Trump की जीत के बाद युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की तीन बड़ी शर्तें: क्या हैं ये मांगें?
2024 के अमेरिकी चुनाव में Donald Trump की जीत की चर्चा अभी भी दुनिया भर में जारी है, लेकिन इस बीच Iran की प्रतिक्रिया ने वैश्विक राजनीति का ध्यान खींच लिया है। चुनाव परिणाम सामने आते ही तेहरान ने अमेरिका के साथ लंबे समय से चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए तीन कड़ी शर्तें रख दीं।
मार्च 2026 तक अमेरिका-ईरान संबंध वर्षों के प्रतिबंधों और मध्य-पूर्व में चल रहे प्रॉक्सी संघर्षों की वजह से तनावपूर्ण बने हुए हैं। ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका वास्तव में तनाव कम करना चाहता है, तो उसे तीन मुख्य मांगें माननी होंगी:
सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना
मध्य-पूर्व में नई क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था
नए परमाणु समझौते में बदलाव
चुनाव के बाद ईरान की रणनीति
ईरान की यह प्रतिक्रिया अचानक नहीं है। तेहरान अमेरिकी राजनीति को बहुत ध्यान से देखता है क्योंकि वहां की सरकार बदलने से विदेश नीति भी बदल जाती है।
JCPOA टूटने का सबक
2018 में Trump प्रशासन ने Joint Comprehensive Plan of Action (JCPOA) यानी 2015 के परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल लिया था।
इस समझौते में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर सीमाएं लगाने के बदले आर्थिक प्रतिबंधों में राहत पाई थी। लेकिन अमेरिका के बाहर निकलने के बाद:
ईरान पर फिर से कड़े प्रतिबंध लगाए गए
ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (enrichment) बढ़ा दिया
इसी अनुभव की वजह से अब ईरान किसी भी नए समझौते के लिए कड़ी गारंटी चाहता है।

ईरान की पहली शर्त: सभी प्रतिबंध हटाए जाएं
ईरान का कहना है कि अमेरिका को सभी आर्थिक प्रतिबंध तुरंत हटाने होंगे।
ईरान की मांगें
अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग प्रणाली तक फिर से पहुंच
तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों का अंत
वैश्विक व्यापार में सामान्य भागीदारी
ईरान का दावा है कि 2018 के बाद से प्रतिबंधों के कारण उसे लगभग 200 अरब डॉलर का नुकसान हुआ।
सत्यापन की व्यवस्था
ईरान चाहता है कि किसी भी समझौते में ऐसी व्यवस्था हो जिससे अमेरिका भविष्य में आसानी से फिर प्रतिबंध न लगा सके।
इसके लिए ईरान प्रस्ताव दे रहा है:
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी
हर कुछ महीनों में आर्थिक सत्यापन
अगर अमेरिका समझौता तोड़े तो दंड
आर्थिक मुआवज़े की मांग
ईरान यह भी संकेत दे रहा है कि उसे जमे हुए विदेशी फंड और नुकसान की भरपाई मिलनी चाहिए। कुछ अनुमान के अनुसार यह राशि 100 अरब डॉलर तक हो सकती है।

दूसरी शर्त: मध्य-पूर्व में नई सुरक्षा व्यवस्था
ईरान की दूसरी बड़ी मांग क्षेत्रीय राजनीति से जुड़ी है।
“Axis of Resistance” में दखल न दिया जाए
ईरान चाहता है कि अमेरिका उसके सहयोगी समूहों के खिलाफ कार्रवाई बंद करे, जैसे:
लेबनान में Hezbollah
इराक की शिया मिलिशिया
सीरिया में ईरान समर्थित बल
ईरान इन्हें अपनी सुरक्षा ढाल मानता है।
खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी कम हो
ईरान की मांग है:
फारस की खाड़ी में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधि कम हो
नए सैन्य अड्डे न बनाए जाएं
क्षेत्रीय नौसेनाओं के साथ संयुक्त सुरक्षा व्यवस्था बने
शासन परिवर्तन की नीति खत्म हो
ईरान चाहता है कि अमेरिका आधिकारिक तौर पर यह घोषणा करे कि वह ईरान की सरकार बदलने की नीति नहीं अपनाएगा।
ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei इस मुद्दे को राष्ट्रीय संप्रभुता से जोड़ते हैं।

तीसरी शर्त: नया परमाणु समझौता
ईरान चाहता है कि पुराने समझौते की जगह नया ढांचा बने।
JCPOA से आगे का समझौता
ईरान का प्रस्ताव:
समझौते की अवधि 25 साल तक हो
परमाणु कार्यक्रम पर स्पष्ट सीमाएं हों
लेकिन नागरिक परमाणु कार्यक्रम जारी रहे
उन्नत सेंट्रीफ्यूज तकनीक की अनुमति
ईरान चाहता है कि उसे आधुनिक सेंट्रीफ्यूज (जैसे IR-6 और IR-8) उपयोग करने की अनुमति मिले ताकि ऊर्जा उत्पादन बढ़ सके।
हालांकि पश्चिमी देशों को डर है कि इससे परमाणु हथियार बनाने की क्षमता भी बढ़ सकती है।
परमाणु तकनीक का वैश्विक व्यापार
ईरान चाहता है कि:
वह रूस और यूरोप से परमाणु ऊर्जा तकनीक खरीद सके
अमेरिका इसके रास्ते में प्रतिबंध न लगाए
समझौते में सबसे बड़ी बाधाएं
अमेरिका की आंतरिक राजनीति
अमेरिका में कई नेता मानते हैं कि ईरान की मांगें बहुत ज्यादा हैं।
रिपब्लिकन नेता इसे अमेरिका की कमजोरी बताते हैं
कुछ डेमोक्रेट भी क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं

ईरान की सीमित लचीलापन-Trump
विश्लेषकों के अनुसार ईरान कुछ मुद्दों पर समझौता कर सकता है:
प्रतिबंध हटाने का चरणबद्ध कार्यक्रम
परमाणु सीमाओं के बदले सैन्य तनाव कम करना
लेकिन अंतिम निर्णय हमेशा सर्वोच्च नेता के पास होता है।
ईरान की तीन मुख्य शर्तें हैं:
सभी आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना
मध्य-पूर्व में अमेरिका की भूमिका सीमित करना
नया और मजबूत परमाणु समझौता बनाना
अगर इन मांगों पर समझौता होता है तो क्षेत्र में स्थिरता आ सकती है। लेकिन अगर बातचीत विफल रही तो:
मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ सकता है
तेल की कीमतें उछ
PM लोगों से घबरा न करने की अपील कर रहे हैं, लेकिन खुद अलग कारणों से घबराए हुए हैं: राहुल गांधी
Follow us on Facebook
India Savdhan News | Noida | Facebook

