दिसपुर में BJP के बागी नेता: त्रिकोणीय मुकाबले से बढ़ी सियासी टक्कर
असम की राजधानी गुवाहाटी के प्रमुख विधानसभा क्षेत्र दिसपुर में इस बार चुनाव बेहद दिलचस्प हो गया है। Ramesh Das के बगावत करने से मुकाबला अब सीधा नहीं, बल्कि त्रिकोणीय बन गया है। इससे पहले यह सीट BJP के लिए आसान मानी जा रही थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल गए हैं।
पृष्ठभूमि: क्यों अहम है दिसपुर सीट?
दिसपुर असम की राजनीति का केंद्र है।
- 2021 में BJP ने यह सीट करीब 5,000 वोटों से जीती थी
- इससे पहले लंबे समय तक Indian National Congress का दबदबा रहा
यह सीट शहरी, मध्यम वर्ग, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों का मिश्रण है, इसलिए यहां का परिणाम पूरे राज्य की राजनीति पर असर डाल सकता है।

बगावत की शुरुआत: क्या हुआ?
Ramesh Das, जो 20 साल से BJP में थे, ने पार्टी छोड़कर निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।
उनके मुख्य आरोप:
- टिकट नहीं मिलने से नाराजगी
- पार्टी में “बाहरी नेताओं” को प्राथमिकता
- स्थानीय मुद्दों की अनदेखी
इस फैसले से BJP के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
अब मुकाबला किनके बीच?
दिसपुर में अब तीन मुख्य उम्मीदवार हैं:
- BJP से प्रिया शर्मा (नई उम्मीदवार)
- बागी नेता रमेश दास (निर्दलीय)
- कांग्रेस से अमित रॉय
यह त्रिकोणीय मुकाबला चुनाव को बेहद अनिश्चित बना रहा है।

बागी नेता की ताकत
रमेश दास का क्षेत्र में मजबूत आधार है:
- शहरी मध्यम वर्ग
- चाय बागान से जुड़े लोग
- स्थानीय व्यापारी और कर्मचारी
उनके पुराने काम और व्यक्तिगत संपर्क उन्हें अभी भी मजबूत उम्मीदवार बनाते हैं।
BJP की रणनीति
BJP ने तुरंत नुकसान नियंत्रित करने की कोशिश की:
- पार्टी नेताओं ने बगावत को “व्यक्तिगत नाराजगी” बताया
- प्रिया शर्मा को “नई सोच” के रूप में पेश किया
- केंद्रीय योजनाओं और विकास कार्यों पर जोर
पार्टी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
कांग्रेस को क्या फायदा?
Indian National Congress के उम्मीदवार अमित रॉय इस स्थिति का फायदा उठाने की कोशिश में हैं।
उनकी रणनीति:
- BJP के अंदरूनी विवाद को मुद्दा बनाना
- “स्थिर और साफ शासन” का वादा
- विभाजित वोटों का लाभ उठाना

वोटों का गणित
पिछले चुनाव के आधार पर अनुमान:
- बीजेपी: 48%
- कांग्रेस: 40%
अब संभावित स्थिति:
- बीजेपी: 35–40%
- रमेश दास: 10–15%
- कांग्रेस: 40–45%
यदि वोट बंटे, तो कांग्रेस को फायदा मिल सकता है।
अन्य प्रभावी कारक
- स्थानीय मुद्दे (रोजगार, बुनियादी ढांचा)
- मतदाता turnout
- अंतिम समय की राजनीतिक रणनीतियां
- क्षेत्रीय और राष्ट्रीय घटनाएं
दिसपुर में यह चुनाव अब बेहद रोमांचक और अनिश्चित हो गया है।
मुख्य बिंदु:
- BJP में बगावत से चुनावी समीकरण बदले
- त्रिकोणीय मुकाबले से परिणाम का अनुमान कठिन
- कांग्रेस को संभावित बढ़त मिल सकती है
- अंतिम फैसला swing voters के हाथ में
आगे क्या?
मतदान के दिन जैसे-जैसे नजदीक आएंगे, यह साफ होगा कि बागी फैक्टर कितना असर डालता है। दिसपुर का नतीजा सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि असम की राजनीति की दिशा तय कर सकता है।
40 सीटों का समीकरण Bengal चुनावों का भविष्य कैसे तय कर सकता है?
Follow us on Facebook

