Uttarakhand उत्तरायणी मेले के उद्घाटन पर सीएम धामी का भव्य विज़न: नई परियोजनाओं और विकास पर फोकस
Uttarakhand में हर साल उत्तरायणी मेला रंगों, उत्साह और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व पहाड़ों और घाटियों से लोगों को एक साथ लाता है, सर्दियों के अंत और नई शुरुआत के प्रतीक के रूप में। जनवरी 2026 की एक ठंडी लेकिन धूपभरी सुबह, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अल्मोड़ा ज़िले में इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन किया। उद्घाटन के साथ ही उन्होंने पर्यटन, सड़क, कनेक्टिविटी और स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा देने वाली कई नई विकास परियोजनाओं की घोषणा भी की। इन पहलों ने मेले की परंपराओं को Uttarakhand के उज्ज्वल भविष्य से जोड़ दिया।
यह मेला फसल के मौसम के केंद्र में आता है। किसान अपने उत्पाद बेचते हैं, परिवार एकजुट होते हैं और कलाकार पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत करते हैं। यह केवल उत्सव नहीं, बल्कि छोटे कस्बों की अर्थव्यवस्था को गति देने वाला बड़ा व्यापारिक केंद्र भी है। मुख्यमंत्री धामी के संबोधन ने इन जड़ों को और मज़बूत किया। उन्होंने Uttarakhand को अधिक सशक्त, समृद्ध और जुड़ा हुआ बनाने का संकल्प दोहराया।
उत्तरायणी मेला: सांस्कृतिक धरोहर का नवजीवन
उत्तरायणी मेला Uttarakhand की सांस्कृतिक पहचान की एक मज़बूत कड़ी है। मकर संक्रांति के आसपास आयोजित होने वाला यह मेला सूर्य के उत्तरायण होने और कुमाऊँ पंचांग के नए वर्ष का प्रतीक है। पूजा-पाठ, बाज़ार और पारंपरिक भोज के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। 2026 का आयोजन शुरू से ही खास रहा, जिसमें मुख्यमंत्री की मौजूदगी ने उत्साह और बढ़ा दिया।
धूप में नहाई पहाड़ियों के बीच भारी भीड़ उमड़ी। ऊनी शॉल, मसाले, हस्तनिर्मित बर्तन और स्थानीय उत्पादों से सजी दुकानों ने मेले को जीवंत बना दिया। लोक संगीत और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुनों ने हर किसी को झूमने पर मजबूर कर दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामुदायिक भावना
उत्तरायणी मेले की जड़ें कुमाऊँ की पहाड़ियों में सदियों पुरानी हैं। इस दिन लोग सूर्य देव की आराधना करते हैं, अलाव जलाते हैं, तिल-गुड़ के व्यंजन बाँटते हैं और अच्छी फसल की कामना करते हैं। समय के साथ ये परंपराएँ एक विशाल मेले का रूप ले चुकी हैं।
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अल्मोड़ा में इसकी शुरुआत 19वीं सदी में एक छोटे सामुदायिक आयोजन के रूप में हुई थी, जो आज हज़ारों लोगों को आकर्षित करता है। परिवार पीढ़ियों से इस मेले की कहानियाँ सुनाते आए हैं। बच्चे जाड़ा और झोड़ा जैसे लोकनृत्य सीखकर परंपरा को आगे बढ़ाते हैं।
यह मेला समुदाय को जोड़ता है। किसान अनुभव साझा करते हैं, कारीगर अपनी पारंपरिक कला दिखाते हैं। शहरों की भागदौड़ से दूर, यह आपसी रिश्तों को मज़बूत करता है।
मुख्यमंत्री धामी के संबोधन की मुख्य बातें
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंच से कहा,
“उत्तरायणी केवल मेला नहीं, हमारी आत्मा है। हम इसकी परंपराओं को संजोते हुए विकास की नई राह बनाएँगे।”
उन्होंने राज्य की एकता पर ज़ोर देते हुए कहा,
“सीमांत क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक, उत्तराखंड एकजुट है।”
उन्होंने मंदिरों के संरक्षण, सांस्कृतिक केंद्रों और लोककला के संवर्धन के लिए विशेष बजट की घोषणा भी की। उनके संबोधन में गर्व और भविष्य की योजनाओं का संतुलन साफ दिखा।
मेले का आर्थिक प्रभाव (घोषणाओं से पहले)
परियोजनाओं की घोषणा से पहले भी उत्तरायणी मेला स्थानीय अर्थव्यवस्था को मज़बूती देता रहा है। पिछले वर्ष 50,000 से अधिक पर्यटक आए, जिससे करोड़ों रुपये का व्यापार हुआ। शहद, मसाले, हस्तशिल्प और आभूषणों की बिक्री से ग्रामीण इलाकों की आमदनी बढ़ी।
अल्मोड़ा जैसे व्यापारिक केंद्रों में होटल और ढाबे पूरी तरह भर गए। युवाओं को अस्थायी रोज़गार मिला। यह आधार नई परियोजनाओं के लिए मज़बूत मंच बन गया, जिससे भविष्य में आय दोगुनी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

