Monsoon

Monsoon का उच्च जोखिम: क्या मजबूत हो रहा एल नीनो भारत की बरसाती मौसम खत्म कर देगा?

भारत में Monsoon केवल एक मौसम नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, कृषि, जल संसाधनों और करोड़ों लोगों की आजीविका का आधार है। लेकिन हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन और प्रशांत महासागर में होने वाली मौसमी घटनाओं ने मानसून की अनिश्चितता को बढ़ा दिया है। ऐसे में एक बार फिर एल नीनो (El Niño) के मजबूत होने की आशंका ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत का मानसून गंभीर खतरे में है और क्या भविष्य में बरसात का मौसम कमजोर पड़ सकता है।

क्या है एल नीनो?

एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर का सतही पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इसका प्रभाव केवल प्रशांत क्षेत्र तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों के मौसम पर पड़ता है।

भारत के लिए एल नीनो का सबसे बड़ा प्रभाव दक्षिण-पश्चिम Monsoon पर देखा जाता है। आमतौर पर मजबूत एल नीनो की स्थिति में भारत में औसत से कम वर्षा होने की संभावना बढ़ जाती है।

मानसून पर कैसे पड़ता है असर?

भारतीय मानसून समुद्र और भूमि के तापमान के अंतर तथा हिंद महासागर और प्रशांत महासागर की वायुमंडलीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

An instructor trains children on a dry patch of the Ganga riverbed. (Photo: PTI)

जब एल नीनो विकसित होता है, तो:

  • Monsoon हवाएं कमजोर हो सकती हैं।
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी कम हो सकती है।
  • वर्षा का वितरण असमान हो जाता है।
  • कुछ क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनती है, जबकि कहीं-कहीं अचानक अत्यधिक बारिश होती है।

हालांकि यह संबंध हर वर्ष समान नहीं होता। कई बार एल नीनो के बावजूद भारत में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा भी दर्ज की गई है।

क्या इस बार खतरा अधिक है?

मौसम वैज्ञानिक लगातार प्रशांत महासागर के तापमान और वायुमंडलीय संकेतकों पर नजर रख रहे हैं। यदि एल नीनो मजबूत होता है, तो मानसून के अंतिम चरण में वर्षा प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  • अगस्त और सितंबर की बारिश पर सबसे अधिक असर पड़ सकता है।
  • खरीफ फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है।
  • जलाशयों में पानी का स्तर अपेक्षा से कम रह सकता है।
  • बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर भी असर संभव है।

हालांकि अंतिम स्थिति कई अन्य वैश्विक और क्षेत्रीय कारकों पर भी निर्भर करेगी।

क्या जलवायु परिवर्तन भी जिम्मेदार है?

वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन ने मौसम की चरम घटनाओं को अधिक तीव्र बना दिया है।

अब देखने को मिल रहा है कि:

  • कम दिनों में अत्यधिक बारिश।
  • लंबे शुष्क अंतराल।
  • अचानक बाढ़।
  • अनियमित मानसून।

ऐसे बदलाव केवल एल नीनो के कारण नहीं, बल्कि वैश्विक तापमान बढ़ने का भी परिणाम माने जा रहे हैं।

किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता

भारत की लगभग आधी कृषि आज भी वर्षा पर निर्भर है।

यदि मानसून कमजोर पड़ता है, तो:

  • धान, मक्का, दालें और तिलहन की बुवाई प्रभावित हो सकती है।
  • सिंचाई की मांग बढ़ेगी।
  • उत्पादन घटने से खाद्यान्न कीमतों में वृद्धि हो सकती है।
  • ग्रामीण आय पर असर पड़ सकता है।
  • An instructor trains children on a dry patch of the Ganga riverbed. (Photo: PTI)

इसी कारण मौसम विभाग की भविष्यवाणियों पर किसानों की विशेष नजर रहती है।

क्या एल नीनो मानसून को पूरी तरह खत्म कर सकता है?

इस प्रश्न का उत्तर नहीं है।

एल नीनो मानसून को पूरी तरह समाप्त नहीं करता, बल्कि उसकी तीव्रता, समय और वितरण को प्रभावित कर सकता है।

भारत का मानसून कई अन्य कारकों से भी प्रभावित होता है, जैसे:

  • हिंद महासागर डाइपोल (IOD)
  • मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO)
  • हिमालय की बर्फ
  • अरब सागर और बंगाल की खाड़ी का तापमान
  • स्थानीय वायुमंडलीय परिस्थितियां

यदि इनमें से कुछ कारक अनुकूल हों, तो वे एल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक संतुलित कर सकते हैं।

सरकार और मौसम एजेंसियों की तैयारी

कमजोर मानसून की आशंका को देखते हुए सरकार और विभिन्न एजेंसियां कई स्तरों पर तैयारी करती हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • जलाशयों का बेहतर प्रबंधन।
  • किसानों को समय पर मौसम संबंधी सलाह।
  • सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए वैकल्पिक फसल योजना।
  • सिंचाई सुविधाओं का विस्तार।
  • खाद्यान्न भंडारण और मूल्य नियंत्रण की तैयारी।

सटीक मौसम पूर्वानुमान भी जोखिम कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

भविष्य की चुनौती

जलवायु विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में एल नीनो और ला नीना जैसी घटनाओं का प्रभाव अधिक जटिल हो सकता है। इसलिए केवल मानसून पर निर्भर रहने के बजाय भारत को जल संरक्षण, आधुनिक सिंचाई, सूखा-रोधी फसलों और बेहतर मौसम पूर्वानुमान प्रणाली पर अधिक निवेश करना होगा।

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