Vladimir पुतिन का सख्त संदेश ट्रम्प को? रूस की 8,700 मील रेंज वाली परमाणु मिसाइल ने बढ़ाई वैश्विक चिंता
कल्पना कीजिए — एक ऐसी मिसाइल जो मॉस्को से न्यूयॉर्क तक सिर्फ 30 मिनट से भी कम समय में पहुँच सकती है। यही हकीकत अब रूस ने दिखा दी है अपनी नई परमाणु परीक्षण के ज़रिए। इस कदम ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है — क्या यह व्लादिमीर पुतिन का डोनाल्ड ट्रम्प और पश्चिमी देशों को चेतावनी है?
रूस द्वारा 8,700 मील (करीब 14,000 किमी) रेंज वाली अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के सफल परीक्षण की घोषणा ने वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह सिर्फ तकनीकी उपलब्धि नहीं है — यह शक्ति संतुलन को झकझोरने वाला कदम है। अमेरिका और नाटो इसे सीधे चुनौती के रूप में देख रहे हैं। आइए जानें यह मिसाइल क्या कर सकती है, क्यों यह समय खास मायने रखता है, और इससे दुनिया की राजनीति में क्या बदलाव आ सकते हैं।
रूस का नया सुपरवपन: सारमत (RS-28) मिसाइल की पूरी जानकारी
रूस की RS-28 सारमत (Sarmat) मिसाइल को “शैतान 2” (Satan-2) के नाम से भी जाना जाता है। यह रूस के परमाणु भंडार की सबसे घातक मिसाइलों में से एक मानी जाती है। अधिकारियों का दावा है कि इस परीक्षण ने इसकी “पूर्ण क्षमता” को साबित कर दिया है।
यह एक “सुपर हेवी ICBM” है — यानी यह भारी मात्रा में परमाणु हथियार एक साथ लेकर बहुत दूर तक जा सकती है।
ICBM रेंज और क्षमता
सारमत की अधिकतम रेंज लगभग 8,700 मील (11,000 किमी) बताई जा रही है। इसका मतलब है कि यह रूस से चलकर अमेरिका, यूरोप और एशिया के लगभग हर बड़े शहर तक पहुँच सकती है।
उदाहरण के तौर पर — वॉशिंगटन डी.सी., लंदन, पेरिस, लॉस एंजिलिस सभी इसकी पहुंच में हैं।
इस मिसाइल की रफ्तार 15,000 मील प्रति घंटा से ज़्यादा है। इसे साधारण शब्दों में कहें तो यह “आधी दुनिया पार करने वाली गोली” है।
रूस ने इसके कुछ परीक्षण आर्कटिक मार्ग से भी किए हैं, ताकि यह पश्चिमी रडार सिस्टम से बच सके।

डुअल पेलोड और उन्नत तकनीक
सारमत की सबसे खतरनाक विशेषता इसका MIRV सिस्टम (Multiple Independently Targetable Reentry Vehicles) है।
इसका मतलब — यह एक साथ 10 तक परमाणु वारहेड छोड़ सकती है, और हर वारहेड अलग लक्ष्य को निशाना बना सकता है।
इसके अलावा इसमें “डिकॉय सिस्टम” हैं जो दुश्मन के रडार को भ्रमित कर देते हैं।
वर्तमान में कोई भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम इसे पूरी तरह रोक नहीं सकता।
यह तरल ईंधन से चलती है, जो इसे तेज़ लॉन्च क्षमता देता है।
परीक्षण का समय और उद्देश्य
यह परीक्षण 2023 के अंत में रूस के प्लेस्त्स्क (Plesetsk) लॉन्च सेंटर से किया गया। मिसाइल ने प्रशांत महासागर में गिरकर परीक्षण पूरा किया।
रूस ने इसे “सामान्य रूटीन जांच” बताया, लेकिन इसका समय बहुत कुछ कहता है —
यह तब हुआ जब यूक्रेन युद्ध और अमेरिकी चुनाव चर्चा में थे।
पुतिन ने खुद इस परीक्षण को “सफल और ऐतिहासिक” बताया। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह एक “शक्ति प्रदर्शन” था — अमेरिका और नाटो को दिखाने के लिए कि रूस किसी भी हाल में पीछे नहीं हटेगा।
पुतिन का संदेश ट्रम्प और पश्चिमी देशों को?
क्या यह पुतिन का ट्रम्प को अप्रत्यक्ष संदेश था? कई विश्लेषक कहते हैं — हाँ।
क्योंकि ट्रम्प ने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल में पुतिन की तारीफें भी की थीं, और नाटो देशों की आलोचना भी। अब जब ट्रम्प फिर से चुनावी दौड़ में हैं, यह मिसाइल परीक्षण एक “रिमाइंडर” हो सकता है कि रूस अभी भी ताकतवर है।
नाटो और यूरोपीय सुरक्षा पर असर
नाटो देशों, खासकर पोलैंड, एस्टोनिया और लातविया, ने इस परीक्षण के बाद अलर्ट बढ़ा दिया है।
कई देश अब अपने रक्षा बजट बढ़ाने की तैयारी में हैं।
जर्मनी ने पहले ही कहा है कि वह “रक्षा खर्च को दोगुना” करेगा।
फ्रांस अपने “स्वतंत्र परमाणु कार्यक्रम” पर जोर दे रहा है।
यह सब दिखाता है कि रूस के इस कदम से यूरोप में हथियारों की नई दौड़ शुरू हो सकती है।

