चुनावी विजय और दक्षिण एशियाई राजनीति में बड़ा बदलाव
Bangladesh में बीएनपी की ऐतिहासिक जीत 12 फ़रवरी 2026 को हुई संसदीय चुनावों में सामने आई है। इस चुनाव में बीएनपी ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया और वह लगभग दो दशकों के बाद सत्ता में लौट रही है। इसके परिणामस्वरूप तारिक रहमान संभवतः देश के अगले प्रधानमंत्री होंगे। इस ऐतिहासिक बदलाव के बीच भारत-बांग्लादेश संबंधों की दिशा पर भी सवाल उठे हैं, खासकर यह देखते हुए कि बीएनपी की विदेश नीति परंपरागत तौर पर पूर्व प्रधानमंत्री **Sheikh Hasina के नेतृत्व वाली नीति से थोड़ी भिन्न रही है।
इस सन्दर्भ में यह जानना महत्वपूर्ण है कि बीएनपी के नेतृत्व में भारत के बारे में क्या बयान आए हैं, और दो प्रमुख बिंदु सामने आए हैं:
बीएनपी ने भारत के प्रधान मंत्री के संदेश का स्वागत किया,
बीएनपी ने भारत-Bangladesh रिश्तों को पुनः मजबूती से आगे बढ़ाने की आशा जताई है।
भारत-बीएनपी संवाद का प्रारंभ: बधाई पर प्रतिक्रिया
जब भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi ने रहमान को चुनाव जीतने पर बधाई दी, तब बीएनपी के वरिष्ठ नेता Nazrul Islam Khan ने स्पष्ट तौर पर प्रतिक्रिया दी और कहा कि:
बीएनपी भारत के प्रधानमंत्री मोदी को उनके संदेश के लिए धन्यवाद देती है,
और हम मानते हैं कि तारिक रहमान के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच संबंध और भी मजबूत होंगे।
यह बयान महत्वपूर्ण है क्योंकि बीएनपी कभी एक ऐसी पार्टी रही है जिस पर भारत-विशेष रूप से दक्षिण एशिया में भारत के साथ संबंधों को लेकर विरोधाभासी विचारधाराएँ रही हैं। पिछली BNP सरकारों की नीतियाँ अक्सर अधिक राष्ट्रीयवादी और “Bangladesh फर्स्ट” रुख पर आधारित रही हैं, जिसमें पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाने की कोशिश की जाती थी।
यह बयान दो बातों को दर्शाता है:

(क) BNP न तो भारत के साथ मौजूदा रिश्तों को तोड़ना चाहती है, और
(ख) वह दोनों देशों के बीच सहयोग और विश्वास को आगे बढ़ाने की इच्छा रखती है।
“बीएनपी का भारत-Bangladesh संबंध” — बदलता रुख
बीएनपी की विदेश नीति को लेकर विशेषज्ञों के बीच बातचीत में जो बातें सामने आई हैं, वे इस तरह से वर्गीकृत की जा सकती हैं:
1. “Bangladesh फर्स्ट, फिर सहयोग”
बीएनपी ने चुनावी प्रचार से पहले और बाद में एक नीति पेश की है जिसे कुछ समीक्षक “Bangladesh First” कहा करते हैं। इस नीति के मूल में यह विचार होता है कि बांग्लादेश की राष्ट्रीय स्वायत्तता अधिक महत्व रखती है, और विदेश नीति मुख्यतः देश के हितों के अनुसार होनी चाहिए। इस रुख में भारत के साथ सहयोग तो जारी रहेगा, लेकिन वह समान सम्मान और पारस्परिक लाभ के आधार पर होगा — न कि किसी एक पक्ष के दबाव या एकतरफ़ा लाभ पर आधारित।
यह रुख बहुत दूर किसी “विरोधी” नीति से नहीं है, पर यह स्पष्ट संकेत देता है कि बीएनपी चाहती है कि भारत के साथ रिश्तों में भरोसा, बराबरी और साझा हित हमेशा प्राथमिकता हों।
भारत के संदेश का स्वागत और उसके प्रभाव
भारत के प्रधानमंत्री मोदी ने रहमान को बधाई देते हुए जो बातें कहीं, वे बीएनपी के लिए एक लोकतांत्रिक और सकारात्मक संकेत थीं:
मोदी ने कहा कि यह जीत Bangladesh के लोगों के नेतृत्व पर भरोसा दर्शाती है,
भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश का समर्थन जारी रखेगा,
भारत और बांग्लादेश के बीच बहुपक्षीय (multifaceted) संबंधों को मजबूत करना भारत की प्राथमिकता है।
