TrumpUS President Donald Trump, center, during a meeting with members of the Juventus soccer club in the Oval Office of the White House in Washington, DC, US, on Wednesday, June 18, 2025. Juventus will play at the Club World Cup Wednesday night in Washington, DC. Photographer: Ken Cedeno/UPI/Bloomberg

Trump का बयान: “वह गलत हैं” – तुलसी गबार्ड के ईरान परमाणु समझौते पर बढ़ते विवाद

अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड Trump  का हालिया बयान एक नया विवाद खड़ा कर रहा है। उन्होंने जासूसी प्रमुख तुलसी गबार्ड के ईरान परमाणु समझौते को लेकर कहे गए बयान पर टिप्पणी दी है, जिसमें उन्होंने इसे गलत बताया। यह बयान इस वक्त चर्चा में है, जब वैश्विक सुरक्षा खासतौर पर मध्य पूर्व में स्थिरता के लिए नीतियां बदल रही हैं।

तुलसी गबार्ड का बयान, जिसमें उन्होंने ईरान की परमाणु गतिविधियों के बारे में खुलासा किया था, इतनी विश्वसनीयता नहीं रखता, जिससे तमाम राजनेता और विशेषज्ञ सकते में हैं। इस विवाद का असर न सिर्फ अमेरिका, बल्कि पूरी दुनिया के सुरक्षा समीकरणों पर भी पड़ने वाला है।

Trump का बयान: “वह गलत हैं” – संदर्भ और मुख्य बातें

Trump का बयान का संक्षेप

Trump ने हाल ही में एक भाषण में कहा, “वह गलत हैं,” जब उन्हें ईरान पर गबार्ड के बयान के बारे में पूछा गया। उन्होंने यह कहकर संकेत दिया कि तुलसी गबार्ड का दावा खड़ा नहीं है और इसकी विश्वसनीयता सीमित है। यह बयान तब आया जब मीडिया में चर्चा गरम थी कि क्या गबार्ड ने सही जानकारी दी है या नहीं। ट्रम्प की टिप्पणी का मुख्य उद्देश्य उनके विरोध में खड़ी ईरान की अंतरराष्ट्रीय भूमिका को खारिज करना था।

बयान के पीछे की मंशा और राजनीतिक संकेत

यह बयान उस समय आया है, जब आगामी राष्ट्रपति चुनाव की रणभूमि गर्म है। ट्रम्प अपनी पुरानी नीतियों की तरफ लौटने का संकेत दे रहे हैं, जिनमें ईरान विरोधी रुख मुख्य था। यह भी देखा गया है कि उन्होंने अपने समर्थकों को भरोसा दिलाने के लिए यह टिप्पणी की। इससे पहले, ट्रम्प ने ईरान के बारे में कई बार कठोर बयान दिए थे, और अब फिर वही रुख दोहराया है।

प्रतिक्रिया और मीडिया कवरेज

मीडिया में हड़कंप मच गया है। सरकारें, विश्लेषक और विशेषज्ञ अब इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। ट्विटर, न्यूज चैनल और न्यूज़ वेबसाइटों पर ट्रम्प की टिप्पणी वायरल हो रही है। कुछ का मानना है कि यह बयान जासूसी अफसर की विश्वसनीयता को कमजोर करने का एक प्रयास है, तो वहीं दूसरे विशेषज्ञ इसे राजनीतिक खेल बताते हैं।

Trump Disavows Spy Chief Tulsi Gabbard's Iran Nuclear Programme, Declares  'My Intelligence Community Is Wrong' | Republic World

तुलसी गबार्ड का ईरान परमाणु समझौते पर बयान: तथ्य एवं संदर्भ

गबार्ड का बयान क्या कहता है

गबार्ड ने कहा था कि ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने के बावजूद, परमाणु हथियार बनाने के प्रयास अभी खत्म नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान ने अपने रासायनिक और परमाणु एजेंसियों से परमाणु हथियारों की तैयारी के सबूत छुपाए हैं। इस बयान का स्रोत गबार्ड की जासूसी एजेंसी में विद्यमान स्थिति बताता है, जिसकी विश्वसनीयता सभी एजेंसियों से अलग है।

