Uttar Pradesh

अनियमितताओं के चलते Uttar Pradesh में असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द: सीएम योगी आदित्यनाथ ने सख्त कार्रवाई का दिया भरोसा

सोचिए, आपने सालों तक मेहनत की हो और किसी और की बेईमानी की वजह से आपका बड़ा मौका हाथ से निकल जाए। यही हाल इस वक्त उत्तर प्रदेश के हजारों शिक्षक अभ्यर्थियों का है।
15 दिसंबर 2025 को Uttar Pradesh लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने इतिहास, समाजशास्त्र और अर्थशास्त्र जैसे विषयों की असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा रद्द करने का ऐलान किया। वजह—पेपर लीक और नकल से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं

यह परीक्षा राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में 2,000 से ज्यादा पदों को भरने के लिए थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और योग्यता आधारित चयन का भरोसा दिलाया। अभ्यर्थियों के लिए यह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि उनके सपनों पर गहरी चोट है।

सेक्शन 1: अनियमितता की जड़—परीक्षा रद्द क्यों हुई?

परीक्षा रद्द करने के आधिकारिक कारण

UPPSC ने स्पष्ट किया कि जांच में पेपर लीक के ठोस सबूत मिले हैं। लखनऊ और कानपुर के कई केंद्रों से जुड़े मामलों में सामने आया कि
20 नवंबर 2025 को परीक्षा से कुछ घंटे पहले ही प्रश्नपत्र ऑनलाइन वायरल हो चुके थे।

आंतरिक जांच में चैट्स, वीडियो और लेन-देन के प्रमाण मिले, जिससे यह साफ हो गया कि यह एक संगठित गड़बड़ी थी, जिसमें कुछ कर्मचारी और बाहरी लोग शामिल थे। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए पूरी परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया।

आरोपों और शिकायतों की समयरेखा

  • 18 नवंबर 2025: सोशल मीडिया पर कथित प्रश्नपत्रों की तस्वीरें वायरल

  • 21–22 नवंबर: परीक्षा के बाद सबूत बढ़े, इलाहाबाद में विरोध प्रदर्शन

  • 10 दिसंबर: UPPSC ने जांच समिति बनाई

  • 15 दिसंबर: परीक्षा रद्द करने का अंतिम फैसला

इससे पहले दो परीक्षा केंद्रों को ब्लैकलिस्ट किया गया और तीन सुरक्षाकर्मियों को बर्खास्त किया गया।

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सेक्शन 2: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कड़ा रुख

जवाबदेही और जीरो टॉलरेंस की नीति

16 दिसंबर को विधानसभा में सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह घोटाला
“युवाओं के भविष्य पर सीधा हमला” है।
उन्होंने दो टूक कहा,

“हम मेहनती युवाओं का हक किसी भी कीमत पर नहीं छिनने देंगे। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

उनका यह रुख राज्य में स्वच्छ और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दिखाता है।

कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई

  • 15 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

  • नोएडा के एक प्रिंटिंग प्रेस मालिक और UPPSC के दो कर्मचारी शामिल

  • 8 से अधिक गिरफ्तारियां (20 दिसंबर तक)

  • 20 अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच

  • उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कार्रवाई

    • दोष सिद्ध होने पर 7 साल तक की सजा

यह कदम भविष्य में ऐसी हरकतों को रोकने के लिए कड़ा संदेश है।

सेक्शन 3: उच्च शिक्षा के अभ्यर्थियों पर असर

भर्ती प्रक्रिया पर असर

इस फैसले से राज्य के 30 से अधिक विश्वविद्यालयों में
2,500 से ज्यादा असिस्टेंट प्रोफेसर पद अधर में लटक गए हैं।
परिणामस्वरूप:

  • शिक्षकों पर अतिरिक्त बोझ

  • कक्षाओं में छात्रों की संख्या बढ़ेगी

  • ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता पर असर

कम से कम 6 महीने की देरी की आशंका जताई जा रही है।

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अभ्यर्थियों की प्रतिक्रिया

अभ्यर्थियों की भावनाएं बंटी हुई हैं:

  • कुछ को राहत:
    “कम से कम अब ईमानदार उम्मीदवारों को मौका मिलेगा”

  • कई नाराज़:
    कोचिंग फीस, किताबों और समय की बर्बादी को लेकर गुस्सा

लखनऊ में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन कर पूरी पारदर्शिता की मांग की। सोशल मीडिया पर एक स्वर उभरा—
“सिस्टम ठीक करो, वरना भरोसा टूटता जाएगा।”

सेक्शन 4: भविष्य में गड़बड़ियों से बचाव के उपाय

परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव

सरकार अब बड़े सुधारों की तैयारी में है:

  • प्रश्नपत्र छापने और ढुलाई पर सख्त निगरानी

  • परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक एंट्री

  • बाहरी जिलों से सुरक्षाकर्मी

  • निजी एजेंसियों की निगरानी भूमिका

तकनीक का इस्तेमाल (व्यावहारिक उपाय)

अन्य राज्यों से सीख लेते हुए यूपी में ये कदम उठाए जा सकते हैं:

  • एन्क्रिप्शन: परीक्षा से कुछ मिनट पहले ही डिजिटल प्रश्नपत्र खोलने की अनुमति

  • AI युक्त CCTV: संदिग्ध गतिविधियों पर तुरंत अलर्ट

  • बायोमेट्रिक सत्यापन: पहचान और उत्तरपुस्तिका का मिलान

  • डिजिटल ऑडिट ट्रेल: हर चरण का रिकॉर्ड

तमिलनाडु जैसे राज्यों में इन उपायों से पेपर लीक में 70% तक कमी आई है।

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मेरिट पर भरोसा बहाल करने की चुनौती

असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा का रद्द होना एक कठोर लेकिन जरूरी फैसला है।
UPPSC की कार्रवाई और सीएम योगी आदित्यनाथ का सख्त रुख यह संदेश देता है कि
योग्यता से कोई समझौता नहीं होगा

आगे चलकर 2026 के मध्य तक दोबारा परीक्षा होने की उम्मीद है, इस बार ज्यादा सख्त नियमों के साथ।
यह संकट उत्तर प्रदेश के लिए एक परीक्षा है—अगर सरकार ईमानदारी से सुधार लागू करती है, तो शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी।

अभ्यर्थियों के लिए संदेश साफ है:
हिम्मत रखें, मेहनत बेकार नहीं जाएगी।
सूचनाओं के लिए आधिकारिक वेबसाइट पर नजर रखें और पारदर्शिता की मांग करते रहें—क्योंकि असली तरक्की ईमानदारी से ही आती है।

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