UP के सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण पर उच्च स्तरीय बैठक की, अधिकारियों को दिए व्यापक दिशा-निर्देश
UP उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने राज्य में जल संरक्षण, भूजल स्तर को बेहतर बनाने और जल संसाधनों के सतत प्रबंधन को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल संकट आज विश्व की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए अभी से प्रभावी कदम उठाने होंगे।
मुख्यमंत्री ने बैठक में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों से UP में चल रही जल संरक्षण योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने तालाबों के पुनर्जीवन, नदियों की सफाई, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरचनाओं के निर्माण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि UP के प्रत्येक जिले में स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप जल संरक्षण की कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
जल संरक्षण को जन भागीदारी से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी अभियान की सफलता तभी सुनिश्चित होती है जब उसमें जनभागीदारी हो। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांवों, नगर निकायों, स्कूलों, महाविद्यालयों और स्वयंसेवी संगठनों को जल संरक्षण अभियान से जोड़ा जाए। लोगों को जल के महत्व और इसके संरक्षण की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की रक्षा और संरक्षण के लिए ग्राम पंचायतों की सक्रिय भूमिका सुनिश्चित की जाए। पंचायत स्तर पर जल संरक्षण समितियों का गठन कर स्थानीय लोगों को अभियान में शामिल करने की दिशा में कार्य किया जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जल संरक्षण को सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में विकसित करना समय की मांग है।

वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्षा जल संचयन को प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश का पानी बड़ी मात्रा में बहकर निकल जाता है, जबकि इसे संरक्षित कर भूजल स्तर को बढ़ाने में उपयोग किया जा सकता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि सरकारी भवनों, स्कूलों, अस्पतालों, कार्यालयों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों में वर्षा जल संचयन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही नए भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य रूप से लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएं।
मुख्यमंत्री ने शहरी क्षेत्रों में भी जल संरक्षण की आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण के कारण जल की मांग बढ़ रही है और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार करना जरूरी है।
तालाबों और जलाशयों के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के पारंपरिक जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष बल दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुराने तालाबों, पोखरों और जलाशयों का चिन्हीकरण कर उनका पुनर्जीवन सुनिश्चित किया जाए। इन जल स्रोतों की सफाई, गहरीकरण और अतिक्रमण मुक्त कराने की प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में हजारों पारंपरिक जल स्रोत मौजूद हैं, जो एक समय में ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल प्रबंधन का महत्वपूर्ण आधार थे। इन जल स्रोतों को पुनर्जीवित कर जल संकट की समस्या का प्रभावी समाधान किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि तालाबों के आसपास पौधारोपण किया जाए ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिल सके। इससे भूजल स्तर में सुधार होगा और स्थानीय जैव विविधता को भी लाभ मिलेगा।

भूजल स्तर सुधारने के लिए समन्वित प्रयास
बैठक में मुख्यमंत्री ने भूजल स्तर में गिरावट पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अत्यधिक भूजल दोहन के कारण जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। इसे रोकने के लिए वैज्ञानिक और योजनाबद्ध दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि भूजल पुनर्भरण के लिए विशेष अभियान चलाए जाएं। जिन क्षेत्रों में भूजल स्तर अत्यधिक प्रभावित है, वहां प्राथमिकता के आधार पर जल संरक्षण परियोजनाओं को लागू किया जाए। इसके साथ ही भूजल उपयोग की निगरानी और जल संसाधनों के संतुलित उपयोग पर भी विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण से जुड़े विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सिंचाई, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, नगर विकास, वन, शिक्षा और अन्य संबंधित विभागों को मिलकर समेकित रूप से कार्य करना होगा।
स्कूलों और युवाओं की भूमिका पर जोर
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण अभियान में युवाओं और विद्यार्थियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों और युवाओं में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा की जाए, तो समाज में व्यापक सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।
उन्होंने स्कूलों और महाविद्यालयों में जल संरक्षण से संबंधित गतिविधियों, प्रतियोगिताओं और जागरूकता कार्यक्रमों के आयोजन के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को जल संसाधनों के महत्व और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी का बोध कराना आवश्यक है।

पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा है जल संरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। वृक्षारोपण, जल स्रोतों का संरक्षण और प्राकृतिक संसाधनों का संतुलित उपयोग पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि राज्य में चलाए जा रहे वृक्षारोपण अभियानों को जल संरक्षण कार्यक्रमों के साथ जोड़ा जाए। इससे जल धारण क्षमता बढ़ेगी और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने में भी मदद मिलेगी।
दीर्घकालिक रणनीति की आवश्यकता
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जल संरक्षण केवल मौसमी अभियान नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे दीर्घकालिक और सतत प्रक्रिया के रूप में अपनाना होगा। उन्होंने अधिकारियों को समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने, नियमित समीक्षा करने और जनसहभागिता को बढ़ाने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी प्रकृति का अमूल्य उपहार है और इसकी एक-एक बूंद का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि अभी से प्रभावी प्रयास किए गए, तो भविष्य में जल संकट की गंभीर चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जा सकेगा। उत्तर प्रदेश सरकार जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए जल सुरक्षा और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में निरंतर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।
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