किसान सम्मान दिवस पर योगी आदित्यनाथ की पहल: ट्रैक्टर वितरण से UP में कृषि क्रांति की शुरुआत
किसान सम्मान दिवस के अवसर पर UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य भर के किसानों को ट्रैक्टर वितरित किए। यह कदम उत्तर प्रदेश की कृषि व्यवस्था को नई गति देने वाला माना जा रहा है। यह पहल उन किसानों के प्रति सम्मान का प्रतीक है, जो देश का पेट भरते हैं और साथ ही आधुनिक खेती की दिशा में एक ठोस प्रयास भी है।
ज़रा कल्पना कीजिए—खेत तैयार हैं, आधुनिक मशीनें काम को आधे समय में पूरा कर रही हैं। UP की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है, लेकिन छोटे किसान अक्सर पुराने औज़ारों और बढ़ती लागत से जूझते हैं। किसान सम्मान दिवस पर ट्रैक्टर वितरण इसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करता है। राज्य की लगभग 70% आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से खेती पर निर्भर है, इसलिए ऐसे कार्यक्रमों का महत्व बहुत बड़ा है।
किसान सम्मान दिवस और ट्रैक्टर वितरण समारोह का महत्व
किसान सम्मान दिवस हर वर्ष 23 दिसंबर को मनाया जाता है। यह पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती है, जिन्होंने किसानों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। UP में यह दिन किसानों की भूमिका और योगदान को सम्मान देने का अवसर बन चुका है।
इस अवसर पर लखनऊ में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लगभग 1,500 किसानों को ट्रैक्टर सौंपे। ये केवल मशीनें नहीं, बल्कि उत्पादन बढ़ाने के साधन हैं। राज्य सरकार का मानना है कि कृषि यंत्रीकरण से 2026 तक फसल उत्पादन के लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
इस योजना में प्राथमिकता छोटे और सीमांत किसानों को दी गई, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम भूमि है। बढ़ती लागत से सबसे अधिक प्रभावित यही वर्ग होता है।
कृषि यंत्रीकरण को लेकर सरकार की सोच
राज्य सरकार का लक्ष्य खेती को आसान, तेज़ और अधिक लाभकारी बनाना है। ट्रैक्टर से जुताई और बुआई जल्दी होती है, जिससे समय और श्रम दोनों की बचत होती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आधुनिक उपकरण किसानों को जलवायु परिवर्तन और बाज़ार की चुनौतियों से निपटने में सक्षम बनाते हैं।
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चयन प्रक्रिया पारदर्शी रही। भूमि रिकॉर्ड और आय के आधार पर पात्रता तय की गई। महिला किसानों और सूखा प्रभावित क्षेत्रों के किसानों को विशेष प्राथमिकता दी गई।
सरकार का लक्ष्य है कि अगले पाँच वर्षों में कृषि दक्षता को दोगुना किया जाए, ताकि किसान कम लागत में अधिक उत्पादन कर सकें।
छोटे और सीमांत किसानों पर सीधा प्रभाव
वाराणसी के पास के एक गाँव के किसान राजेश कहते हैं,
“पहले मज़दूरों पर कई दिन लग जाते थे, अब कुछ ही घंटों में काम पूरा हो जाता है।”
ऐसी कहानियाँ हर जिले से सामने आईं। ट्रैक्टर सब्सिडी पर मिलने से लागत लगभग 40% कम हो गई, जिससे किसानों को भारी कर्ज़ नहीं लेना पड़ा। समय पर खेती होने से उत्पादन भी बढ़ा।
सीमांत किसान अब उपकरणों की कमी के कारण फसल चक्र छोड़ने को मजबूर नहीं हैं। इससे परिवार की आमदनी बढ़ी और बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान देना संभव हुआ।
आर्थिक लाभ और नीति की भूमिका