प्रमुख बुनियादी ढांचा और विकास परियोजनाएँ
मुख्यमंत्री धामी ने 500 करोड़ रुपये से अधिक की विकास योजनाओं की घोषणा की। ये परियोजनाएँ पर्यटन, कनेक्टिविटी और आजीविका से जुड़ी हैं। कुछ योजनाएँ इसी वर्ष शुरू होंगी, जबकि कुछ 2027 तक पूरी की जाएँगी।
पर्यटन अवसंरचना को बढ़ावा
पर्यटन क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। कुमाऊँ के ट्रेकिंग मार्गों के पास 200 इको-लॉज बनाने की घोषणा की गई है, जिनमें स्थानीय लकड़ी और सौर ऊर्जा का उपयोग होगा।
उत्तरायणी से जुड़े स्थलों और नज़दीकी झीलों को जोड़ने वाला नया पर्यटन सर्किट (150 करोड़ रुपये) भी घोषित किया गया। इसमें व्यू-पॉइंट, साफ रास्ते और सूचना केंद्र शामिल होंगे।
कारीगरों के लिए होमस्टे योजना भी लाई गई है, जिससे परिवार पर्यटकों को ठहरा सकेंगे और अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। अगले दो वर्षों में पर्यटकों की संख्या 30% तक बढ़ने का अनुमान है।
मुख्य बिंदु:
अल्मोड़ा में 50 इको-लॉज
पैदल ट्रेल का उन्नयन
मेले में सूचना व गाइड केंद्र
कनेक्टिविटी: सड़क और डिजिटल पहुँच
अल्मोड़ा में 40 किलोमीटर लंबे बायपास को मंज़ूरी दी गई है, जिससे यात्रा समय आधा हो जाएगा और मेले के दौरान जाम कम होगा।
डिजिटल कनेक्टिविटी के तहत 2026 के मध्य तक 100 ग्राम पंचायतों में हाई-स्पीड इंटरनेट पहुँचेगा। इससे मेले के व्यापारी ऑनलाइन बिक्री कर सकेंगे।
नदियों पर नए पुलों के लिए भी 20-20 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिससे सीमांत क्षेत्रों का सालभर संपर्क बना रहेगा।

कृषि और स्थानीय आजीविका पहल
किसानों के लिए मेले के आसपास नए खरीद केंद्र बनाए जाएँगे, जहाँ सीधे खरीद होगी। इसके लिए 100 करोड़ रुपये रखे गए हैं।
युवाओं के लिए बुनाई, जड़ी-बूटी खेती और प्रसंस्करण से जुड़े कौशल प्रशिक्षण शुरू होंगे, जिससे 5,000 से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा।
80 करोड़ रुपये की सिंचाई योजनाओं से बागवानी उत्पादन में 25% तक बढ़ोतरी का अनुमान है। कारीगरों के लिए मेले में स्थायी स्टॉल भी आरक्षित किए जाएँगे।
नीति और प्रशासनिक सुधार
मुख्यमंत्री ने मेले और विकास कार्यों के सुचारू संचालन के लिए नई व्यवस्थाएँ घोषित कीं।
मेला प्रबंधन सुधार
ऑनलाइन स्टॉल पंजीकरण
200 अतिरिक्त सुरक्षा कर्मी और सीसीटीवी
कचरा प्रबंधन के लिए ईको-बिन
खाद्य स्टॉलों की सख्त स्वास्थ्य जाँच
फंड आवंटन और पारदर्शिता
कुल 500 करोड़ राज्य बजट से
200 करोड़ केंद्र की योजनाओं से
40% पर्यटन, 30% सड़क, शेष कृषि व अन्य
खर्च की निगरानी के लिए ट्रैकिंग ऐप
सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के लिए ‘विकास’ का विज़न
सीमावर्ती गाँवों को प्राथमिकता दी जाएगी। सड़कों को चीन सीमा तक बेहतर बनाया जाएगा। दूरस्थ क्षेत्रों में सौर ऊर्जा से 10,000 घरों को बिजली देने का लक्ष्य 2027 तक रखा गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास का मतलब है—हर क्षेत्र, हर नागरिक तक सुविधाएँ पहुँचाना।
प्रतिक्रियाएँ और संभावित प्रभाव
घोषणाओं के बाद माहौल में उत्साह दिखा। उद्योग जगत ने निवेश की संभावनाएँ देखीं। अनुमान है कि 10,000 नए रोज़गार सृजित होंगे और लक्षित क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था में 15% तक वृद्धि होगी।
उद्योग जगत की राय
पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि नया सर्किट होटल उद्योग को नई ऊँचाई देगा। व्यापारी स्टॉल सुधारों से खुश हैं। श्रमिक संगठनों ने कौशल योजनाओं का स्वागत किया।

स्थानीय उम्मीदें और जवाबदेही
स्थानीय लोग चाहते हैं कि योजनाएँ जल्द ज़मीन पर उतरें। वे ऐप और बैठकों के ज़रिये प्रगति पर नज़र रखने को तैयार हैं।
पिछले विकास चक्रों से तुलना
पहले कार्यकालों में शिक्षा और बुनियादी सेवाओं पर ज़ोर था। अब कनेक्टिविटी, तकनीक और पर्यटन प्राथमिकता बने हैं। इस कार्यकाल में फंड आवंटन भी करीब 20% बढ़ा है।
उत्तरायणी के बाद उत्तराखंड का भविष्य
उत्तरायणी मेला 2026 आनंद और विकास के संकल्प का संगम बना। मुख्यमंत्री धामी ने परंपरा का सम्मान करते हुए भविष्य की ठोस रूपरेखा रखी। पर्यटन, सड़क और कृषि योजनाएँ राज्य में व्यापक बदलाव ला सकती हैं।

