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Bihar विधानसभा चुनाव का अंतिम चरण पूरा: नतीजे, समीकरण और आगे की राजनीति का रास्ता

Bihar की सियासी जंग आखिरकार थम गई। 7 नवंबर 2020 को हुए अंतिम चरण के मतदान के साथ 5 चरणों में फैला यह चुनावी महासमर समाप्त हुआ। अब नज़रें इस पर हैं कि राज्य की अगली सरकार कौन बनाएगा।
243 सीटों पर लड़े गए इस चुनाव में 7 करोड़ से अधिक मतदाताओं ने वोट डाला। नौकरियों, बाढ़ और जातीय समीकरण जैसे मुद्दे लोगों के बीच गूंजते रहे। अंतिम चरण में जनता का जोश कायम रहा—57.05% मतदान के साथ बिहार ने एक बार फिर लोकतंत्र में अपनी आस्था दिखाई।

अंतिम चरण का हाल: वोटिंग और हॉट सीटों की जंग-Bihar 

अंतिम चरण में मतदान उत्साहजनक रहा।
हालाँकि पिछले चरण के 59% से थोड़ा कम turnout रहा, फिर भी 57.05% एक मजबूत संख्या है।
पटना साहिब, मुंगेर, वैशाली और पटलिपुत्र जैसी सीटों पर कांटे की टक्कर दिखी।
वैशाली में भाजपा और राजद उम्मीदवारों के बीच पुरानी प्रतिद्वंद्विता फिर से दिखी,
जबकि पटलिपुत्र में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने युवाओं के मुद्दों पर मुकाबला किया।

बारिश ने कुछ ग्रामीण इलाकों में वोटिंग को धीमा किया,
लेकिन शहरी इलाकों में लोग सुबह से कतारों में दिखे।
चुनाव आयोग के आँकड़ों से साफ है—वोटर सतर्क लेकिन सक्रिय थे।

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मतदान का माहौल और सुरक्षा व्यवस्था-Bihar

चुनाव के दिन पूरे Bihar में गहमागहमी रही।
गाँवों में चौपालों पर चर्चा और शहरों में लंबी कतारें दिखीं।
सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व रही—1 लाख से अधिक सुरक्षाबलों की तैनाती हुई।
ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी रखी गई।

कुछ छोटे विवादों को छोड़ दें तो माहौल शांतिपूर्ण रहा।
चुनाव आयोग की त्वरित कार्रवाई और निष्पक्ष प्रबंधन ने इस चरण को सफल बनाया।
लोगों ने बिना डर-भय के मतदान किया—यह अपने आप में बड़ी बात रही।

चुनाव के ताज़ा नतीजे: कौन जीता, कौन हारा

अंतिम चरण के बाद कई बड़े नेताओं की किस्मत का फैसला हुआ।
तेजस्वी यादव की राजद ने इस दौर में कई सीटों पर बढ़त ली—खासकर महुआ जैसी जगहों पर।
भाजपा ने अपने गढ़ों जैसे लखीसराय में मजबूत प्रदर्शन किया।
जेडीयू के उम्मीदवारों ने ग्रामीण इलाकों में अपनी पकड़ बनाए रखी।

कांग्रेस ने कुछ शहरी सीटों पर संघर्ष किया,
जबकि एआईएमआईएम ने सीमांचल में नया समीकरण बनाया—
जहाँ एक नये चेहरे ने परंपरागत वोट बैंक में सेंध लगा दी।
यह दिखाता है कि स्थानीय नेताओं का असर अब भी निर्णायक है।

गठबंधन का गणित और सीटों की बाज़ी

अंतिम परिणामों में एनडीए (भाजपा + जेडीयू) ने कुल 125 सीटें हासिल कीं—
जो 243 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत (122 सीटें) से थोड़ा ज़्यादा है।
वहीं महागठबंधन (राजद + कांग्रेस + वाम दल) को 110 सीटें मिलीं।

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यह चरण निर्णायक साबित हुआ—
एनडीए ने यहां 43 सीटें जीतकर अपनी स्थिति मज़बूत की,
जबकि विपक्ष की रफ्तार पिछले दौर के बाद थोड़ी धीमी पड़ी।

