Uttarakhand में चारधाम तीर्थस्थलों पर मोबाइल फोन और कैमरों पर प्रतिबंध: नए नियम और आध्यात्मिक प्रभाव
हिमालय की गोद में बसे चारधाम—बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री—जहां आस्था और प्रकृति का अद्भुत संगम होता है, वहां Uttarakhand सरकार ने तीर्थयात्रियों के लिए एक बड़ा बदलाव लागू किया है। वर्ष 2026 की चारधाम यात्रा से इन पवित्र स्थलों पर मोबाइल फोन और कैमरों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इस फैसले का उद्देश्य तीर्थस्थलों की पवित्रता बनाए रखना, बढ़ती भीड़ को बेहतर ढंग से नियंत्रित करना और यात्रियों को तकनीकी विचलनों से मुक्त कर गहरी आध्यात्मिक अनुभूति देना है। पिछले वर्ष ही 50 लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम पहुंचे थे, ऐसे में यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
आधिकारिक आदेश: चारधाम मोबाइल-कैमरा प्रतिबंध के नियम
यह प्रतिबंध चारों प्रमुख धामों के मुख्य मंदिर परिसरों और उनके आसपास के प्रमुख मार्गों पर लागू होगा।
तीर्थयात्री पार्किंग स्थल, बेस कैंप या अंतिम पड़ाव तक मोबाइल और कैमरा इस्तेमाल कर सकेंगे, लेकिन उसके आगे नहीं।
प्रवेश द्वारों पर सुरक्षा जांच होगी और सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लॉकर में जमा कराने होंगे।
प्रतिबंध का दायरा और प्रभावित क्षेत्र
बद्रीनाथ: मुख्य मंदिर परिसर और आसपास के रास्ते
केदारनाथ: सोनप्रयाग से आगे पैदल मार्ग, हेलिपैड क्षेत्र
गंगोत्री व यमुनोत्री: मंदिर क्षेत्र, नदी तट और पुल
सरकार का कहना है कि ये वही स्थान हैं जहां सबसे ज्यादा भीड़ और अव्यवस्था देखी जाती है। साथ ही, नाजुक हिमालयी पर्यावरण की रक्षा भी इस फैसले का एक कारण है।
लागू होने की समय-सीमा और नियमों का पालन
यह नियम 1 जनवरी 2026 से लागू हो चुका है।
अप्रैल तक सभी प्रमुख स्थलों पर:
मुफ्त/सशुल्क लॉकर
प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मी
स्पष्ट सूचना बोर्ड
पहली बार नियम तोड़ने पर चेतावनी, दोबारा उल्लंघन पर ₹500 तक जुर्माना या अस्थायी यात्रा प्रतिबंध लगाया जा सकता है।
सरकार का पक्ष: सुरक्षा, व्यवस्था और पवित्रता
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के अनुसार,
“तीर्थयात्री भगवान के दर्शन के लिए आते हैं, सोशल मीडिया के लिए नहीं।”
सरकार का मानना है कि सेल्फी और वीडियो के कारण पहले भी भीड़, अफरा-तफरी और दुर्घटनाएं हुई हैं। मोबाइल प्रतिबंध से:
दर्शन पंक्तियां सुचारु होंगी
अफवाह फैलाने वाले वीडियो रुकेंगे
शोर और प्रकाश प्रदूषण घटेगा
आधुनिक तीर्थयात्री पर प्रभाव
आज के दौर में यात्रा और तकनीक साथ चलते हैं, लेकिन चारधाम में यह बदलाव यात्रियों को पूरी तरह वर्तमान में जीने का अवसर देता है।
मोबाइल जमा करने के बाद:
मंत्रों और घंटियों की आवाज़ ज्यादा महसूस होती है
ध्यान भटकता नहीं
श्रद्धा और एकाग्रता बढ़ती है
2025 के सर्वे में 70% यात्रियों ने माना कि वे यात्रा के दौरान कम तकनीकी हस्तक्षेप चाहते हैं।
कुछ व्यावहारिक चुनौतियां
पीक सीजन में लॉकर जल्दी भर सकते हैं
विदेशी यात्रियों को भाषा संबंधी दिक्कत
जांच के कारण 10–15 मिनट की देरी
हालांकि सरकार इन समस्याओं को कम करने के लिए स्टाफ और सुविधाएं बढ़ा रही है।
आपात स्थिति और परिवारों की चिंता
आपातकाल के लिए:
मंदिर परिसर के बाहर हेल्प डेस्क
मेडिकल टीमों के पास सैटेलाइट फोन
तय मिलन स्थल (Meeting Points)
परिवारों को सलाह दी गई है कि यात्रा से पहले पूरी योजना साझा करें।
सुरक्षा और गोपनीयता के फायदे
अनधिकृत रिकॉर्डिंग पर रोक
महिलाओं और बुजुर्गों की निजता सुरक्षित
संदिग्ध गतिविधियों में 30% तक कमी (प्रारंभिक रिपोर्ट)
विश्व के अन्य धार्मिक स्थलों से तुलना
मक्का (काबा): कैमरा प्रतिबंध
वेटिकन: सीमित मोबाइल उपयोग
यरुशलम: पवित्र कक्षों में तकनीक निषेध
चारधाम का फैसला इसी वैश्विक परंपरा की कड़ी माना जा रहा है।
प्रतिक्रियाएं: पुजारी, विशेषज्ञ और आम लोग
पुजारी वर्ग:
“यह मूल परंपराओं की ओर वापसी है।”
पर्यटन उद्योग:
अब इसे “डिजिटल डिटॉक्स यात्रा” के रूप में प्रचारित किया जा रहा है।
सोशल मीडिया:
करीब 65% लोग फैसले के पक्ष में हैं, बाकी फोटो न ले पाने को लेकर निराश।
बिना मोबाइल चारधाम यात्रा की तैयारी (उपयोगी सुझाव)
इलेक्ट्रॉनिक्स की जगह क्या रखें
कागज़ी नक्शे और यात्रा गाइड
नोटबुक और पेन
आपात संपर्क कार्ड
पर्याप्त गर्म कपड़े और पानी
समूह यात्रा के लिए योजना
पहले से मिलने के स्थान तय करें
होटल के लैंडलाइन नंबर नोट करें
एक “समन्वयक” तय करें
डिजिटल डिटॉक्स को अपनाएं
इसे प्रतिबंध नहीं, अवसर मानें।
मोबाइल से दूर रहकर:
मन शांत होता है
ध्यान गहरा होता है
यादें दिल में बसती हैं, गैलरी में नहीं
डिजिटल युग में परंपरा की रक्षा
चारधाम में मोबाइल और कैमरा प्रतिबंध श्रद्धा, सुरक्षा और शांति को प्राथमिकता देता है। कुछ असुविधाओं के बावजूद यह फैसला तीर्थयात्रा को अधिक सार्थक और आत्मिक बनाता है।
Uttarakhand ने यह संदेश दिया है कि तकनीक जरूरी है, लेकिन आस्था से ऊपर नहीं।
चारधाम जाइए—बिना स्क्रीन, पूरे मन से। वहीं आपको असली दिव्यता मिलेगी।
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