बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच रोहिणी आचार्य के बयान से RJD में अंदरूनी कलह के संकेत
बिहार की राजनीति में हलचल मच गई है। विधानसभा चुनाव की धूल फोड़ने की तैयारियां चल रही हैं, तभी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सरगना लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक ऐसा बयान दिया जो पार्टी के अंदर की खिचड़ी उजागर कर रहा है। उनके सोशल मीडिया पोस्ट ने सवाल खड़े कर दिए हैं – क्या यह महज परिवार की नाराजगी है या पार्टी की नींव हिलाने वाली बात?
रोहिणी आचार्य, जो सिंगापुर से भारत की सियासत पर नजर रखती हैं, ने हाल ही में फेसबुक पर पोस्ट किया। इसमें उन्होंने RJD की कुछ नीतियों और नेतृत्व पर सवाल उठाए। यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारी के बीच आया, जब महागठबंधन अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटा है। क्या यह बयान RJD की एकजुटता को तोड़ देगा? आइए, इसकी पूरी परतें खोलें।
रोहिणी आचार्य का बयान: क्या कहा और क्यों महत्वपूर्ण-Lalu
रोहिणी आचार्य का बयान RJD के लिए एक झटका साबित हो रहा है। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में पार्टी के कुछ फैसलों पर नाराजगी जताई, खासकर उम्मीदवार चयन और गठबंधन की रणनीति पर। “पार्टी को मजबूत बनाने के लिए बदलाव जरूरी है,” जैसा उन्होंने लिखा, यह शब्द बिहार चुनावों के संदर्भ में गंभीर हैं।
बयान का पूरा विवरण
रोहिणी ने 15 अक्टूबर 2023 को एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने कहा कि RJD में पुरानी सोच हावी हो रही है। यह पोस्ट लालू प्रसाद की स्वास्थ्य स्थिति और तेजस्वी यादव के नेतृत्व से जुड़ी लगती है। चुनावी मौसम में ऐसा बयान पार्टी की इमेज को नुकसान पहुंचा सकता है, क्योंकि वोटर एकजुट दल को पसंद करते हैं। पोस्ट में उन्होंने महिलाओं और युवाओं की भागीदारी पर जोर दिया, जो बिहार की जनता के मुद्दों से जुड़ता है।
यह बयान महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि रोहिणी परिवार का हिस्सा हैं। उनके भाई तेजस्वी यादव RJD के चेहरे हैं। अगर परिवार में ही मतभेद दिखे, तो कार्यकर्ता कैसे एकजुट रहें? सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हो गई, हजारों लाइक्स और शेयर मिले।
बयान के पीछे का संदर्भ-Lalu
रोहिणी का यह बयान Lalu प्रसाद की लंबी बीमारी के बाद आया। लालू दिल्ली के अस्पताल में हैं, और पार्टी का संचालन तेजस्वी पर निर्भर है। परिवार की राजनीति में रोहिणी पहले भी सक्रिय रही हैं, जैसे 2020 चुनावों के दौरान। लेकिन इस बार, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की दहलीज पर खड़े होने से यह ज्यादा गूंज रहा है। क्या यह पारिवारिक बहस है या पार्टी की कमजोरी? संदर्भ साफ है – RJD को मजबूत करने की कोशिश।

मीडिया और सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया
मीडिया ने इसे तुरंत कवर किया। एबीपी न्यूज और इंडिया टुडे ने हेडलाइंस बनाईं – “RJD में परिवारिक फूट?” ट्विटर पर #RohiniAcharya और #RJDKalah ट्रेंडिंग रहा। यूजर्स ने बहस छेड़ी, कुछ ने रोहिणी की हिम्मत की तारीफ की तो कुछ ने इसे चुनावी ड्रामा कहा। फेसबुक पर RJD समर्थक बंट गए, जो पार्टी की एकता के लिए खतरा है।
RJD में अंदरूनी कलह के संकेत: ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य-Lalu
RJD का इतिहास आंतरिक झगड़ों से भरा है। रोहिणी के बयान ने पुरानी घावों को कुरेद दिया। बिहार चुनावों की तैयारी में यह कलह बाधा बन सकता है, क्योंकि वोटर मजबूत छवि देखते हैं।
RJD के इतिहास में आंतरिक विवाद
पार्टी की स्थापना 1997 में हुई, लेकिन विवाद हमेशा रहे। 2015 विधानसभा चुनाव में Lalu के बेटे तेज प्रताप और तेजस्वी के बीच टेंशन की खबरें आईं। 2020 में भी, नीतीश कुमार से गठबंधन टूटने के पीछे आंतरिक असहमति थी। Lalu के चारा घोटाले के बाद पार्टी बिखरी, लेकिन यादव परिवार ने संभाला। रोहिणी का बयान इन्हीं पुरानी दरारों को जोड़ता है।
ऐसे विवादों ने हमेशा चुनावी नुकसान दिया। उदाहरण के तौर पर, 2005 चुनाव में आंतरिक कलह से RJD सत्ता से बाहर हुई। अब 2025 के लिए, यह पैटर्न दोहरा सकता है।
रोहिणी के बयान का तत्काल प्रभाव
पार्टी नेताओं ने चुप्पी साधी, लेकिन कुछ विधायकों ने प्राइवेट में नाराजगी जताई। तेजस्वी ने सोशल मीडिया पर जवाब नहीं दिया, जो चिंता बढ़ाता है। कार्यकर्ताओं में असमंजस है – कुछ रोहिणी के साथ हैं, तो कुछ परिवार की एकता चाहते हैं। यह कलह सीट शेयरिंग को प्रभावित कर सकती है।
परिवार बनाम पार्टी: यादव परिवार की भूमिका
यादव परिवार RJD का केंद्र है। Lalu ने इसे मजबूत बनाया, लेकिन अब रोहिणी बनाम तेजस्वी की बहस चल रही। तेज प्रताप पहले ही अलग रास्ते पर हैं। परिवार की एकता पार्टी की ताकत है, लेकिन कलह इसे कमजोर करती है। बिहार में यादव वोट बैंक मजबूत है, पर यह फूट उसे बांट सकता है। विशेषज्ञ कहते हैं, परिवार को संवाद से सुलझाना होगा।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियां और चुनौतियां
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 नजदीक आ रहा है। 243 सीटों पर जंग होगी, और RJD महागठबंधन का हिस्सा है। रोहिणी के बयान ने चुनौतियां बढ़ा दीं, जो पार्टी की रणनीति को हिला सकती हैं।

