हैं।

प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम और मौत के कारण की पुष्टि
अगले दिन स्थानीय अस्पताल में पोस्टमॉर्टम किया गया।
रिपोर्ट में मृत्यु का कारण फांसी लगाना बताया गया और किसी अन्य कारण को खारिज किया गया।
जांच अभी जारी है ताकि किसी भी और पहलू की पुष्टि की जा सके।
यह रिपोर्ट घटना के शुरुआती निष्कर्षों को मजबूत करती है।
परिवार अभी भी न्याय और स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है।
संकट की जड़: ब्लड बैंकिंग में SIR टारगेट को समझना
SIR टारगेट ब्लड बैंकों में अनिवार्य रक्त भंडार बनाए रखने के नियम हैं।
उद्देश्य—आपात स्थितियों में रक्त की कमी न हो।
लेकिन वास्तविकता में ये लक्ष्य कई बार कर्मचारियों के लिए बोझ बन जाते हैं।
SIR टारगेट क्या होते हैं और उनका संचालन कैसे होता है
हर ब्लड ग्रुप का न्यूनतम भंडार बनाए रखना अनिवार्य है—
जैसे O-negative की न्यूनतम मात्रा हमेशा उपलब्ध रहनी चाहिए।
AB-positive जैसे दुर्लभ ग्रुपों के लिए भी सख्त नियम लागू होते हैं।
अगर लक्ष्य कम हो जाएं तो
अधिकारियों पर तत्काल दबाव बढ़ जाता है।
यह व्यवस्था सुरक्षा के लिए बनाई गई थी, लेकिन यह अत्यधिक कठोर भी साबित हो रही है।

जमीनी सच्चाई और लक्ष्य के बीच दूरी
सैद्धांतिक रूप से SIR अच्छे हैं, लेकिन व्यवहार में—
मानसून व त्योहारों में दान कम हो जाता है
ग्रामीण इलाकों में परिवहन सुविधाएं कमजोर हैं
कई ब्लड बैंक कर्मचारियों की कमी से जूझते हैं
उपकरण पुराने और बजट सीमित है
जब 100 यूनिट का लक्ष्य हो और कैंप से सिर्फ़ 50 यूनिट ही मिलें—
निराशा और चिंता स्वाभाविक है।
पहले भी दबाव के मामले सामने आ चुके हैं
2022 की एक रिपोर्ट में UP ब्लड यूनिटों में उच्च तनाव और कर्मचारियों के पलायन का ज़िक्र था।
कुछ राज्यों जैसे तमिलनाडु में भी 2023 में ऐसे शिकायतें दर्ज हुई थीं।
यह घटनाएँ दिखाती हैं कि यह सिर्फ़ एक क्षेत्रीय समस्या नहीं है—
पूरे सिस्टम में सुधार की आवश्यकता है।
व्यवस्थित समीक्षा: सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में तनाव और जवाबदेही
स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत लोगों पर निरंतर मानसिक दबाव रहता है।
यह घटना बताती है कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कार्य-नीति सुधार अब बेहद महत्वपूर्ण हैं।
सरकारी कर्मचारियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य ढांचा कितना कमजोर है
परामर्श सेवाएं सीमित
EAP प्रोग्राम होते हुए भी कम उपयोग
तनाव पहचानने के लिए प्रशिक्षण की कमी
हेल्पलाइन स्टाफ की कमी
अगर एक सुरक्षित संवाद-स्थल या पीयर समूह होते—
शायद कर्मचारी समय रहते मदद पा लेते।

अत्यधिक लक्ष्य आधारित संस्कृति के दुष्परिणाम
कार्य प्रदर्शन को केवल नंबरों से आंका जाना—
मानव पक्ष की उपेक्षा कर देता है।
इससे “करो या मर जाओ” जैसी कार्य संस्कृति बन जाती है।
स्वास्थ्य प्रणाली तभी मजबूत होती है जब कर्मचारी स्वस्थ रहते हैं।
संख्याओं की दौड़ इंसानों को नहीं कुचलनी चाहिए।
विशेषज्ञों की टिप्पणी
डॉ. राजेश कुमार का कहना है—
“लक्ष्य लचीले होने चाहिए, कठोर नहीं। कठोर टारगेट कर्मचारियों की मानसिक स्थिति को नुकसान पहुंचाते हैं।”प्रिया सिंह, प्रशासन विशेषज्ञ—
“नेताओं को तनाव के संकेतों को पहचानने की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।”
इन सुझावों की अनदेखी अब और खतरनाक हो सकती है।
समुदाय, स्वास्थ्य विभाग और यूनियनों की प्रतिक्रिया
Moradabad में गहरा शोक फैल गया है।
सहकर्मी, परिवार, और आम नागरिक एकजुट होकर दुख ज़ाहिर कर रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग का बयान
UP स्वास्थ्य मंत्री ने शोक व्यक्त किया और जांच का आश्वासन दिया।
उन्होंने कहा कि SIR प्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी।
स्थानीय प्रशासन ने परिवार से मुलाकात कर सहायता का वादा किया।
ब्लड बैंक कर्मियों और यूनियनों की प्रतिक्रिया
कर्मचारियों ने कहा—“हम सब यह दबाव महसूस करते हैं।”
यूनियनों ने SIR टारगेट में बदलाव की मांग की।
कई जगह काले बैंड पहनकर विरोध जताया गया।
IMA जैसी संस्थाओं ने भी समर्थन दिया।

स्थानीय समुदाय की भूमिका
घर के बाहर मोमबत्ती जलाकर श्रद्धांजलि
छात्र और नागरिक मानसिक स्वास्थ्य समर्थन की मांग करते दिखे
सोशल मीडिया पर #SaveOurHealthWorkers ट्रेंड हुआ
यह जनदबाव बदलाव की शुरुआत बन सकता है।
उपाय: भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने की दिशा
सिर्फ़ दुख मनाना काफी नहीं—
ठोस सुधार ज़रूरी हैं।
SIR टारगेट की त्वरित नीति समीक्षा
BLOs और विशेषज्ञों की समिति बने
मौसम, क्षेत्र और संसाधनों के अनुसार लक्ष्य बदले जाएं
पायलट प्रोजेक्ट मुरादाबाद से शुरू हो सकता है
ईमानदार असफलताओं पर दंड समाप्त
यह कदम 2026 की शुरुआत तक लागू हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य प्रथम सहायता (Mental Health First Aid) प्रशिक्षण
सभी अधिकारियों के लिए अनिवार्य प्रशिक्षण
ऑनलाइन मॉड्यूल
नियमित तनाव पहचान सत्र
मुफ्त काउंसलिंग सेवाएँ
समय रहते मदद मिलना जीवन बचा सकता है।
अनाम शिकायत प्रणाली
ऐप या हेल्पलाइन जहाँ कर्मचारी दबाव/उत्पीड़न की शिकायत कर सकें
पहचान गुप्त रखी जाए
स्वतंत्र जांच समिति
त्वरित कार्रवाई
इससे भय कम होगा और पारदर्शिता बढ़ेगी।
सार्वजनिक सेवा में संवेदनशीलता की आवश्यकता
Moradabad की यह घटना दिखाती है कि सख्त टारगेट कैसे किसी कर्मचारी को मानसिक रूप से तोड़ सकते हैं।
यह सिस्टम के लिए चेतावनी है कि मानवता को किसी भी प्रदर्शन मीट्रिक से ऊपर रखना होगा।
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