Ashwini Vaishnaw
Ashwini Vaishnaw ने भारत की सेमीकंडक्टर यात्रा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए Narendra Modi की सराहना की है। आज सेमीकंडक्टर चिप्स मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, रक्षा उपकरण और एआई तकनीक की रीढ़ हैं। पहले भारत इन चिप्स के लिए लगभग पूरी तरह आयात पर निर्भर था, लेकिन अब स्थिति तेजी से बदल रही है।
सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत: दूरदर्शी सोच
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) की शुरुआत हुई। इसका उद्देश्य भारत में डिजाइन, निर्माण और परीक्षण की पूरी चेन विकसित करना है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो और देश तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बने।
वित्तीय प्रतिबद्धता
सरकार ने लगभग 76,000 करोड़ रुपये (करीब 9 अरब डॉलर) की प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। नई फैब्रिकेशन यूनिट्स (Fab) और OSAT इकाइयों को परियोजना लागत का 50% तक समर्थन दिया जा रहा है। यह कदम ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ विज़न के अनुरूप है।
बड़े प्रोजेक्ट्स और ऐतिहासिक कदम-Ashwini
टाटा-पीएसएमसी फैब परियोजना
Tata Electronics ने ताइवान की कंपनी PSMC के साथ मिलकर गुजरात के धोलेरा में सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने की घोषणा की है। इस प्लांट में प्रतिमाह हजारों वेफर का उत्पादन होगा।

माइक्रोन की निवेश योजना
अमेरिकी कंपनी Micron Technology ने गुजरात में लगभग 2.75 अरब डॉलर के निवेश से टेस्ट और असेंबली यूनिट स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे हजारों रोजगार सृजित होंगे।
OSAT इकोसिस्टम का विकास-Ashwini
भारत में तीन OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) इकाइयों को मंजूरी दी जा चुकी है। इससे 20,000 से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियां बनने की संभावना है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका
2021-22 की वैश्विक चिप कमी ने दुनिया को दिखा दिया कि कुछ देशों पर अत्यधिक निर्भरता जोखिम भरी है। भारत अब एक वैकल्पिक और विश्वसनीय निर्माण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
भारत के पास दुनिया के लगभग 20% सेमीकंडक्टर डिजाइन इंजीनियर हैं। बेंगलुरु और नोएडा जैसे शहर पहले से ही डिजाइन हब के रूप में स्थापित हैं। अब लक्ष्य निर्माण क्षेत्र में भी वही ताकत हासिल करना है।
मंत्री अश्विनी वैष्णव की भूमिका
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री के रूप में वैष्णव ने निवेशकों से सीधा संवाद, त्वरित मंजूरी और सिंगल-विंडो क्लीयरेंस जैसी प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। उनकी सक्रिय कूटनीति और उद्योग जगत से तालमेल ने भारत को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूत किया है।

कौशल विकास पर जोर
आईआईटी और अन्य तकनीकी संस्थानों के साथ मिलकर विशेष पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं, ताकि 2026 तक हजारों प्रशिक्षित पेशेवर तैयार किए जा सकें। महिला भागीदारी बढ़ाने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
सेमीकंडक्टर महाशक्ति बनने की दिशा में भारत-Ashwini
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और Ashwini वैष्णव के प्रयासों से भारत सेमीकंडक्टर निर्माण में नई पहचान बना रहा है।
मुख्य बिंदु:
9 अरब डॉलर की प्रोत्साहन योजना से बड़े निवेश आकर्षित हुए
टाटा और माइक्रोन जैसी कंपनियों की परियोजनाएं रोजगार और तकनीकी हस्तांतरण को बढ़ावा देंगी
डिजाइन से लेकर निर्माण तक आत्मनिर्भरता की दिशा में ठोस कदम
आने वाले दशक में भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर बाजार में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल कर सकता है। यह सिर्फ तकनीकी प्रगति नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक मजबूती की ओर भी बड़ा कदम है।
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