भूमि विवाद में हिंसक झड़प, बुलंदशहर में ब्लॉक प्रमुख के भतीजे की पीट-पीटकर हत्या
बुलंदशहर में एक शांत सुबह उस समय मातम में बदल गई, जब ज़मीन की नाप-जोख को लेकर हुआ मामूली विवाद हिंसा में बदल गया। इस झड़प में राहुल सिंह (28) की बेरहमी से पिटाई कर दी गई, जिससे उनकी मौत हो गई। राहुल स्थानीय ब्लॉक प्रमुख राजेश कुमार के भतीजे थे। इस घटना ने एक बार फिर UP के ग्रामीण इलाकों में ज़मीन विवादों की भयावह तस्वीर सामने रख दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में ज़मीन को लेकर विवाद आम बात है, जो अक्सर पुराने रिकॉर्ड, पारिवारिक दावों और आपसी रंजिश से शुरू होकर जानलेवा संघर्ष में बदल जाते हैं। इस मामले में मृतक का एक प्रभावशाली स्थानीय नेता से संबंध होना, पूरे प्रकरण को और संवेदनशील बनाता है और निष्पक्ष न्याय को लेकर सवाल खड़े करता है।
घटना का विवरण: कैसे बढ़ा विवाद और गई जान
मृतक और विवाद में शामिल पक्ष
राहुल सिंह, उम्र 28 वर्ष, अपने चाचा और ब्लॉक प्रमुख राजेश कुमार के साथ स्थानीय कामकाज में सहयोग करते थे। विवाद दूसरी ओर से मोहन यादव और उसके दो भाइयों के साथ था, जो लगभग पांच एकड़ ज़मीन पर अपना दावा कर रहे थे।
बताया जा रहा है कि दोनों परिवारों के बीच इस ज़मीन को लेकर वर्षों से विवाद चला आ रहा था। नाप-जोख के दौरान राहुल अपने चाचा के पक्ष में मौजूद थे, जिसे मोहन पक्ष ने सीधी चुनौती माना।
शुरुआत में किसी ने नहीं सोचा था कि मामला इतनी हिंसा तक पहुंच जाएगा।
विवाद की चिंगारी: ज़मीन की नाप-जोख के दौरान हिंसा
सुबह करीब 10 बजे राजस्व विभाग की टीम ज़मीन की पैमाइश के लिए मौके पर पहुंची। पुरानी खतौनी और नक्शों के आधार पर सीमांकन किया जा रहा था। राहुल और उनके चाचा पास ही मौजूद थे।
पहले कहासुनी हुई। मोहन यादव ने आरोप लगाया कि नाप-जोख ब्लॉक प्रमुख के पक्ष में की जा रही है। राहुल ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सरकारी रिकॉर्ड स्पष्ट हैं।
धीरे-धीरे बात धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। आरोप है कि मोहन यादव ने लाठी से राहुल के सिर पर वार किया, जबकि उसके भाइयों ने शरीर पर कई वार किए। अचानक हुई इस हिंसा से राजस्व कर्मी मौके से भाग खड़े हुए। कुछ ही मिनटों में राहुल जमीन पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए।
अस्पताल और पुलिस कार्रवाई
राहुल को तुरंत पास के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो घंटे तक कोशिश की, लेकिन सिर में गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई।
सूचना मिलने पर पुलिस करीब 30 मिनट में मौके पर पहुंची। क्षेत्र को सील किया गया और गवाहों के बयान लिए गए। उसी दिन मोहन यादव और उसके भाइयों के खिलाफ हत्या सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई। आगे की हिंसा रोकने के लिए ज़मीन को अस्थायी रूप से सील कर दिया गया।
जड़ में क्या है विवाद: कारणों की पड़ताल
कानूनी बनाम परंपरागत सीमाएं
बुलंदशहर जैसे इलाकों में ज़मीन के रिकॉर्ड कई दशक पुराने हैं, जिनमें हाथ से बनाए गए नक्शे और त्रुटियां आम हैं। किसान अक्सर कागज़ी रिकॉर्ड से ज्यादा परंपरागत सीमाओं पर भरोसा करते हैं।
इस मामले में भी एक पक्ष वर्षों से खेत में बाड़ लगाकर काबिज़ था, जबकि सरकारी रिकॉर्ड कुछ और बता रहे थे। ऐसे विरोधाभास विवाद को और भड़काते हैं।
स्थानीय सत्ता संतुलन की भूमिका
