CJP कार्यकर्ता के पिता की हत्या: BJP से लिंक के आरोपों ने बढ़ाई सियासी हलचल
पश्चिम बंगाल के बांकुड़ा जिले में एक CJP (Cockroach Janta Party) कार्यकर्ता के पिता की मौत ने राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। आरोप है कि अपने बेटे को बचाने की कोशिश कर रहे बुजुर्ग व्यक्ति पर हमलावरों ने हमला किया, जिसके बाद उनकी मौत हो गई। घटना को लेकर CJP की ओर से भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, BJP की ओर से इन आरोपों को खारिज किया गया है और पार्टी की संलिप्तता से इनकार किया गया है।
CJP मामला बांकुड़ा जिले के इंदास थाना क्षेत्र के कड़िशुंडा गांव का बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP से जुड़े अब्दुल हाफिज अपने पुराने सरकारी स्कूल की स्थिति का वीडियो बना रहे थे। यह गतिविधि CJP के ‘School Thik Karo’ अभियान का हिस्सा थी। इसी दौरान कुछ लोगों के साथ उनका विवाद हुआ और कथित तौर पर उनके घर पर हमला किया गया। आरोप है कि हमलावरों ने अब्दुल के साथ मारपीट की और उनके मोबाइल फोन से वीडियो हटाने की कोशिश की। उनके पिता ने जब बेटे को बचाने का प्रयास किया तो उन्हें भी बुरी तरह पीटा गया। गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनकी मौत हो गई।
घटना के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल हमलावरों की पहचान और उनके कथित राजनीतिक संबंधों को लेकर उठा है। CJP नेताओं ने आरोप लगाया है कि हमले के पीछे BJP समर्थक लोग थे। पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास ने भी BJP से जुड़े कथित लोगों पर घर में घुसकर हमला करने का आरोप लगाया। दूसरी ओर, BJP नेता और पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने पार्टी के किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि घटना में BJP की भूमिका नहीं है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
मामले में पुलिस कार्रवाई भी चर्चा का विषय बनी हुई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हमले के सिलसिले में आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें BJP का एक स्थानीय नेता भी शामिल बताया गया है। हालांकि, दूसरी रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि शुरुआती चरण में पुलिस के पास औपचारिक शिकायत और राजनीतिक संबंधों की पुष्टि को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसलिए यह जरूरी है कि गिरफ्तारियों और आरोपों को अंतिम दोषसिद्धि न माना जाए। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हमले की वास्तविक वजह क्या थी और इसमें राजनीतिक संगठन के स्तर पर कोई भूमिका थी या नहीं।
यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि CJP पिछले कुछ समय से शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए दोषियों की गिरफ्तारी और न्याय की मांग की है। पार्टी ने मामले की पड़ताल के लिए अपनी टीम पश्चिम बंगाल भेजने की बात भी कही है।
CJP और BJP के बीच तनाव का यह पहला मामला भी नहीं है। इससे पहले जुलाई में CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता भगवानराव दिपके ने दावा किया था कि उनके बेटे को BJP में शामिल होने के लिए धमकी दी गई थी। उनके अनुसार, कथित धमकी में परिवार को नुकसान पहुंचाने की बात कही गई थी। परिवार ने सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
ऐसे आरोपों के बीच सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा का है। यदि जांच में यह साबित होता है कि किसी राजनीतिक संगठन से जुड़े लोगों ने किसी व्यक्ति की राजनीतिक या सामाजिक गतिविधियों के कारण हमला किया, तो यह लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। दूसरी तरफ, केवल राजनीतिक आरोप के आधार पर किसी पार्टी या उसके सभी कार्यकर्ताओं को दोषी ठहराना भी उचित नहीं होगा। निष्पक्ष जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट, पुलिस रिकॉर्ड और गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका इस मामले की सच्चाई सामने लाने में महत्वपूर्ण होगी।
बांकुड़ा की घटना ने एक बार फिर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हिंसा और राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के सवाल को केंद्र में ला दिया है। CJP इसे अपने कार्यकर्ता और उसके परिवार पर राजनीतिक हमला बता रही है, जबकि BJP अपनी संलिप्तता से इनकार कर रही है। ऐसे में जनता की नजर अब पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि एक व्यक्ति की जान चली गई है और उसके परिवार को न्याय मिलना चाहिए। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से अलग, दोषियों की निष्पक्ष पहचान और कानून के मुताबिक कार्रवाई ही इस पूरे विवाद का सबसे विश्वसनीय समाधान हो सकती है।

