UP
UP , देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य, दिवाली जैसे त्योहारों के समय पटाखों (firecrackers) के उपयोग, उत्पादन और व्यापार से होने वाले हादसों और वायु प्रदूषण की चुनौतियों से अक्सर जूझता रहा है। पिछले कुछ वर्षों में पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोटों और ग़ैरकानूनी भंडारण से बड़े नुकसानों और जीवन-हानि की घटनाएं हुई हैं। इस पृष्ठभूमि में, यूपी के डीजीपी (Director General of Police) ने आदेश दिए हैं कि अवैध पटाखा निर्माण, बिक्री और भंडारण पर सक्रिय कार्रवाई की जाए।
यह कदम न केवल कानून व्यवस्था बनाए रखने का है, बल्कि सुरक्षा, जन-जीवन और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है। नीचे इसके विभिन्न पहलुओं और संभावित प्रभावों का विश्लेषण है।
पृष्ठभूमि और triggering घटनाएँ
हादसे और विस्फोट
Fatehpur में हादसा
2025 के सितंबर महीने में, यूपी के फतेहपुर जिले के Rewadi Khurd गांव में एक कथित अवैध पटाखा यूनिट में विस्फोट हुआ, जिसमें एक व्यक्ति, उसकी बेटी की मौत हो गई, और एक बेटा गंभीर रूप से घायल हुआ। पुलिस के अनुसार, उस व्यक्ति के नाम पर लाइसेंस था लेकिन वह लाइसेंस रिन्यूअल स्थिति में था।Gonda जिला विस्फोट
पिछले वर्ष (2024) Gonda जिले में एक अवैध पटाखा निर्माण इकाई में विस्फोट हुआ था, जिसमें मौतें हुईं। इस घटना के बाद तीन पुलिस कर्मियों को लापरवाही के कारण निलंबित किया गया था।और अन्य जिलों में भी विभिन्न समयों पर पटाखा गोदामों में विस्फोट या आग लगने की घटनाएँ सामने आई हैं, जिससे संपत्ति और जन-जीवन को भारी क्षति हुई है।
ये घटनाएँ इस बात का संकेत हैं कि अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण सिर्फ कानूनी उल्लंघन नहीं, बल्कि एक सुरक्षा-जोखिम है—जिसका परिणाम जानलेवा हो सकता है।
प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव
राज्य सरकारों और केंद्र सरकार दोनों पर नागरिकों एवं मीडिया के दबाव रहते हैं कि त्योहारों पर सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पटाखा फैक्ट्रियों की पहचान करें और उन्हें आबादी वाले इलाकों से दूर रखें।
इसी कड़ी में, पुलिस और प्रशासन को विशेष अभियान चलाने, निरीक्षण बढ़ाने और जिम्मेदारों को कार्रवाई के दायरे में लाने का निर्देश दिया गया है।
इस पটापीछे, डीजीपी का आदेश इन्हीं घटनाओं व दबावों की प्रतिक्रिया है।
डीजीपी के आदेश: मुख्य निर्देश एवं फैक्टर्स
यूपी डीजीपी के आदेशों को निम्न बिंदुओं में संक्षिप्त किया जा सकता है:
विशेष अभियान / अभियान अवधि
एक 15-दिवसीय विशेष अभियान की शुरुआत की गई है, जिसमें अवैध पटाखा निर्माण इकाइयों और गोदामों की पहचान और कार्रवाई अपेक्षित है।
अन्य रिपोर्टों में यह उल्लेख है कि एसएसपी, डीआईजी, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर की सुपरविजन में जिलेवार अभियान किया जा रहा है।संयुक्त निरीक्षण और टीम गठित करना
निरीक्षण की टीमों में पुलिस, स्थानीय प्रशासन अधिकारी (SDM, ADM), अग्नि सुरक्षा (Fire Service) और विस्फोटक विभाग (Explosives / Licensing Authority) शामिल होंगे।
निरीक्षणों की वीडियोग्राफी की जानी है और वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा उसकी समीक्षा की जाएगी।
लाइसेंसधारकों की इकाइयों की भी जाँच की जाएगी कि वे सुरक्षा मानदंडों का पालन कर रहे हैं या नहीं।
गैरकानूनी इकाइयों की पहचान और तुरंत कार्रवाई
अनाधिकृत निर्माण इकाइयों को तुरंत बंद किया जाए।
अनधिकृत भंडारण गोदामों की सामग्री जब्त की जाए।
