प्रधानमंत्री Modi का काशी को तोहफ़ा: वाराणसी से 4 नई वंदे भारत ट्रेनों का शुभारंभ — रूट, टाइमिंग्स और असर
वाराणसी, यानी प्राचीन काशी — आस्था और संस्कृति का प्रतीक शहर। अब यह पवित्र नगरी आधुनिकता की नई पटरी पर दौड़ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र Modi ने अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी से चार नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह कदम “विकसित भारत” के उस सपने से जुड़ा है, जिसमें तेज़ रफ्तार ट्रेनों से देश के हर कोने को जोड़ा जा रहा है।
वंदे भारत क्रांति: आधुनिक भारत का नया चेहरा
वंदे भारत ट्रेनें भारत के रेल सफर में एक बड़ा बदलाव हैं।
कुछ साल पहले शुरू हुई ये सेमी-हाईस्पीड ट्रेनें देश में “मेक इन इंडिया” की मिसाल बन चुकी हैं। इनका उद्देश्य है — तेज़, आरामदायक और स्वदेशी तकनीक से निर्मित यात्रा।
ये ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार तक चल सकती हैं, जिससे लंबी यात्राएँ घंटों छोटी हो जाती हैं। हवाई जहाज़ जैसी सीटें, ऑनबोर्ड भोजन और आधुनिक सुविधाएँ इन्हें खास बनाती हैं।
वंदे भारत की प्रमुख खूबियाँ
स्वदेशी निर्माण: इंजन से लेकर सीट तक, अधिकतर हिस्से भारत में बने हैं।
सुरक्षा: “कवच” तकनीक से लैस, जो टकराव से बचाती है।
आराम: रीक्लाइनिंग सीटें, LED लाइटें और हर सीट पर चार्जिंग पॉइंट।
पर्यावरण हितैषी: कम ईंधन खपत और प्रदूषण नियंत्रण।
स्मार्ट टेक्नोलॉजी: CCTV, बायो-वैक्यूम टॉयलेट्स और Wi-Fi सुविधा।
इन ट्रेनों की औसत गति 130 किमी/घंटा तक पहुँचती है, जिससे यात्राएँ 30–40% तक कम समय में पूरी हो जाती हैं।

देशभर में वंदे भारत नेटवर्क का विस्तार
पहली वंदे भारत ट्रेन 2019 में चली थी। अब तक 60 से ज़्यादा रूट्स पर 50 से अधिक ट्रेनें दौड़ रही हैं।
वाराणसी से शुरू हुई ये चार नई ट्रेनें उत्तर भारत की कनेक्टिविटी को और मज़बूत बनाएंगी।
हर नई ट्रेन एक नई दिशा में विकास की डोरी जोड़ती है — यात्रियों, व्यापार और पर्यटन के लिए नए रास्ते खोलती है।
काशी से चार दिशाओं की नई पटरी: चार ट्रेनों के रूट और टाइमिंग
वाराणसी – रांची वंदे भारत
दूरी: लगभग 550 किमी
समय: मात्र 7 घंटे
प्रस्थान: वाराणसी जंक्शन – सुबह 6:00 बजे
आगमन: रांची – दोपहर 1:05 बजे
वापसी: रांची – शाम 3:30 बजे | वाराणसी – रात 10:45 बजे
रूट: मुगलसराय, सासाराम, गया
पुरानी ट्रेनों को 10–12 घंटे लगते थे, जबकि वंदे भारत यह सफर 4 घंटे कम में पूरा करती है। इससे रांची और काशी के बीच धार्मिक व व्यापारिक संबंध और मज़बूत होंगे।
वाराणसी – पटना वंदे भारत
दूरी: लगभग 250 किमी
समय: 4 घंटे से भी कम
प्रस्थान: सुबह 5:30 बजे | आगमन: 9:20 बजे