इन बिन्दुओं से बीएनपी ने उत्साहजनक प्रतिक्रिया दी, क्योंकि यह स्पष्ट रूप से बताता है कि भारत बीएनपी को लोकतांत्रिक नेतृत्व के रूप में स्वीकार कर रहा है, और वह आगे सहयोग की उम्मीद रखता है।
बीएनपी ने भी इस संदेश को सकारात्मक रूप में लिया और कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत रिश्तों को बढ़ाने की आशा है, खासकर विकास लक्ष्यों, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक सहयोग के क्षेत्र में।
रणनीतिक अवसर और चुनौतियाँ
बीएनपी की जीत ने दक्षिण एशिया के राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। भारत के लिए यह:
एक अवसर है — क्योंकि बांग्लादेश के साथ सहयोग के ढांचे को नई शुरुआत दी जा सकती है,
एक चुनौती भी है — क्योंकि बीएनपी की नीति पारंपरिक रूप से अधिक राष्ट्रीयवादी रही है और भारत से अलग सोच सकती है।
सीमाएं और साझा हित
बीएनपी ने भारत के साथ “समान सम्मान, समझ और बराबरी” के आधार पर रिश्ते बनाए रखने की बात कही है। इसका मतलब यह है कि दोनों देश:
आर्थिक सहयोग को और बढ़ा सकते हैं,
सीमा सुरक्षा, व्यापार, जल संसाधन (जैसे तीस्ता नदी जल समझौता) जैसे मुद्दों पर बातचीत जारी रख सकते हैं,
स्थानीय प्रशासन, ऊर्जा, शिक्षा, सांस्कृतिक साझेदारी जैसे क्षेत्रों में सहयोग कर सकते हैं।
ये पहल सिर्फ औपचारिक कूटनीति नहीं हैं, बल्कि दीर्घकालिक साझेदारी की दिशा में कदम हैं।
पिछली नीतिगत मुद्दों पर राय
बीएनपी के भारत के बारे में बयान हमेशा उतने सीधे सकारात्मक नहीं रहे हैं। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि बीएनपी के घोषणापत्र में भारत का विशिष्ट उल्लेख नहीं है, परंतु पार्टी ने यह कहा है कि Bangladesh के हितों को सर्वोपरि रखना है। यह नीति कुछ समय पहले “Delhi, Pindi नहीं — सिर्फ Bangladesh First” के नारों में स्पष्ट हुई थी, जिसका मकसद यह दिखाना था कि पार्टियाँ किसी भी पड़ोसी दबाव के आगे समर्पण नहीं करेंगे।
हालांकि अभी के चुनाव बाद बीएनपी ने यह स्पष्ट किया है कि भारत के साथ संबंधों के प्रति कोई द्वेश नहीं है, बल्कि वह साझा हितों और सम्मान के आधार पर काम करना पसंद करेगी।
भविष्य के संकेत: रिश्तों की नई दिशा?
बीएनपी की जीत के बाद:
भारत ने भरोसा जताया है कि वह बांग्लादेश के लोकतांत्रिक बदलाव का समर्थन करेगा और सहयोग जारी रखेगा।
बीएनपी ने प्रभावी तौर पर संकेत दिया है कि वह दोनों देशों के बीच संबंधों को सकारात्मक रूप से बढ़ावा देना चाहती है।
बीएनपी की विदेश नीति सोच अधिक “समान सम्मान और साझेदारी” पर आधारित है, जो पारंपरिक दक्षिण एशियाई राजनीति में बदलाव को दर्शाती है और यह भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए लाभदायक हो सकता है।
Tarique Rahman की जीत के बाद बीएनपी ने भारत के प्रति अपना रुख स्पष्ट किया है:
भारत के प्रधानमंत्री के संदेश का स्वागत किया है,
दोनों देशों के संबंधों को और मज़बूत करने की आशा जताई है,
समान सम्मान, साझेदारी और पारस्परिक हितों के आधार पर भविष्य की कूटनीति को प्राथमिकता दी है।
यह भारत-Bangladesh रिश्तों में एक सकारात्मक चरण है — जहाँ दोनों देशों के बीच सहयोग जारी रहेगा, लेकिन वह अब अधिक सम्मानजनक और साझा हितों पर आधारित रणनीति के साथ आगे बढ़ने का संकेत दे रहा है।
विपक्ष LokSabha अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तैयार कर रहा है।
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