UP में पुलिस अधिकारी निलंबित: वायरल वीडियो में युवक को लात मारते दिखे कॉन्स्टेबल — सोशल मीडिया ने दिलाई इंसाफ की शुरुआत
UP से एक चौंकाने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया। वीडियो में एक पुलिसकर्मी खुलेआम एक युवक को लात मारते हुए दिखता है। ये दृश्य कैमरे में कैद हो गया और कुछ ही घंटों में वायरल हो गया। इसके बाद पुलिस विभाग ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उस अधिकारी को निलंबित कर दिया। यह घटना पुलिस आचरण पर गंभीर सवाल उठाती है और यह दिखाती है कि सोशल मीडिया किस तरह जवाबदेही सुनिश्चित कर सकता है।
घटना का विवरण: कैमरे में कैद हुई बर्बरता
यह वीडियो लखनऊ ज़िले में एक चेकपोस्ट के पास का बताया जा रहा है। फुटेज में एक युवक पुलिस से बहस करता दिखता है। कुछ सेकंड बाद, ड्यूटी पर तैनात कॉन्स्टेबल उसे जोर से धक्का देता है और फिर पेट में लात मारता है। युवक नीचे गिर जाता है।
आसपास मौजूद लोगों ने यह दृश्य अपने मोबाइल से रिकॉर्ड कर लिया। वीडियो में कोई एडिटिंग या छेड़छाड़ नहीं दिखी। टाइमस्टैम्प और लोकेशन टैग ने इसकी पुष्टि की। वीडियो के वायरल होते ही ट्विटर (X), इंस्टाग्राम और फेसबुक पर गुस्से की लहर दौड़ गई।

पीड़ित की पहचान और स्वास्थ्य स्थिति
पीड़ित का नाम राजेश कुमार (28) है, जो लखनऊ का एक स्थानीय दुकानदार है। उन्होंने बताया कि घटना के तुरंत बाद उन्हें पेट में तेज़ दर्द हुआ।
उन्हें नज़दीकी क्लिनिक में दिखाया गया, जहाँ हल्की चोटें और मोच पाई गईं। कोई बड़ी हड्डी नहीं टूटी, लेकिन डॉक्टर ने कुछ दिन आराम की सलाह दी।
राजेश और उनके परिवार ने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। वे कहते हैं — “अगर वीडियो न होता तो शायद हमें कोई नहीं सुनता।”
आरोपी पुलिसकर्मी की पहचान और प्रतिक्रिया
आरोपी का नाम कॉन्स्टेबल विजय सिंह है, जो लखनऊ के एक स्थानीय थाने में तैनात था। वीडियो वायरल होने के बाद उसने पहले चुप्पी साध ली। बाद में उसने कहा कि यह “ड्यूटी के दौरान तनाव में की गई गलती” थी।
हालाँकि, पुलिस विभाग ने इसे स्वीकार नहीं किया।
विजय सिंह पिछले पाँच साल से सेवा में था और इससे पहले कोई बड़ी शिकायत उसके खिलाफ दर्ज नहीं थी। मगर इस बार सबूत इतने साफ़ थे कि बचना मुश्किल था।

पुलिस विभाग की कार्रवाई: निलंबन और जांच
निलंबन आदेश जारी करने की प्रक्रिया
वीडियो वायरल होने के 24 घंटे के भीतर UP पुलिस ने विजय सिंह को निलंबित कर दिया। आदेश में “कर्तव्य में गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता” को आधार बताया गया।
सोशल मीडिया के दबाव ने विभाग को तुरंत कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
अब विजय सिंह को ड्यूटी से हटा दिया गया है और जांच पूरी होने तक वेतन भी रुका रहेगा।

आंतरिक जांच की रूपरेखा
अगले दिन तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई गई।
जांच में यह देखा जाएगा कि:
क्या घटना के वक्त तनाव या उकसावे का कोई कारण था?
क्या विभागीय नियमों का उल्लंघन हुआ?
मौके पर मौजूद अन्य पुलिसकर्मियों ने क्यों नहीं रोका?
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