यदि बच्चों को श्रम कराया गया हो, तो बाल श्रम उल्लंघन के प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो।
जन-आबादी वाले इलाकों में पटाखा गोदाम न हो और इसकी निगरानी सुनिश्चित हो।
संचालकों, स्थानीय अधिकारियों और निरीक्षक अधिकारियों पर जवाबदेही ठहराई जाए।
जिम्मेदारी और जवाबदेही
यदि जिस क्षेत्र में निरीक्षण हुआ है, वहां बाद में विस्फोट या दुर्घटना होती है, तो उस क्षेत्र के प्रभारी पुलिसकर्मी (beat in‑charge), SHO, निरीक्षक और व्यापक उत्तरदायित्व अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
यदि किसी अधिकारी ने निरीक्षण किया लेकिन अप्रत्येक दोषों की अनदेखी की, तो उन पर भी अनुवर्ती कार्रवाई हो सकती है।
दैनिक रिपोर्ट और समीक्षा की मांग की गई है ताकि अभियान की प्रगति पर नज़र रखी जा सके।
सूचना तंत्र और खुफिया सहयोग
LIU (Law & Intelligence Unit) और अन्य खुफिया इकाइयों से सूचना एकत्र करने की व्यवस्था।
संभावना वाले अवैध इकाइयों की सूचना प्राप्त करने पर तुरंत रेड की जाए।
स्थानीय पुलिस और राजस्व अधिकारियों को सूचना संगठित करने हेतु निर्देश।लाइसेंसिंग, बिक्री, भंडारण नियंत्रण
केवल मान्य लाइसेंस धारकों को निर्माण, बिक्री और भंडारण करने की अनुमति होगी।
पटाखा भंडारण और बिक्री ऐसी स्थानों पर हो जो आबाद इलाकों से दूर हों।
अनधिकृत विक्रेताओं और गोदामों की निगरानी बढ़ाई जाए।
यदि कोई बिक्री संचालन लाइसेंस के बिना हो रहा हो, तत्काल कार्रवाई हो।
सुरक्षा तैयारियों और डिजास्टर प्रबंधन
अग्नि सुरक्षा उपकरण, हॉलमार्कों का पालन, इमरजेंसी एक्जिट, पर्याप्त दूरी आदि सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना।
इकाइयों में काम करने वालों को आवश्यक सुरक्षा प्रशिक्षण देना।
धनुष, विस्फोटक नियंत्रण, भंडारण सुरक्षा जैसे पहलुओं की समीक्षा करना।
कानूनी आधार और चुनौतियाँ
कानूनी प्रावधान
Explosive Substances Act, 1884
इस अधिनियम के प्रावधान अवैध निर्माण, भंडारण और उपयोग को नियंत्रित करते हैं।Petroleum, Explosives, and Dangerous Substances (PESD) Rules
पटाखों में प्रयुक्त सामग्री जैसे पोटाशियम नाइट्रेट आदि को नियंत्रित करती है।स्थानीय अधिनियम और राज्य नियमावली
राज्य सरकार या स्थानीय प्रशासन द्वारा अतिरिक्त आदेश एवं प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।न्यायालय के आदेश
उदाहरण के लिए, सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली‑एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध लगाया है और “साफ हवा का अधिकार” को जीवन का एक अहम हिस्सा माना है। यह निर्णय समान तर्क यूपी में भी लागू किया जा सकता है।
इस प्रकार डीजीपी आदेश एक वैध आधार पर आधारित है — कानून, राज्य नीति और न्यायालयीन आदेशों के संगम पर।
चुनौतियाँ
निर्माण इकाइयों का छिपना और विभाजन
अवैध इकाइयाँ अक्सर ग्रामीण इलाकों, ढीले निर्माणों में छिपी होती हैं या रात में गतिविधि होती है। उनका लोकेशन बदलना आसान है।कम संसाधन और निरीक्षक दबाव
पर्याप्त मानव संसाधन, उपकरण और निरीक्षण समय का अभाव हो सकता है।
यदि प्रत्येक निरीक्षण को वीडियोग्राफी और वरिष्ठ समीक्षा से जोड़ना हो, तो यह प्रक्रिया धीमी हो सकती है।लाइसेंसधारकों और गैरलाइसेंसधारकों की जटिलता
कुछ इकाइयाँ आंशिक रूप से लाइसेंसधारी हो सकती हैं और लाइसेंस की सीमाओं का उल्लंघन करती हों। उनकी पहचान और अंतर करना मुश्किल हो सकता है।
छोटे विक्रेता जो खुद उत्पादन नहीं करते, केवल बिक्री करते हैं — उनकी गतिविधि को नियंत्रित करना भी चुनौती है।वसूली (Seizure) के बाद कानूनी प्रक्रिया
