Bihar की सियासत फिर गरमाई
2025 के विधानसभा चुनावों से पहले Bihar का राजनीतिक माहौल एक बार फिर सुलग रहा है।
2020 में एनडीए (NDA) ने महागठबंधन को बेहद मामूली अंतर से हराया था।
अब नए समीकरणों में प्रशांत किशोर की एंट्री ने मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है।
अनुभव, युवाशक्ति और रणनीति — तीनों का संग्राम तय है।
रोज़गार, जाति समीकरण और सुशासन ही इस चुनाव की धुरी होंगे।
Bihar का डांवाडोल राजनीतिक संतुलन
एनडीए (भाजपा + जदयू) सत्ता में है, लेकिन अंदरूनी दरारें गहरी हैं।
नीतीश कुमार के बार-बार पाला बदलने से भरोसा कमज़ोर हुआ है।
दूसरी ओर, महागठबंधन / INDIA ब्लॉक (राजद, कांग्रेस, वामदल) सत्ता परिवर्तन का सपना देख रहा है।
गांवों में बाढ़ और पलायन की नाराज़गी है, शहरों में नौकरी और विकास की मांग बढ़ रही है।
मुख्य खिलाड़ी: बुजुर्ग अनुभव बनाम युवा चेहरा
नीतीश कुमार — अनुभवी नेता, गठबंधन राजनीति के माहिर।
तेजस्वी यादव — युवा चेहरा, बेरोज़गार युवाओं की उम्मीद।
प्रशांत किशोर (PK) — चुनावी रणनीतिकार से नेता बने, ‘जन सुराज’ आंदोलन के जरिए नई राह।
तीनों बिहार की आत्मा के लिए लड़ रहे हैं — स्थिरता, सामाजिक न्याय या साहसिक बदलाव।
नीतीश कुमार: सातवीं पारी का सपना
जदयू की हालत कमजोर है, 2020 में सिर्फ 43 सीटें मिली थीं।
एक समय महादलित और ईबीसी (EBC) उनका मज़बूत वोट बैंक थे, अब भाजपा उन्हें खींच रही है।
एनडीए में रहना केंद्र से धन लाता है, लेकिन स्वतंत्र छवि कमजोर करता है।
‘सात निश्चय’ योजनाओं ने असर तो डाला, पर अब डिलीवरी पर सवाल हैं।
अगर एंटी-इन्कम्बेंसी (anti-incumbency) बढ़ी, तो नीतीश को मुश्किल हो सकती है।
तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की अग्निपरीक्षा
तेजस्वी यादव (राजद) अब पूर्ण रूप से पार्टी के चेहरा हैं।
उनकी रैलियों में युवा उमड़ रहे हैं, जो बदलाव चाहते हैं।
राजद का पारंपरिक MY समीकरण (मुस्लिम + यादव) अब भी मजबूत है, पर नए वोट जोड़ना चुनौती है।
महागठबंधन में सीट बंटवारे की खींचतान भी चिंता का विषय है।
यदि एंटी-इन्कम्बेंसी लहर चली और विपक्ष एकजुट रहा — तेजस्वी को बढ़त मिल सकती है।

प्रशांत किशोर: ‘जन सुराज’ की नई लहर
पीके अब मैदान में हैं — नेता के रूप में, न कि रणनीतिकार के रूप में।
उन्होंने पैदल यात्रा कर 240 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया है।
उनकी अपील युवाओं, शिक्षित वर्ग और उच्च जातियों में दिख रही है।
हालांकि अभी उनका वोट शेयर 5–10% के बीच माना जा रहा है,
पर यह “किंगमेकर या वोटकटुआ” दोनों भूमिकाओं में असर डाल सकता है।
अगर उन्होंने अकेले चुनाव लड़ा, तो विपक्ष का वोट कट सकता है।
पर INDIA ब्लॉक से गठबंधन किया, तो समीकरण पूरी तरह बदल जाएगा।
मौजूदा सर्वेक्षण और विशेषज्ञों की राय
2024 के सीवोटर (CVoter) सर्वे के मुताबिक:
NDA: 48%
INDIA (महागठबंधन): 42%
अन्य (जन सुराज आदि): 10%
अर्थात मुकाबला बेहद नजदीकी है — कुछ सीटों के अंतर से सरकार बन सकती है।
विश्लेषक कहते हैं:
अशोक कुमार (थिंक टैंक): “नीतीश के पास शासन का अनुभव है, पर तेजस्वी के पास युवा जोश।”
योगेंद्र यादव: “जन सुराज वोटों को बांटेगा, जिससे नतीजा अनिश्चित रहेगा।”
प्रशांत किशोर खुद कहते हैं — “यह चुनाव पिछले सभी से ज़्यादा करीबी होगा।”

मतदाताओं का मूड: जाति बनाम विकास
63% मतदाता रोज़गार को सबसे अहम मुद्दा मानते हैं।
ईबीसी और महादलित वर्ग निर्णायक भूमिका में हैं।
शहरी मतदाता अब विकास को जाति से ऊपर रख रहे हैं।
प्रवासी मजदूरों की वापसी भी परिणाम तय कर सकती है।
अंतिम समीकरण: कौन जीतेगा बिहार 2025?
| नेता | ताकत | कमजोरियां | अनुमान |
|---|---|---|---|
| नीतीश कुमार (NDA) | अनुभव, प्रशासनिक छवि | पाला बदलना, थकान | हल्की बढ़त पर टिका |
| तेजस्वी यादव (INDIA) | युवा ऊर्जा, एंटी-इन्कम्बेंसी | असंगठित गठबंधन | नजदीकी मुकाबला |
| प्रशांत किशोर (जन सुराज) | नई सोच, रणनीति | संगठन की कमी | वोट काटने वाला तत्व |

संभावना:
मुकाबला 50–50 है।
अंतिम नतीजा इस बात पर निर्भर करेगा कि —
जन सुराज किससे गठबंधन करता है,
युवा वर्ग किसे भरोसा देता है,
और चुनाव के आख़िरी हफ्ते में कौन कहानी बदलता है।
गठबंधन समीकरण पर नज़र रखें — यही निर्णायक होगा।
युवाओं का वोट (40% आबादी) इस बार निर्णायक भूमिका में रहेगा।
जाति बनाम विकास की जंग जारी है।
जन सुराज की भूमिका अप्रत्याशित हो सकती है।
अंतिम परिणाम कुछ ही सीटों से तय होगा।
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