चीन और अन्य वैश्विक प्रतिक्रियाएँ
चीन ने आधिकारिक प्रतिक्रिया तो नहीं दी, लेकिन उसकी निगाहें इस पर टिकी हैं।
चीन और रूस के बीच सैन्य सहयोग पहले से गहरा हो चुका है — अब दोनों इस मौके को “अमेरिका-विरोधी रणनीति” में बदल सकते हैं।
भारत ने शांति की अपील की, लेकिन साथ ही अपने मिसाइल परीक्षण कार्यक्रम को भी जारी रखा।
ईरान और उत्तर कोरिया ने रूस की तारीफ की, और इसे “अमेरिकी दबाव के खिलाफ प्रतीक” बताया।
नाभिकीय शक्ति संतुलन में बदलाव
इस परीक्षण से दुनिया का न्यूक्लियर डिटरेंस (Nuclear Deterrence) संतुलन बदल सकता है।
रूस की यह मिसाइल “सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी” यानी प्रत्युत्तर हमले में बेहद कारगर है।
अगर रूस पर पहला हमला भी हो जाए, तो वह इतनी तेज़ी से जवाब दे सकता है कि दुश्मन को भारी नुकसान उठाना पड़े।
यह सिद्धांत ही परमाणु युद्ध रोकने की नींव है — “अगर सभी को पता है कि पलटवार होगा, तो कोई पहले हमला नहीं करेगा।”
हथियार नियंत्रण समझौतों पर असर
New START Treaty, जो अमेरिका और रूस के बीच परमाणु हथियारों को सीमित करता है, अब खतरे में है।
यह परीक्षण उस समझौते की सीमाओं को चुनौती देता है।
रूस पहले ही कुछ पुराने समझौतों से हट चुका है, यह कहकर कि अमेरिका “दोहरा मापदंड” अपना रहा है।
अगर नए नियम नहीं बने, तो दुनिया नए परमाणु शीत युद्ध (New Cold War) की ओर बढ़ सकती है।
अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली पर सवाल
अमेरिका की THAAD और GMD रक्षा प्रणालियाँ इतनी तेज़ और बहु-वारहेड मिसाइलों के सामने कमजोर साबित हो रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका को इसे रोकने के लिए स्पेस-बेस्ड डिफेंस या नई तकनीक पर अरबों डॉलर खर्च करने होंगे।

कूटनीति की संभावना
इतिहास बताता है — जब हथियारों की दौड़ बढ़ती है, तो बातचीत की मेज भी सजती है।
पुतिन इस शक्ति प्रदर्शन का उपयोग भविष्य की वार्ताओं में अपनी शर्तें मनवाने के लिए कर सकते हैं, खासकर यूक्रेन और नाटो विस्तार के मुद्दे पर।
जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज़ ने बातचीत की अपील की है, लेकिन अमेरिका और रूस दोनों की “अहंकार की दीवार” अभी भी ऊँची है।
आगे के कदम और सीख
रूस का यह सारमत मिसाइल परीक्षण सिर्फ एक सैन्य प्रयोग नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति प्रदर्शन है।
इसकी 8,700 मील की रेंज और मल्टी-वारहेड तकनीक दुनिया के हर नेता के लिए चेतावनी है।
यह घटना दिखाती है कि परमाणु युग अब भी ज़िंदा है — और पहले से कहीं ज़्यादा खतरनाक।
शांति के लिए संवाद और सहयोग अब पहले से ज़्यादा जरूरी हो गया है।
मुख्य बिंदु
रूस की RS-28 Sarmat मिसाइल अब दुनिया की सबसे घातक ICBMs में से एक है।
परीक्षण का समय दर्शाता है कि यह ट्रम्प और नाटो को संदेश देने का तरीका भी हो सकता है।
यह कदम नए हथियारों की दौड़ और कूटनीतिक संकट की शुरुआत बन सकता है।
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