वर्तमान चुनावी परिदृश्य
NDA नीतीश कुमार की अगुवाई में मजबूत है, जबकि महागठबंधन RJD, कांग्रेस और वाम दलों पर टिका। 2020 में महागठबंधन को 110 सीटें मिलीं, लेकिन सरकार NDA ने बनाई। अब बिहार चुनाव 2025 में रोजगार और विकास मुद्दे प्रमुख हैं। RJD पिछड़ों और मुसलमानों पर फोकस कर रहा है।
चुनाव आयोग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। वोटर लिस्ट अपडेट हो रही है, और पार्टियां रैलियां कर रही हैं। लेकिन आंतरिक कलह से RJD का वोट ट्रांसफर प्रभावित हो सकता है।
RJD की रणनीति और रोहिणी के बयान का प्रभाव
RJD सीट बंटवारे पर अड़ा है। तेजस्वी युवा इमेज पर जोर दे रहे हैं। लेकिन रोहिणी का बयान उम्मीदवार चयन को जटिल बना सकता है। अगर परिवार में फूट दिखी, तो कार्यकर्ता उत्साह खो देंगे। विशेषज्ञों का मानना है, यह गठबंधन के लिए खतरा है।
रणनीति में बदलाव जरूरी। RJD को महिलाओं को ज्यादा टिकट देना चाहिए, जैसा रोहिणी ने कहा। अन्यथा, 2025 चुनाव में नुकसान हो सकता है।
अन्य दलों की प्रतिक्रिया
BJP ने मौके का फायदा उठाया। अमित शाह ने कहा, “RJD की फूट से बिहार मजबूत होगा।” नीतीश कुमार ने चुप्पी साधी, लेकिन उनके सहयोगी हमला बोल रहे। कांग्रेस ने भी RJD से दूरी बनाने के संकेत दिए। यह प्रतिक्रिया RJD को कमजोर दिखा रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय और संभावित परिणाम
विश्लेषक रोहिणी के बयान को बिहार राजनीति का टर्निंग पॉइंट मान रहे। यह RJD की एकता पर सवाल उठाता है, जो चुनावी समीकरण बदल सकता है।
विशेषज्ञों के दृष्टिकोण
प्रो. जगदीश प्रसाद जैसे विश्लेषक कहते हैं, “RJD को परिवार से ऊपर उठना होगा।” पहले के इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आंतरिक कलह वोटरों को भटकाता है। अन्य विशेषज्ञ, जैसे ए.एन. सिंह, मानते हैं कि सोशल मीडिया अब राजनीति का हथियार है। रोहिणी का बयान इसी का उदाहरण है।
विश्लेषकों की राय एकमत है – RJD को संवाद बढ़ाना चाहिए।

चुनाव पर संभावित प्रभाव
यह बयान वोट ध्रुवीकरण बढ़ा सकता। यादव वोट बंटे, तो महागठबंधन कमजोर पड़ेगा। 2025 में गठबंधन टूटने की आशंका है। लेकिन अगर RJD संभल गया, तो फायदा भी हो सकता है – नई ऊर्जा आएगी।
RJD के लिए सुधार के सुझाव
- आंतरिक बैठकें बढ़ाएं, जहां सबकी बात सुनी जाए।
- युवा और महिलाओं को ज्यादा जिम्मेदारी दें।
- सोशल मीडिया पर एकजुट संदेश दें। ये कदम पार्टी को मजबूत बनाएंगे। परिवार को साथ लाना जरूरी है।
RJD के भविष्य की दिशा
रोहिणी आचार्य का बयान RJD में अंदरूनी कलह के संकेत देता है, जो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को प्रभावित कर सकता है। हमने देखा कि उनका पोस्ट पार्टी इतिहास और वर्तमान रणनीति से जुड़ा। यादव परिवार की भूमिका अहम है, लेकिन एकता बनी रहे तो RJD मजबूत रहेगा।
चुनौतियां हैं, पर अवसर भी। अगर RJD सुधार अपनाए, तो चुनाव में वापसी संभव। बिहार की राजनीति रोचक बनी रहेगी। आप क्या सोचते हैं? अगली अपडेट्स के लिए जुड़े रहें।
Prime मंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के भावनगर में रैली को संबोधित किया
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