ट्रैक्टर वितरण से केवल किसानों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी लाभ मिलता है। जब खेती बढ़ती है, तो मरम्मत, बीज, खाद और परिवहन जैसे क्षेत्रों में भी रोज़गार बढ़ता है।
यह पहल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और राज्य की अन्य कृषि योजनाओं से जुड़ी है, जिनका उद्देश्य 2027 तक किसानों की आय दोगुनी करना है। बेहतर उत्पादन से खाद्य सुरक्षा भी मज़बूत होती है।
सब्सिडी और वित्तीय सुविधा
35 हॉर्स पावर का ट्रैक्टर जिसकी कीमत लगभग 5 लाख रुपये है, वह सब्सिडी के बाद करीब 3 लाख रुपये में मिला। शेष राशि के लिए कम ब्याज दर पर बैंक ऋण उपलब्ध कराया गया।
किसान क्रेडिट कार्ड योजना से 4% ब्याज पर ऋण लेने की सुविधा भी दी गई। आवेदन यूपी कृषि पोर्टल या ब्लॉक कार्यालयों से किया जा सकता है।
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फसल उत्पादन में वृद्धि और कटाई के बाद नुकसान में कमी
समय पर बुआई से उत्पादन 20–30% तक बढ़ सकता है। ट्रैक्टर से जुड़ी मशीनें कटाई में होने वाले नुकसान को कम करती हैं।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अनुसार, यंत्रीकृत खेती से फसल नुकसान लगभग 15% तक घटता है। इससे किसानों की आय बढ़ती है और बाज़ार में स्थिर आपूर्ति बनी रहती है।
ट्रैक्टर से आगे: तकनीक का समावेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्रैक्टर केवल शुरुआत हैं। आगे चलकर इनमें जीपीएस, मिट्टी परीक्षण और स्मार्ट उपकरण जोड़े जाएंगे।
कुछ ट्रैक्टर मोबाइल ऐप से जुड़े हैं, जो मिट्टी की सेहत और ईंधन की जानकारी देते हैं। ड्रोन मैपिंग और डिजिटल कृषि योजनाएँ भी राज्य में लागू की जा रही हैं।
प्रशिक्षण और कौशल विकास
समारोह के बाद ही प्रशिक्षण सत्र शुरू किए गए। ट्रैक्टर कंपनियों के विशेषज्ञों ने किसानों को मशीन चलाने और रखरखाव की जानकारी दी।
हर जिले में सर्विस सेंटर बनाए गए हैं और स्पेयर पार्ट्स उचित दाम पर उपलब्ध होंगे। इससे मशीनें लंबे समय तक उपयोगी रहेंगी।
प्रशासनिक और राजनीतिक संदर्भ
यह पहल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ज़मीनी स्तर पर सहायता देने की नीति को दर्शाती है। किसान लंबे समय से उपकरणों की मांग कर रहे थे और इस कार्यक्रम ने उस मांग को पूरा किया।
2017 में किए गए वादों—किसानों की आय बढ़ाने और कृषि ढांचे को मज़बूत करने—की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है।
क्षेत्रीय संतुलन और समान विकास
ट्रैक्टर वितरण सभी 75 जिलों में किया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश को लगभग 40% ट्रैक्टर मिले, जबकि बुंदेलखंड जैसे सूखा प्रभावित क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया गया।
इससे राज्य के हर हिस्से में संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा और ग्रामीण क्षेत्रों को मज़बूती मिलेगी।
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ट्रैक्टर वितरण के बाद उत्तर प्रदेश की कृषि का भविष्य
किसान सम्मान दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम सफल रहा। किसानों के हाथों में चाबियाँ और चेहरों पर उम्मीद दिखी।
आने वाले वर्षों में यंत्रीकरण, सब्सिडी और तकनीक के सहारे UP की खेती में बड़ा बदलाव संभव है।
मुख्य बिंदु:
यंत्रीकरण से समय और श्रम की बचत
सब्सिडी और योजनाओं से लागत में कमी
प्रशिक्षण और डिजिटल तकनीक से स्मार्ट खेती
सभी जिलों में समान वितरण से संतुलित विकास