ब्लॉक प्रमुख होने के नाते राजेश कुमार का स्थानीय प्रशासन और राजनीति में प्रभाव है। ऐसे मामलों में रिश्तेदारों को भी यह भरोसा रहता है कि प्रशासन उनके पक्ष में रहेगा।
वहीं दूसरी ओर, विरोधी पक्ष को डर होता है कि सत्ता के दबाव में उनका नुकसान हो सकता है। यही डर कई बार हिंसक प्रतिक्रिया को जन्म देता है।
पुराना विवाद और बढ़ती दुश्मनी
इस ज़मीन को लेकर पिछले पांच वर्षों में कई बार विवाद हो चुका था। कोर्ट में मामले चल रहे थे और 2024 में एक झड़प भी हुई थी, जिसमें एक व्यक्ति घायल हुआ था।
गांव में पंचायतों के जरिए मामला दबाया गया, लेकिन असल विवाद कभी सुलझा नहीं। नाप-जोख उसी अधूरी दुश्मनी की चिंगारी बन गई।
कानून व्यवस्था: जांच और गिरफ्तारियां
जांच की स्थिति
पुलिस ने मोहन यादव और उसके भाइयों पर आईपीसी की धारा 302 (हत्या), 323 (मारपीट) और 147 (दंगा) के तहत मामला दर्ज किया है। घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए हैं और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट की पुष्टि हुई है।
गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत
तीनों मुख्य आरोपी गिरफ्तार कर लिए गए हैं और उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है। फिलहाल किसी को जमानत नहीं मिली है।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद ग्रामीणों ने थाने के बाहर प्रदर्शन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। स्थानीय विधायक ने घटना की निंदा करते हुए शांति बनाए रखने की अपील की। ब्लॉक प्रमुख के परिवार ने त्वरित न्याय की मांग की है।
बड़ी तस्वीर: यूपी में ज़मीन विवाद और हिंसा
आंकड़ों की सच्चाई
राज्य अपराध आंकड़ों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में हर साल करीब 250 मौतें ज़मीन विवाद से जुड़ी होती हैं। बुलंदशहर जैसे जिलों में ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
2025 में यूपी में 1,000 से अधिक ज़मीन विवाद से जुड़े एफआईआर
60% मामलों में आरोपी और पीड़ित परिचित या रिश्तेदार
ग्रामीण जिलों में हिंसा की दर सबसे अधिक
राजस्व विभाग की सीमाएं
राजस्व कर्मचारी नाप-जोख तो करते हैं, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नहीं होती। इस मामले में भी कर्मचारी हिंसा होते देख भाग गए। देरी और स्टाफ की कमी विवाद को और बढ़ाती है।
सुरक्षित सीमांकन के लिए जरूरी कदम
पैमाइश से पहले पुलिस को सूचना दें
दोनों पक्षों की मौजूदगी में सीमांकन कराएं
पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग करें
अकेले न जाएं, तटस्थ गवाह साथ रखें
पंचायत या मध्यस्थता केंद्र की मदद लें
जवाबदेही और न्याय की मांग
बुलंदशहर की यह घटना बताती है कि ज़मीन विवाद को नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है। पुराने रिकॉर्ड, स्थानीय दबदबा और जल्द गुस्सा—ये सब मिलकर हिंसा को जन्म देते हैं।
राहुल सिंह के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद है, वहीं समाज प्रशासन से ऐसी व्यवस्थाओं की मांग कर रहा है जिससे भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। सुरक्षित नाप-जोख, तेज़ न्याय और प्रभावी मध्यस्थता ही इसका हल है।
यदि आपके आसपास ज़मीन को लेकर विवाद है, तो हिंसा नहीं, संवाद का रास्ता चुनें। यही राहुल के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
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