जब सामग्री जब्त की जाए, तो उसका भंडारण, परीक्षण, मुकदमा—सभी प्रक्रियाएँ होती हैं। यह मामला लंबित रहने की संभावना होती है और न्यायालयीन बाधाएँ आती हैं।
अगर अभियुक्त फरार हो जाएँ या प्रमाण इकट्ठा करना कठिन हो, तो अभियोजन कमजोर बन सकता है।लोक प्रतिक्रिया और विरोध
त्योहारों की सांस्कृतिक एवं धार्मिक संवेदनाएँ हैं। जनता या व्यापारियों की नाराजगी हो सकती है कि उन्हें मनाने का अधिकार छिना गया।
छोटे विक्रेताओं विशेष रूप से प्रभावित हो सकते हैं — यदि उन्हें लाइसेंस नहीं मिले या उन्हें प्रतिकूल निरीक्षण झेलना पड़े।अन्य प्रदूषण स्रोतों के बीच पटाखों का प्रतिरोध
पटाखों से होने वाला प्रदूषण एक हिस्सा है; कृषि अवशेष जलाना, धूल, वाहन उत्सर्जन आदि बड़े स्रोत हैं। यदि सिर्फ पटाखों पर सख्ती हो और अन्य स्रोतों पर ठोस कार्रवाई न हो, तो वायु गुणवत्ता पर अपेक्षित सुधार नहीं हो पाएगा।
अपेक्षित प्रभाव और दिशाएँ
सुरक्षा और जान-माल की रक्षा
अगर आदेश सही तरीके से लागू हुए, तो विस्फोट और अग्नि दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
जन-जीवन को सुरक्षा मिलेगी—बच्चों, राहगीर एवं आस-पास रहने वालों को जोखिम से बचाया जा सकेगा।
अवैध कारोबार पर दबाव
वहाँ जहाँ अवैध उत्पादन, भंडारण और बिक्री होती है, उन इकाइयों को बंद करने और व्यापारिक नेटवर्क को बाधित करने की संभावना बढ़ेगी।
गिरफ्तार और जब्ती बढ़ेंगी, जिससे अवैध व्यापार को संचालित करना मुश्किल होगा।
बेहतर प्रशासन और जवाबदेही
वीडियोग्राफी, वरिष्ठ समीक्षा और जवाबदेही की व्यवस्था से अधिकारियों में सतर्कता बढ़ेगी।
इंस्पेक्शन सिस्टम में पारदर्शिता आएगी।
समाज और पर्यावरण
वायु प्रदूषण पर नियंत्रण में मदद मिलेगी—खास कर त्योहारों के समय के धुएँ और रसायनों को कम करने में।
लोगों की स्वास्थ्य रक्षा होगी—लंग संबंधी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है।
व्यापारिक और रोजगार प्रभावित पक्ष
पटाखा उद्योग पर असर पड़ेगा—कुछ इकाइयों को सीमित करना पड़ेगा।
छोटे विक्रेता और स्थानीय व्यापारियों को लाइसेंस, स्थान, ऑपरेशन नियमों आदि में अनुकूल अवसर देना होगा, वरना उनका नुकसान हो सकता है।
सरकार को उद्योग को संक्रमणकालीन सहायता या वैकल्पिक रोजगार योजनाएँ तैयार रखना चाहिए।
आलोचनाएँ और सावधानी
अगर कार्रवाई केवल ऊपरी इकाइयों तक सीमित रहे और निचली कड़ी (स्थानीय विक्रेता, मध्यम स्तरीय गोदाम) नहीं छुआ जाए, तो पूरा नेटवर्क प्रभावित नहीं होगा।
कार्रवाई के नाम पर ज़्यादा झड़प या अत्यधिक उत्पीड़न होने की संभावना है—जो छोटे विक्रेताओं को वंचित कर सकता है।
यदि रैपिड कार्रवाई, सामग्री वसूली और मुकदमेबाजी नहीं हो, तो आदेश शाब्दिक रूप से “कागज़ी” ही रह जाएंगे।
अधिकारियों में प्रशिक्षण, संसाधन, समन्वय एवं राजनीतिक will (इच्छाशक्ति) होना चाहिए—वरना आदेश अधूरा ही रह जाएगा।
यूपी के डीजीपी का यह कदम—अवैध पटाखा निर्माण, बिक्री और भंडारण पर सख्ती से कार्रवाई करने का—समय उपयुक्त, आवश्यक और गंभीरता दर्शाने वाला है। यह कदम सुरक्षा की दिशा में, जन-जीवन की रक्षा की दिशा में और वायु एवं पर्यावरण स्वास्थ्य की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
लेकिन, इस आदेश की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी:
ठोस क्रियान्वयन — निरीक्षण, वीडियोग्राफी, कार्रवाई, जब्ती, मुकदमा
लोक समर्थन — जागरूकता, नागरिकों की भागीदारी, शिकायत तंत्र
उद्योग एवं व्यापारियों का संवाद — वैकल्पिक व्यवस्था, सहयोग और नियमितीकरण
निरंतर निगरानी और समीक्षा — दैनिक रिपोर्टिंग, वरिष्ठ समीक्षा, संबद्ध विभागों का समन्वय
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