UP को मिली नई ऊर्जा: मुख्यमंत्री योगी ने लखनऊ में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक ईवी मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का उद्घाटन किया
UP ने स्वच्छ और हरित परिवहन की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में अशोक लेलैंड के अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माण संयंत्र का उद्घाटन किया। यह पहल न सिर्फ राज्य की औद्योगिक क्षमता को मजबूती देती है, बल्कि भारत के हरित परिवहन लक्ष्य में यूपी को अग्रणी भूमिका में लाती है।
करीब ₹500 करोड़ के निवेश से बना यह प्लांट रोजगार, तकनीक और पर्यावरण—तीनों मोर्चों पर बदलाव लाने वाला है। भारत का ईवी बाजार 2030 तक 1 करोड़ यूनिट तक पहुंचने का अनुमान है और यह फैक्ट्री यूपी को उसी रेस में आगे खड़ा करती है।
अशोक लेलैंड के नए संयंत्र का रणनीतिक महत्व
ईवी मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में लखनऊ
लखनऊ अब सिर्फ सांस्कृतिक राजधानी नहीं, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण का नया केंद्र बन रहा है। यह संयंत्र औद्योगिक क्षेत्र में, प्रमुख हाईवे और रेल नेटवर्क के पास स्थित है, जिससे लॉजिस्टिक्स आसान होगा।
शुरुआत में यहां ई-बसें और हल्के वाणिज्यिक ईवी बनाए जाएंगे। पूरी क्षमता पर पहुंचने पर यह प्लांट सालाना 5,000 से अधिक वाहन तैयार करेगा। इससे लखनऊ और आसपास के जिलों में औद्योगिक गतिविधियां तेज होंगी।
कल्पना कीजिए—शहरों में डीज़ल बसों की जगह शांत, प्रदूषण-रहित इलेक्ट्रिक बसें दौड़ेंगी। यह संयंत्र उसी बदलाव की नींव है।
निवेश और सरकारी प्रोत्साहन
अशोक लेलैंड का ₹500 करोड़ का निवेश आधुनिक ईवी असेंबली लाइनों और तकनीक पर केंद्रित है। UP की ईवी नीति के तहत:
ग्रीन टेक्नोलॉजी उपकरणों पर 50% तक सब्सिडी
टैक्स में छूट और भूमि आवंटन में सहूलियत
तेज़ मंजूरी प्रक्रिया
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार और उद्योग के बीच मजबूत साझेदारी बनी, जिससे यह परियोजना समय पर आगे बढ़ सकी। संयंत्र के मध्य-2026 तक पूरी तरह चालू होने की उम्मीद है।

आर्थिक प्रभाव: रोजगार, सप्लाई चेन और स्थानीय विकास
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार
इस संयंत्र से:
1,200 प्रत्यक्ष नौकरियां (तकनीशियन, इंजीनियर, सॉफ्टवेयर विशेषज्ञ)
3,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार (लॉजिस्टिक्स, सप्लायर, सर्विस सेक्टर)
राज्य सरकार तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर ईवी स्किल ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू कर रही है, ताकि स्थानीय युवाओं को सीधे रोजगार मिल सके।
ऑटोमोटिव सप्लाई चेन को मजबूती
यह संयंत्र आसपास के क्षेत्रों में बैटरी, मोटर, चार्जिंग यूनिट और अन्य पुर्ज़ों के निर्माताओं को आकर्षित करेगा। इससे:
आयात पर निर्भरता घटेगी
लागत कम होगी
ईवी सस्ते और सुलभ बनेंगे
लखनऊ के आसपास एक ईवी क्लस्टर विकसित होने की पूरी संभावना है, जो यूपी की अर्थव्यवस्था को और मजबूत करेगा।

UP के सतत परिवहन विज़न के अनुरूप
सार्वजनिक और व्यावसायिक ईवी को बढ़ावा
इस प्लांट में बनी ई-बसें यूपी के शहरों में चलेंगी। लखनऊ और कानपुर जैसे शहरों में 2027 तक 500 डीज़ल बसों को ई-बसों से बदलने की योजना है।
इसके अलावा:
डिलीवरी और लॉजिस्टिक्स के लिए हल्के ईवी
ग्रामीण क्षेत्रों में किफायती इलेक्ट्रिक वाहन
स्थानीय उत्पादन से कीमतें कम रहेंगी और सर्विस नेटवर्क पास होगा।
ESG लक्ष्य और कार्बन उत्सर्जन में कमी
संयंत्र की खासियतें:
50% ऊर्जा सोलर पैनलों से
वाटर रीसाइक्लिंग और ग्रीन बिल्डिंग डिजाइन
यहां बने ईवी, पारंपरिक वाहनों की तुलना में 60% तक कम कार्बन उत्सर्जन करते हैं। इससे वायु प्रदूषण घटेगा और ईंधन खर्च भी कम होगा—यानी पर्यावरण और जेब दोनों को फायदा।
चुनौतियां और भविष्य की राह
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी
ईवी को बढ़ाने के लिए यूपी को 2028 तक 10,000 चार्जिंग स्टेशन तैयार करने होंगे। इसके लिए:
हाईवे पर फास्ट चार्जर
तेल कंपनियों और निजी कंपनियों के साथ साझेदारी
मजबूत बिजली ग्रिड और नेटवर्क अपग्रेड

प्रतिस्पर्धा और तकनीकी बढ़त
अशोक लेलैंड, टाटा और महिंद्रा जैसी कंपनियों के बीच यूपी नया ईवी हब बनता जा रहा है। अशोक लेलैंड की खास पहचान—हेवी-ड्यूटी ई-बसें—उसे अलग बढ़त देती हैं।
इस संयंत्र से मिलने वाली तकनीकी विशेषज्ञता स्थानीय उद्योगों तक पहुंचेगी, जिससे पूरा ईकोसिस्टम मजबूत होगा।
ईवी पावरहाउस बनता उत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उद्घाटित अशोक लेलैंड का यह ईवी संयंत्र उत्तर प्रदेश के हरित विकास की दिशा में मील का पत्थर है। यह:
रोजगार पैदा करता है
सप्लाई चेन मजबूत करता है
प्रदूषण घटाता है
मुख्य बातें संक्षेप में:
4,200 से अधिक नए रोजगार
स्थानीय ईवी पुर्ज़ों से आयात में कमी
चार्जिंग नेटवर्क के साथ मिलकर ईवी अपनाने को रफ्तार
UP अब सिर्फ विकास की बात नहीं कर रहा, बल्कि इलेक्ट्रिक भविष्य को साकार कर रहा है। आने वाले समय में यह संयंत्र राज्य की सड़कों और अर्थव्यवस्था—दोनों की तस्वीर बदल सकता है।
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