west एशिया संघर्ष के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा रणनीति की समीक्षा
west एशिया में बढ़ते संघर्ष ने वैश्विक बाजारों को झकझोर दिया है। कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल आया है, जिससे भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। इसी स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 मार्च 2026 को एक उच्च-स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें ऊर्जा, वित्त और विदेश मंत्रालय के शीर्ष अधिकारी शामिल हुए।
यह सिर्फ तेल की बात नहीं है—यह देश की अर्थव्यवस्था, उद्योगों और आम जनता की जेब से जुड़ा मुद्दा है।
west एशिया संकट का भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर असर
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल west एशिया से आयात करता है। ऐसे में वहां का कोई भी तनाव सीधे भारत को प्रभावित करता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल (Brent & WTI)
- ब्रेंट क्रूड की कीमत मार्च 2026 में 15% बढ़ी
- WTI क्रूड $90 प्रति बैरल के पार पहुंचा
इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ सकता है और पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।
समुद्री मार्गों पर खतरा
मुख्य तेल मार्ग जैसे:
- हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य
- बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य
इन पर खतरा बढ़ गया है। अगर ये मार्ग बाधित होते हैं, तो आपूर्ति में भारी देरी और लागत में वृद्धि हो सकती है।
LNG (प्राकृतिक गैस) पर असर
भारत अपनी लगभग 40% LNG जरूरत कतर से पूरी करता है।
संघर्ष के कारण LNG की कीमतों में 25% तक उछाल आया है, जिससे बिजली उत्पादन और उद्योग प्रभावित हो सकते हैं।

सरकार की त्वरित कार्रवाई
बैठक के बाद सरकार ने कई अहम फैसले लिए:
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार (SPR)
भारत के पास लगभग 10 दिन का तेल भंडार है।
सरकार जरूरत पड़ने पर इसका उपयोग करेगी और इसे बढ़ाने की योजना बना रही है।
कूटनीतिक प्रयास
भारत ने:
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- इराक
जैसे देशों से तेल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बातचीत तेज की है।
उपभोक्ताओं को राहत
- पेट्रोल-डीजल पर टैक्स कम किया जा सकता है
- LPG पर सब्सिडी बढ़ सकती है
- किसानों और छोटे व्यवसायों को सहायता
दीर्घकालिक रणनीति: आयात विविधीकरण
भारत अब केवल मध्य पूर्व पर निर्भर नहीं रहना चाहता।
नए आपूर्ति स्रोत
- संयुक्त राज्य अमेरिका
- गुयाना
- नाइजीरिया
से तेल आयात बढ़ाने की योजना है।
रिफाइनरी क्षमता बढ़ाना
जामनगर जैसी रिफाइनरियां अब अलग-अलग प्रकार के कच्चे तेल को प्रोसेस करने में सक्षम हो रही हैं।
2028 तक क्षमता में 20% वृद्धि का लक्ष्य है।
रुपये में व्यापार
भारत अब कुछ देशों के साथ डॉलर के बजाय रुपये में तेल व्यापार कर रहा है।
इससे विदेशी मुद्रा पर दबाव कम होगा।
वैकल्पिक ऊर्जा और घरेलू उत्पादन
घरेलू तेल और गैस उत्पादन
ONGC जैसी कंपनियों को नए ब्लॉक्स दिए जा रहे हैं।
लक्ष्य: अगले 2 वर्षों में उत्पादन 15% बढ़ाना।
नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर
भारत 2030 तक 500 GW नवीकरणीय ऊर्जा का लक्ष्य रख रहा है:
- सौर ऊर्जा
- पवन ऊर्जा
- ग्रीन हाइड्रोजन
यह आयात निर्भरता कम करने में मदद करेगा।
उद्योगों के लिए स्टॉक नियम
अब कंपनियों को 21 दिनों का ईंधन स्टॉक रखना होगा, ताकि संकट में उत्पादन न रुके।
west एशिया का संघर्ष भारत के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन नरेंद्र मोदी की अगुवाई में बनाई गई रणनीति इस संकट से निपटने के लिए मजबूत आधार देती है।
मुख्य बातें:
- रणनीतिक भंडार का समझदारी से उपयोग
- नए देशों से तेल आयात बढ़ाना
- नवीकरणीय ऊर्जा और घरेलू उत्पादन को तेज करना
भारत अब सिर्फ संकट से बचने की कोशिश नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य के लिए खुद को और मजबूत बना रहा है।
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