ईरान परमाणु समझौते का वर्तमान स्थिति

जल्द ही, JCPOA यानी ज्वाइंट कम्प्रीहेंसिव प्लान ऑफ अ्क्शन की स्थिति बुरी तरह खराब हो चुकी है। अमेरिका ने जब-तब इस समझौते से अलग होने की घोषणा की है, और प्रतिबंध फिर से लगाए गए हैं। दूसरी ओर, यूरोपीय देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसकी रिकवरी के लिए प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान अभी भी अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है, लेकिन उसकी गतिविधियों पर कड़ी नजर है।

विशेषज्ञ विश्लेषण और विश्वसनीयता

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) का कहना है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम की निगरानी में सामने आई प्रगति के आधार पर रिपोर्ट देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि तुलसी गबार्ड का बयान तथ्यों पर आधारित है या नहीं, यह राजनीतिक नजऱिए से देखा जाना चाहिए। कुछ का विचार है कि यह बयान सच है, लेकिन इसे जोर-शोर से न करना ही बेहतर है।

विवाद के मूल कारक और वैश्विक राजनीतिक प्रभाव

चीन, रूस और यूरोपीय देशों की प्रतिक्रियाएं

चीन और रूस ने अब तक इस विवाद पर सीधे प्रतिक्रिया नहीं दी है। लेकिन यूरोपीय देशों ने कहा है कि उन्हें ईरान के साथ बातचीत जारी रखने की जरूरत है। इन्हीं देशों का मुख्य रुख है कि परमाणु मुद्दे का शांतिपूर्ण हल जरूरी है।

अमेरिका-ईरान संबंध पर प्रभाव

Trump का यह बयान न सिर्फ संबंधों को खराब कर सकता है, बल्कि संधि की संभावना को भी धक्का पहुंचा सकता है। क्या यह दोनों देशों के बीच नये युद्ध की ओर ले जाएगा? इससे जुड़ा सवाल बहुत महत्वपूर्ण है।

क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां

मध्य पूर्व में स्थिरता खतरे में पड़ सकती है। अगर परमाणु हथियारों का वितरण बढ़ा, तो आतंकवाद और संघर्ष का खतरा भी बढ़ेगा। यह स्थिति वैश्विक सुरक्षा के लिए भी खतरा बन सकती है।

विशेषज्ञ परामर्श और सरकार की प्रतिक्रिया

सैन्य और कूटनीतिक विशेषज्ञों का दृष्टिकोण

विशेषज्ञ कहते हैं कि इस तरह के बयान से स्थिति नहीं सुधरती। खतरे से निपटने का सबसे अच्छा तरीका बातचीत और डिप्लोमेसियों का सहारा लेना है। युद्ध से बचने के लिए सबसे जरूरी है समझौता।

अमेरिकी सरकार का आधिकारिक रुख

बाइडन सरकार ने कहा है कि वह इस बयान का समर्थन नहीं करती। उनका कहना है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी जरूरी है। वह बातचीत के रास्ते पर कायम हैं, लेकिन पक्के सबूत चाहते हैं।

रणनीतिक सुझाव और आगामी कदम

Trump अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर सहयोग जरूरी है। अमेरिका और उसके साझेदारों को मिलकर ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहिए। साथ ही, क्षेत्रीय स्थिरता के लिए संवाद की दिशा में काम करना चाहिए।

डोनाल्ड Trump का यह बयान अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक बयान है, जो ईरान परमाणु मुद्दे को लेकर दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया है। गबार्ड का बयान तथ्यों पर आधारित है या राजनीतिक हथकंडा, इस पर तटस्थ रहना जरूरी है। असली फर्क तो तब पड़ेगा जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय निरंतर बातचीत और सहमति के साथ इस जटिल मामले का समाधान निकालेगा। स्थिरता, सुरक्षा और शांतिपूर्ण समाधान के लिए सभी पक्षों को संयम और समझदारी से कदम बढ़ाने होंगे।

कार्रवाई के सुझाव:

  • अपने पोस्ट और सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को फैलाएं ताकि जागरूकता बढ़े।
  • नीति निर्धारकों को सही जानकारी के आधार पर निर्णय लेना चाहिए।
  • वैश्विक सुरक्षा के लिए निरंतर संवाद और सहयोग जरूरी है।

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