बिहार की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा घमासान चल रहा है।
LJP (रामविलास) के नेता Chirag पासवान सीट बंटवारे की अफ़वाहों पर जमकर बरसे हैं। 2025 विधानसभा चुनाव को लेकर एनडीए में सीटों की खींचतान ज़ोरों पर है, और चिराग का ग़ुस्सा साफ इशारा करता है कि अंदरखाने सब कुछ ठीक नहीं है।
सोशल मीडिया पर तीखे बयान और पार्टी कार्यकर्ताओं में नाराज़गी का माहौल—यह सिर्फ़ एक अंदरूनी विवाद नहीं, बल्कि बिहार की सत्ता का समीकरण पलट सकता है।
Chirag पासवान इतने नाराज़ क्यों हैं?
सीट शेयरिंग विवाद की पृष्ठभूमि
LJP (रामविलास) की स्थापना 2020 में LJP के टूटने के बाद हुई।
Chirag ने अपने पिता रामविलास पासवान की विरासत संभाली और JD(U) के खिलाफ़ “बिहार फ़र्स्ट, बिहारी फ़र्स्ट” अभियान चलाया।
2020 विधानसभा चुनाव में अकेले लड़ते हुए भी 5 सीटें जीतीं।
बाद में बीजेपी से फिर गठबंधन हुआ और चिराग मोदी सरकार में मंत्री बने।
अब 2025 चुनाव को लेकर चल रही अटकलें कह रही हैं कि LJP-R को 20–25 सीटें मिल सकती हैं।
Chirag को यह मंज़ूर नहीं। उन्होंने ट्वीट कर इन ख़बरों को “असत्य और कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने वाला” बताया।
LJP (रामविलास): बिहार में क्यों है ये पार्टी अहम?
दलित वोट बैंक पर मज़बूत पकड़
Chirag पासवान समुदाय बिहार के दलितों में सबसे बड़ी आबादी (करीब 16%) है।
ये वोट बैंक हाजीपुर, समस्तीपुर, रोसड़ा जैसे इलाकों में निर्णायक भूमिका निभाता है।
चिराग खुद को दलित समाज की आवाज़ बताते हैं – यही NDA में उनकी असली ताकत है।

एनडीए में LJP-R की भूमिका
2024 लोकसभा चुनाव में LJP-R ने 5 में से 5 सीटें जीतीं – पूरी तरह से सफलता।
Chirag अब केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण मंत्री हैं – उनका असर बढ़ा है।
BJP उन्हें दलित वोटर्स से जोड़ने वाले सेतु की तरह देखती है।
उनका युवा चेहरा और सोशल मीडिया पर पकड़ उन्हें बाक़ी सहयोगियों से अलग बनाती है।
सीट बंटवारे की अफ़वाहों का राजनीतिक असर
NDA में तनाव और चिराग की रणनीति
Chirag को डर है कि JD(U) ज़्यादा सीटें लेकर छोटे दलों को दबा सकती है।
2020 में उन्होंने नीतीश कुमार के खिलाफ़ ज़ोरदार हमला किया था – अब वो पुराने घाव फिर से ताज़ा हो रहे हैं।
अगर बराबरी की हिस्सेदारी नहीं मिली, तो LJP-R कुछ सीटों पर अकेले लड़ सकती है।
विपक्ष की चाल
तेजस्वी यादव और महागठबंधन को NDA की अंदरूनी लड़ाई से फ़ायदा हो सकता है।
वो Chirag के गुस्से को NDA की “छोटे दलों को दबाने वाली नीति” के रूप में पेश कर रहे हैं।
दलित वोटर्स को लुभाने की कोशिशें तेज़ होंगी – इससे राजद को बढ़त मिल सकती है।

Chirag पासवान के बयानों का विश्लेषण
उन्होंने कहा,
“सीट बंटवारे की झूठी खबरें सिर्फ़ पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं का हौसला तोड़ने के लिए फैलाई जा रही हैं।”
सूत्रों की मानें तो LJP-R कम से कम 30 सीटों की मांग कर रही है।
Chirag की सोशल मीडिया पर सक्रियता और तीखे बयानों से उनका इरादा साफ है –
“हमें हल्के में मत लीजिए।”
आने वाले चुनावों में LJP-R की रणनीति
LJP-R का फोकस रहेगा हाजीपुर, रोसड़ा, समस्तीपुर जैसे सीटों पर।
मुद्दे होंगे:
स्थानीय रोज़गार
दलित गौरव
जातिगत सम्मान
पार्टी चलाएगी:
डोर-टू-डोर अभियान
युवाओं के लिए सोशल मीडिया कैंपेन
अगर समझौता नहीं होता, तो ये पार्टी चुनिंदा सीटों पर अकेले भी लड़ सकती है।

Chirag के ग़ुस्से का क्या मतलब है?
Chirag पासवान का यह विरोध सिर्फ़ नाराज़गी नहीं, बल्कि NDA को एक कड़ा संदेश है:
“बराबरी नहीं तो समर्थन नहीं।”
मुख्य बातें:
सीट बंटवारे का मुद्दा NDA की एकता की परीक्षा बन चुका है।
दलित वोटर्स का रुख तय करेगा चुनावी जीत का समीकरण।
अगर विवाद लंबा चला, तो NDA को नुकसान और विपक्ष को फ़ायदा मिल सकता है।
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