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गोरखपुर में होलिका दहन: आस्था और उत्सव का अद्भुत संगम-UP

Yogi Adityanath ने मार्च 2026 में गोरखपुर में होलिका दहन के अवसर पर विधिवत आरती की। विशाल अग्निकुंड की रोशनी में आयोजित यह समारोह हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में संपन्न हुआ। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वे Gorakhnath Math के महंत भी हैं, जिससे यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व का केंद्र बन जाता है।

UP में होली की शुरुआत होलिका दहन से होती है, लेकिन गोरखपुर का आयोजन विशेष पहचान रखता है। गोरखनाथ मठ की परंपराएँ इस उत्सव को ऐतिहासिक और आध्यात्मिक गहराई प्रदान करती हैं।

गोरखनाथ मठ की सांस्कृतिक भूमिका

गोरखनाथ मठ गोरखपुर की पहचान का केंद्र है। सदियों पुरानी यह पीठ नाथ संप्रदाय की प्रमुख आस्था स्थली मानी जाती है।
योगी आदित्यनाथ का महंत और मुख्यमंत्री—दोनों रूपों में उपस्थित होना इस आयोजन को विशिष्ट बनाता है। यह परंपरा और प्रशासन का संगम प्रतीत होता है।

होलिका दहन के दौरान मठ श्रद्धा का मुख्य केंद्र बन जाता है। आसपास के जिलों से लोग यहाँ एकत्र होकर इस विशेष आरती के साक्षी बनते हैं।

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आरती और पारंपरिक अनुष्ठान

मुख्यमंत्री वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजा प्रारंभ करते हैं। वे अग्निकुंड की परिक्रमा कर दीप से आरती करते हैं।
अनुष्ठान में अनाज, फल और जड़ी-बूटियाँ अग्नि में अर्पित की जाती हैं। इसके बाद प्रसाद वितरण होता है।

अंत में वे अग्नि प्रज्वलित करते हैं, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। यह अनुष्ठान होलिका दहन की मूल भावना—नव आरंभ और शुद्धिकरण—को दर्शाता है।

सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था

कार्यक्रम में हजारों लोगों की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए। पुलिस बल, बैरिकेडिंग और ड्रोन निगरानी की व्यवस्था रही।
स्थानीय प्रशासन ने यातायात, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं की विशेष व्यवस्था की, जिससे आयोजन शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।

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होलिका दहन का प्रतीकात्मक अर्थ

होलिका दहन की कथा प्रह्लाद और होलिका से जुड़ी है, जिसमें भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद अग्नि से सुरक्षित निकलते हैं और होलिका दहन हो जाती है। यह धर्म की अधर्म पर विजय का प्रतीक है।

योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति इस संदेश को समकालीन संदर्भ में भी रेखांकित करती है—सत्य, आस्था और नैतिकता की विजय।

मीडिया और जन प्रतिक्रिया

समारोह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किए गए। प्रदेशभर में इस आयोजन की चर्चा रही।
स्थानीय नागरिकों ने इसे गर्व और उत्साह का क्षण बताया। कई लोगों के लिए यह आध्यात्मिक ऊर्जा और सामुदायिक एकता का प्रतीक बना।

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अन्य प्रमुख स्थलों से तुलना

UP के अन्य शहरों में भी भव्य होलिका दहन होता है, जैसे:

  • Mathura – कृष्ण नगरी के रूप में प्रसिद्ध

  • Varanasi – गंगा घाटों की आध्यात्मिक आभा

  • Ayodhya – राम जन्मभूमि से जुड़ा धार्मिक महत्व

किन्तु गोरखपुर का आयोजन मुख्यमंत्री की प्रत्यक्ष भागीदारी के कारण विशेष पहचान रखता है।

गोरखपुर का होलिका दहन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि परंपरा, आस्था और नेतृत्व का संगम है।
Yogi Adityanath की भागीदारी इसे प्रदेश स्तर पर महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आयोजन बनाती है।

होलिका की अग्नि केवल बुराइयों का दहन नहीं करती, बल्कि आशा, एकता और नई शुरुआत का संदेश भी देती है।
रंगों के त्योहार से पहले यह आध्यात्मिक क्षण लोगों के मन में सकारात्मक ऊर्जा भर देता है।

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