छोटे सहयोगी दल जैसे हम (जीतनराम मांझी की पार्टी) ने भी एनडीए को कुछ सीटें देकर बढ़त बनाए रखी।
महागठबंधन में तालमेल की कमी से कुछ सीटें हाथ से निकल गईं।

सरकार बनाने की राह और चुनौतियाँ

सरकार बनाने के लिए 122 सीटों का आंकड़ा ज़रूरी है।
एनडीए के पास बहुमत तो है, पर बहुत मामूली।
ऐसे में स्वतंत्र विधायकों का समर्थन अहम हो सकता है।

गठबंधन के भीतर सीएम पद और विभागों के बँटवारे को लेकर खींचतान संभव है।
2015 की तरह किसी अप्रत्याशित मोड़ की गुंजाइश हमेशा रहती है।
हालाँकि फिलहाल सत्ता की बागडोर फिर नीतीश कुमार के हाथों में जाने के आसार हैं।

नीति और वादों का भविष्य

इस चुनाव में रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा रहा।
राजद ने 10 लाख नौकरियों का वादा किया,
जबकि एनडीए ने कृषि, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे पर ज़ोर दिया।

अब जो भी सरकार बनेगी, उसे युवाओं की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा।
बाढ़ प्रबंधन, शिक्षा सुधार और स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर ठोस कदम ज़रूरी हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड के बाद स्वास्थ्य और रोजगार दो मुख्य प्राथमिकताएँ रहेंगी।

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बदलते वोटिंग पैटर्न और जनता का संदेश

पूरे चुनाव के रुझान कुछ नई तस्वीरें दिखाते हैं—

  • जातीय राजनीति की पकड़ थोड़ी ढीली पड़ी, विकास और रोज़गार ने जगह बनाई।

  • महिलाओं की भागीदारी 50% से ज़्यादा रही—जो बदलाव का संकेत है।

  • युवा मतदाता अधिक सक्रिय हुए, जिन्होंने पारंपरिक सोच को चुनौती दी।

  • बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों ने राहत कार्यों को ध्यान में रखकर वोट किया,
    न कि सिर्फ जाति या पार्टी देखकर।

यह सब बताता है कि Bihar की राजनीति धीरे-धीरे मुद्दों पर केंद्रित होती जा रही है।

विपक्ष के लिए सबक और आगे की रणनीति

महागठबंधन को इस चुनाव से कई सबक मिले।
राजद का प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन साझी रणनीति की कमी से नुकसान हुआ।
भविष्य में विपक्ष को—

  • युवाओं और बेरोज़गारी के मुद्दों पर संयुक्त अभियान चलाना होगा।

  • डिजिटल प्रचार और जमीनी जुड़ाव दोनों पर ध्यान देना होगा।

  • छोटे दलों को साथ लेकर साझी योजना बनानी होगी।

2025 के चुनावों के लिए यह तैयारी ज़रूरी होगी,
वरना एनडीए की मज़बूत मशीनरी फिर बाज़ी मार सकती है।

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Bihar की राजनीति का नया अध्याय

अंतिम चरण के साथ Bihar का चुनावी सफ़र पूरा हुआ।
नतीजों ने यह साफ किया कि जनता ने स्थिरता के साथ बदलाव की झलक चुनी है।
एनडीए की वापसी से सरकार में निरंतरता दिखेगी,
जबकि विपक्ष की मज़बूत उपस्थिति सत्ता पर नज़र रखेगी।

  • जनता अब मुद्दों पर वोट कर रही है, सिर्फ़ जाति पर नहीं।

  • रोज़गार और विकास की मांग राजनीति का केंद्र बन चुकी है।

  • Bihar की राजनीति अब “नया संतुलन” खोज रही है—स्थिरता और परिवर्तन के बीच।

अब सबकी नज़र इस पर है—
क्या नीतीश कुमार एक और कार्यकाल संभालेंगे,
या सियासत कोई नया मोड़ लेगी?

Bihar की कहानी अभी खत्म नहीं हुई—अगला अध्याय जल्द शुरू होगा।

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