कानपुर, 13 जुलाई कानपुर में मानसून सामान्य तौर पर 20 जून के आस पास आता है और इस वर्ष
23 दिनों में मात्र 55 मिमी ही बारिश हो सकी है।
इससे किसानों के चेहरे मुरझा गये हैं, क्योंकि कम बारिश से
खरीफ फसल की बुआई नहीं हो पा रही है जो हो भी गई है वह सूख रही है।
जबकि सिर्फ जुलाई माह में पिछले
वर्ष 349.3 मिमी बारिश हुई थी।
समुद्री गतिविधियों अनुकूल न होने से इस वर्ष पहले तो मानसून ही 10 दिन की देरी से कानपुर पहुंचा। मानसून
आने पर एक और दो जुलाई को कुल 55 मिमी बारिश हुई। इसके बाद मानसून ने ऐसी बेरुखी की कि कानपुर में
में मानसून वापसी कर ही नहीं रहा है। इससे जहां भीषण उमस भरी गर्मी से लोग बेहाल हो रहे हैं तो वहीं सबसे
अधिक किसान परेशान है। किसानों को अब लगने लगा है कि कहीं सूखा न पड़ जाये। चौबेपुर के किसान रामलाल
कटियार ने बताया कि धान की रोपाई बारिश न होने के चलते सही से नहीं हो पा रही है। इसके अलावा उड़द, मूंग
और अन्य खरीफ की फसल की बुआई नहीं हो पा रही है।
बिल्हौर के किसान आदित्य सिंह का कहना है कि अगर
10 दिन ऐसा ही मौसम का रुख रहा तो किसान बर्बादी की कगार पर पहुंच जाएगा।
चन्द्रशेखर आजाद कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक डॉ एस एन सुनील पाण्डेय ने बुधवार को
बताया कि इस सीजन में बारिश मात्र 55.8 मिमी ही हो सकी है जो औसत बारिश से 217.3 मिमी कम है। इसके
साथ ही पिछले वर्ष की बराबरी के लिए अभी 293.5 मिमी बारिश होनी चाहिये। बताया कि मानसून के उत्तर प्रदेश
से नीचे खिसकने के कारण कानपुर मंडल का तापमान फिर से बढ़ने लगा है। बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवा
के कारण उमस भरी गर्मी भी पड़ रही है। इन हवाओं के कारण आसमान में बादलों की आवाजाही बनी हुई है,
लेकिन स्थानीय स्तर पर हल्की बूंदाबांदी के अलावा तेज बारिश नहीं हो पा रही है। वर्तमान में मानसून की अक्षीय
रेखा दक्षिण पाकिस्तान से राजस्थान, मध्य प्रदेश होते हुए मध्य बंगाल की खाड़ी तक जा रही है। इसी वजह से
वहां पर तो बारिश हो रही है लेकिन कानपुर परिक्षेत्र में सिर्फ बूंदाबांदी हो रही है।
बताया कि मानसून की ट्रफ रेखा उत्तर प्रदेश में अभी सात दिन बनती नहीं दिखाई दे रही है।
हालांकि स्थानीय स्तर
पर हल्की बारिश हो सकती है। सात दिन बाद कितनी बारिश होगी इसका आंकलन अभी नहीं किया जा सकता है,
लेकिन यह संभावना है कि पिछले वर्ष जुलाई माह में हुई 349.3 मिमी बारिश से काफी कम रहेगी।

