Nagaon लोकसभा उपचुनाव: AIUDF, कांग्रेस और BJP ने प्रचार तेज किया
असम की Nagaon लोकसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव धीरे-धीरे राज्य की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में बदलता जा रहा है। चुनाव आयोग की औपचारिक अधिसूचना और अंतिम कार्यक्रम का इंतजार जारी है, लेकिन उससे पहले ही भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) ने अपनी राजनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। तीनों दलों के बीच बढ़ती बयानबाजी से साफ है कि यह मुकाबला केवल एक लोकसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि असम की बदलती राजनीतिक तस्वीर का महत्वपूर्ण परीक्षण बनने जा रहा है।
Nagaon सीट उस समय खाली हुई जब कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने लोकसभा और कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद उन्होंने BJP का दामन थाम लिया और 2026 के असम विधानसभा चुनाव में BJP के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। बोरदोलोई के कांग्रेस छोड़ने से Nagaon में मुकाबले की परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। अब कांग्रेस इस सीट को दोबारा जीतकर अपना राजनीतिक आधार मजबूत करना चाहती है, जबकि BJP इसे अपने पक्ष में करके राज्य में पार्टी की बढ़ती ताकत का संदेश देना चाहती है।
AIUDF ने उतारा अपना उम्मीदवार
AIUDF ने सबसे पहले अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए रेजाउल करीम सरकार को Nagaon लोकसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार घोषित कर दिया है। पार्टी प्रमुख बदरुद्दीन अजमल ने साफ कर दिया है कि AIUDF कांग्रेस के साथ कोई चुनावी गठबंधन नहीं करेगी। यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कांग्रेस और AIUDF पहले कई मौकों पर भाजपा विरोधी वोटों को लेकर एक-दूसरे के साथ राजनीतिक समीकरण बनाने की कोशिश कर चुके हैं।
AIUDF का स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ना कांग्रेस के लिए चुनौती माना जा रहा है। पार्टी का दावा है कि उसका अपना जनाधार है और वह Nagaon में मजबूत प्रदर्शन कर सकती है। रेजाउल करीम सरकार ने भी कांग्रेस को चुनौती देते हुए कहा है कि यदि कांग्रेस वास्तव में BJP को हराना चाहती है तो उसे AIUDF उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए। दूसरी ओर, अजमल ने कांग्रेस पर तीखे राजनीतिक हमले करते हुए उसके नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस का भरोसा कायम
AIUDF के अलग रास्ता चुनने के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व Nagaon सीट पर जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहा है। असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने कहा है कि पार्टी चुनाव जीतने के लिए तैयार है। कांग्रेस ने अभी चुनाव आयोग की ओर से तारीखों और अन्य औपचारिकताओं का इंतजार करने की बात कही है, लेकिन संगठनात्मक स्तर पर तैयारियों की समीक्षा शुरू हो चुकी है।
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने पारंपरिक मतदाताओं को एकजुट रखने की है। AIUDF के अलग उम्मीदवार उतारने से विपक्षी वोटों के बंटवारे की संभावना को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज है। कांग्रेस इस चुनौती का मुकाबला अपने संगठन, स्थानीय नेतृत्व और पिछले लोकसभा चुनावों के प्रदर्शन के आधार पर करना चाहती है। पार्टी AIUDF को BJP की मदद करने वाली राजनीतिक ताकत के रूप में पेश कर रही है। हालांकि यह भी स्पष्ट है कि AIUDF अपने ऊपर लगे ऐसे आरोपों को स्वीकार नहीं करता।
BJP ने भी झोंकी ताकत
सत्तारूढ़ BJP के लिए Nagaon उपचुनाव एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर है। पार्टी ने हालिया विधानसभा चुनाव में मजबूत प्रदर्शन किया है और अब लोकसभा उपचुनाव में भी अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रही है। असम BJP अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने Nagaon मुकाबले को कठिन और चुनौतीपूर्ण माना है, लेकिन साथ ही पार्टी की जीत के लिए पूरी ताकत से चुनाव लड़ने की बात कही है।
BJP का मुख्य अभियान विकास और सरकार के कामकाज पर केंद्रित रहने की संभावना है। पार्टी का तर्क है कि केंद्र और राज्य दोनों जगह BJP की सरकार होने से विकास योजनाओं को तेजी से लागू किया जा सकता है। दिलीप सैकिया ने भी सरकार के विकास एजेंडे और मतदाताओं की बदलती पसंद को BJP के पक्ष में महत्वपूर्ण कारक बताया है।
BJP के लिए इस चुनाव का एक और महत्व है। Nagaon से लंबे समय तक कांग्रेस का मजबूत प्रभाव रहा है। ऐसे में इस सीट पर जीत हासिल करना कांग्रेस के प्रभाव को कमजोर करने और BJP के विस्तार को प्रदर्शित करने वाला परिणाम होगा। प्रद्युत बोरदोलोई के BJP में आने से भी मुकाबले को अतिरिक्त राजनीतिक महत्व मिला है।
मुस्लिम वोट और ध्रुवीकरण पर नजर
Nagaon उपचुनाव में मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक दलों की रणनीति महत्वपूर्ण होगी। AIUDF का अपना मजबूत मुस्लिम जनाधार है, जबकि कांग्रेस भी इस वर्ग में प्रभाव बनाए रखने की कोशिश कर रही है। यही वजह है कि AIUDF के अलग उम्मीदवार के मैदान में उतरने के बाद संभावित वोट विभाजन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
बदरुद्दीन अजमल ने कांग्रेस पर आरोप लगाया है कि पार्टी का नेतृत्व मुस्लिम उम्मीदवार को लेकर सहज नहीं है। कांग्रेस ने इन आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व AIUDF को BJP की “बी-टीम” बताकर उसके खिलाफ राजनीतिक अभियान चला रहा है। इन आरोपों और प्रत्यारोपों से संकेत मिलता है कि चुनाव प्रचार के दौरान पहचान, प्रतिनिधित्व और राजनीतिक ध्रुवीकरण जैसे मुद्दे भी प्रमुख रह सकते हैं।
मुकाबला क्यों है अहम?
Nagaon उपचुनाव का परिणाम तीनों प्रमुख दलों के लिए अलग-अलग संदेश लेकर आएगा। कांग्रेस जीतती है तो वह BJP में हुए नेताओं के पलायन के बावजूद अपना राजनीतिक आधार बचाए रखने का दावा कर सकेगी। BJP की जीत से राज्य में सत्तारूढ़ दल की पकड़ और मजबूत होने का संदेश जाएगा। वहीं AIUDF यदि प्रभावशाली प्रदर्शन करती है तो वह असम की विपक्षी राजनीति में अपने स्वतंत्र जनाधार का दावा और मजबूत कर सकती है।
फिलहाल चुनाव की औपचारिक तारीखों का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक दलों की सक्रियता बता रही है कि Nagaon में मुकाबला आसान नहीं होने वाला। BJP खुद इसे कठिन चुनाव मान रही है, कांग्रेस जीत का दावा कर रही है और AIUDF ने गठबंधन से इनकार करते हुए अपना उम्मीदवार मैदान में उतार दिया है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या विपक्षी वोटों का विभाजन BJP को फायदा पहुंचाएगा या कांग्रेस अपने संगठन और स्थानीय समीकरणों के दम पर सीट बचाने में सफल होगी। आने वाले दिनों में उम्मीदवारों, प्रचार अभियान और स्थानीय मुद्दों की तस्वीर स्पष्ट होने के साथ Nagaon की यह राजनीतिक लड़ाई और दिलचस्प होने की उम्मीद है।