अब काशी से बिहार की राजधानी का सफर एक सुबह में संभव है। व्यापारिक यात्राएँ और पारिवारिक मुलाकातें दोनों आसान होंगी।
वाराणसी – देहरादून वंदे भारत
दूरी: लगभग 800 किमी
समय: 10 घंटे
रूट: प्रयागराज, लखनऊ होते हुए देहरादून
प्रस्थान: सुबह 7:00 बजे | आगमन: शाम 5:00 बजे
पहाड़ों तक पहुँच अब पहले से तेज़ और आरामदायक हो गई है। तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए यह मार्ग बेहद लाभदायक रहेगा।
वाराणसी – लखनऊ वंदे भारत
दूरी: 300 किमी
समय: 3.5 घंटे
प्रस्थान: शाम 4:00 बजे | आगमन: 7:30 बजे
वापसी: रात 8:30 बजे
यह मार्ग संस्कृति और व्यापार दोनों के लिए अहम है। काशी के घाटों से लेकर लखनऊ की नवाबी गलियों तक अब सिर्फ कुछ घंटों की दूरी। रेशम, मसालों और पर्यटन से जुड़े व्यापार को नई रफ्तार मिलेगी।
काशी मॉडल: विकास और विरासत का संगम
प्रधानमंत्री Modi ने वाराणसी को अपनी विकास योजनाओं का केंद्र बनाया है।
एयरपोर्ट, कॉरिडोर और अब ये तेज़ रफ्तार ट्रेनें — ये सब “काशी मॉडल” का हिस्सा हैं, जहाँ आस्था और आधुनिकता साथ-साथ बढ़ रही हैं।
स्थानीय असर: रोज़गार, पर्यटन और व्यापार में उछाल
वाराणसी स्टेशन का कायाकल्प — नए प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय और लाउंज।
युवाओं के लिए टिकटिंग, रखरखाव और सुरक्षा में रोजगार के अवसर।
होटल, दुकानों और रेस्तरां में भीड़ बढ़ी।
काशी विश्वनाथ कॉरिडोर तक पहुँचना अब पहले से आसान, जिससे पर्यटन बढ़ेगा।
कुल मिलाकर, यात्रियों, दुकानदारों और यात्रास्थलों — तीनों को फायदा होगा।
यात्रियों के लिए सीधा लाभ
समय की बचत:
वाराणसी–रांची: 4-5 घंटे की बचत
वाराणसी–पटना: 6 से घटकर 3.5 घंटे
वाराणसी–देहरादून: 16 से घटकर 10 घंटे
वाराणसी–लखनऊ: 5 से घटकर 3 घंटे
आराम और सुरक्षा:
सीटें रीक्लाइन होती हैं, भोजन गर्म परोसा जाता है, शौचालय स्वच्छ रहते हैं और सफर शांतिपूर्ण होता है।पर्यावरण लाभ:
नई तकनीक से ईंधन की खपत घटती है और प्रदूषण कम होता है।
भारतीय रेल का भविष्य: तेज़ और स्वदेशी
भारत का लक्ष्य है — 2030 तक 400 वंदे भारत ट्रेनें।
नए ट्रैक, सिग्नल सिस्टम और स्टेशनों के आधुनिकीकरण से यह लक्ष्य और तेज़ी से पूरा होगा।
स्वदेशी तकनीक से बनी ये ट्रेनें आत्मनिर्भर भारत की सच्ची मिसाल हैं।
हर नए कोच में “मेक इन इंडिया” की छाप और हर यात्रा में भारत की नई पहचान।
नई युग की शुरुआत
प्रधानमंत्री Modi द्वारा वाराणसी से चलाई गई चार वंदे भारत ट्रेनों ने न सिर्फ काशी, बल्कि पूरे उत्तर भारत को नई ऊर्जा दी है।
मुख्य बिंदु:
चार नई ट्रेनें: रांची, पटना, देहरादून और लखनऊ रूट पर।
तेज़ गति, आधुनिक सुविधाएँ और समय की बड़ी बचत।
स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोज़गार को बढ़ावा।
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