घातक घना कोहरा बना जानलेवा: Delhi-NCR हाईवे पर बस-ट्रक-कार-बाइक की भीषण टक्कर
कल्पना कीजिए कि आप रोज़ की तरह हाईवे पर गाड़ी चला रहे हैं और अचानक सामने की दुनिया एक मोटी, धूसर दीवार में गायब हो जाए। दिसंबर 2025 में दिल्ली-NCR में ठीक यही हुआ। रातों-रात घना कोहरा छा गया, दृश्यता लगभग शून्य हो गई और देखते-ही-देखते हाईवे पर भयानक हादसों की श्रृंखला शुरू हो गई।
बसें ट्रकों से टकराईं, कारें एक-दूसरे पर चढ़ गईं और बाइक सवार सबसे ज़्यादा फँस गए। इस कम दृश्यता वाली दुर्घटना में दर्जनों लोग घायल हुए और सड़कें घंटों बंद रहीं। यह घटना दिखाती है कि सर्दियों का कोहरा कैसे सुरक्षित ड्राइव को मौत के जाल में बदल देता है।
हादसे की परतें: चेन रिएक्शन कैसे शुरू हुआ
यह अफरा-तफरी यमुना एक्सप्रेसवे पर शुरू हुई, जो Delhi को आगरा से जोड़ने वाला अहम मार्ग है।
सुबह करीब 6 बजे, जब ट्रैफिक चरम पर था, कोहरा अचानक बेहद घना हो गया। एक ट्रक चालक ने सामने कुछ न दिखने पर अचानक ब्रेक लगाया। बस यहीं से चेन रिएक्शन शुरू हुआ।
पीछे आ रही बसें समय पर नहीं रुक सकीं
कारें आपस में टकराती चली गईं
बाइक सवार लेन बदलते हुए कोहरे में ओझल हो गए
कुछ ही सेकंड में पूरा इलाका मुड़ी हुई धातु और चीख-पुकार से भर गया।
दृश्यता, रिएक्शन टाइम और दुर्घटना का गणित
कई जगहों पर दृश्यता 20 मीटर से भी कम थी।
80 किमी/घंटा की रफ्तार पर ड्राइवर के पास प्रतिक्रिया के लिए मुश्किल से 1–2 सेकंड होते हैं। यह समय घने कोहरे में बिल्कुल नाकाफी है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
इतनी कम दृश्यता में सुरक्षित गति आधी या उससे भी कम होनी चाहिए
लेकिन अधिकतर चालक रफ्तार कम नहीं करते
यही अंतर छोटे झटकों को बड़े, बहु-वाहन हादसों में बदल देता है।

वाहन के हिसाब से खतरे का स्तर
ट्रक: भारी वजन और लंबी ब्रेक दूरी सबसे बड़ा खतरा
बसें: यात्रियों से भरी होने के कारण टक्कर में ज्यादा लोग फँसते हैं
कारें: टक्कर में मुड़ती-पलटती हैं, साइड हिट में पलटने का खतरा
बाइक: सबसे असुरक्षित—कोहरे में दिखती नहीं और कोई सुरक्षा नहीं
इस हादसे में तीन बाइक सवारों को गंभीर सिर की चोटें आईं।
रेस्क्यू टीम की आँखों देखा हाल
पहली बचाव टीमें जब पहुँचीं, तो दृश्य किसी डरावने सपने जैसा था।
कोहरा अब भी छाया हुआ था, घायलों को ढूंढना मुश्किल था।
पुलिस ने फ्लेयर जलाकर ट्रैफिक रोका
एंबुलेंस मलबे से बचती हुई धीरे-धीरे बढ़ीं
क्षतिग्रस्त इंजनों का धुआँ कोहरे में मिलकर सांस लेना मुश्किल बना रहा था
पहले एक घंटे में 15 लोगों को निकाला गया, लेकिन जाम के कारण मदद देर से पहुँची।

Delhi-NCR का कोहरा इतना खतरनाक क्यों?
Delhi-NCR का भूगोल कोहरे के लिए आदर्श है:
चारों ओर समतल ज़मीन और हल्की पहाड़ियाँ
सर्द रातों में ठंडी हवा नीचे बैठ जाती है
यमुना नदी से नमी उठकर सुबह घना कोहरा बना देती है
यह कोहरा हल्की धुंध नहीं, बल्कि पूरे दिन टिकने वाला मोटा पर्दा होता है।
तापमान उलटाव और प्रदूषण की भूमिका
तापमान उलटाव (Temperature Inversion) में ठंडी हवा नीचे फँस जाती है और ऊपर की गर्म हवा ढक्कन बन जाती है।
इससे:
प्रदूषक और नमी नीचे ही जमा रहते हैं
हवा नहीं चलती, कोहरा नहीं छंटता
पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने का धुआँ और वाहनों का धुआँ मिलकर PM2.5 स्तर 400+ तक पहुँचा देता है।
इस घटना के दौरान AQI 450 दर्ज हुआ—कई सालों में सबसे खराब।
नियमों की कमी और स्पीड कंट्रोल की विफलता
कागज़ पर नियम हैं:
दृश्यता 50 मीटर से कम हो तो गति 30 किमी/घंटा
हकीकत में:
ज़्यादातर वाहन 60–70 किमी/घंटा पर चलते रहे
चेतावनी बोर्ड को कोहरा निगल गया
कई जगह लाइटें खराब थीं
यही लापरवाही हादसे की बड़ी वजह बनी।
मानवीय और आर्थिक नुकसान
इस एक घटना में:
20+ लोग अस्पताल पहुँचे
2 मौतें, ज़्यादातर बाइक सवार
हाईवे 6 घंटे बंद
हज़ारों लोग फँसे
आर्थिक नुकसान:
सप्लाई चेन बाधित
खराब हुआ माल
अनुमानित सीधा नुकसान: 1 करोड़ रुपये से अधिक
घने कोहरे में सुरक्षित ड्राइविंग के ज़रूरी उपाय
यात्रा से पहले
फॉग लाइट और वाइपर चेक करें
शीशे साफ रखें
बाइक पर रिफ्लेक्टिव टेप लगाएँ
ड्राइविंग के दौरान
जितना दिखे, उससे तेज़ न चलें
सामान्य दूरी से दोगुना गैप रखें
अचानक ब्रेक न लगाएँ
ज़रूरत पर हल्का हॉर्न दें
जब दृश्यता लगभग शून्य हो जाए
सड़क किनारे पूरी तरह रुकें
हैज़र्ड ट्रायंगल लगाएँ
गाड़ी से बाहर न निकलें
मदद के लिए कॉल करें
प्रतिक्रिया नहीं, रोकथाम की ज़रूरत
Delhi-NCR का घना कोहरा हर सर्दी में हाईवे को खतरे में डाल देता है। मौसम कारण है, लेकिन लापरवाही और कमजोर निगरानी इसे घातक बनाती है।
बेहतर संकेतक, सख्त स्पीड लागू करना और जागरूक ड्राइविंग—यही रास्ता है।
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