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Haryana में जबरन वसूली के मामलों में 17% बढ़ोतरी, सीएम सैनी ने विदेशी डिजिटल कॉलर्स को बताया बड़ी वजह

चंडीगढ़: Haryana में कानून-व्यवस्था को लेकर विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को हुई चर्चा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जबरन वसूली यानी एक्सटॉर्शन के मामलों में बढ़ोतरी की बात स्वीकार की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जनवरी से जुलाई 2026 के बीच राज्य में जबरन वसूली के 296 मामले दर्ज हुए, जबकि पिछले साल इसी अवधि में इनकी संख्या 253 थी। इस तरह मामलों में करीब 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मुख्यमंत्री ने इस बढ़ोतरी की प्रमुख वजह विदेशों से आने वाली उन कॉल्स को बताया, जिनमें अपराधी डिजिटल एप्लिकेशन और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल करके अपनी पहचान और लोकेशन छिपाते हैं।

विदेश से आने वाली कॉल बनी चुनौती

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विधानसभा में इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के विधायकों आदित्य देवी लाल और अर्जुन चौटाला की ओर से लाए गए कॉलिंग अटेंशन मोशन का जवाब देते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि विदेशों से आने वाली कॉल्स की गुमनामी अपराधियों के लिए एक बड़ा फायदा बन रही है। डिजिटल एप्लिकेशन और अन्य आधुनिक तकनीकों के जरिए अपराधी अपनी पहचान तथा वास्तविक स्थान छिपाने में सक्षम हो रहे हैं।

इस तरह की कॉल्स ने पुलिस के सामने जांच की जटिलता बढ़ा दी है। अपराधी विदेश में बैठकर हरियाणा में कारोबारियों, आम नागरिकों या अन्य लोगों को धमकाने और पैसे की मांग करने की कोशिश कर सकते हैं। डिजिटल माध्यमों के कारण कॉल करने वाले व्यक्ति तक सीधे पहुंचना भी पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण हो जाता है। मुख्यमंत्री ने इसी कारण विदेशी नेटवर्क और तकनीक के दुरुपयोग को मामलों में हुई वृद्धि से जोड़कर देखा।

पुलिस ने बनाया केंद्रीय डेटाबेस

Haryana मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि जबरन वसूली के मामलों को गंभीरता से लिया जा रहा है। ऐसे सभी मामलों की जानकारी विशेष कार्य बल यानी Special Task Force (STF) के साथ साझा की जा रही है और उन्हें केंद्रीय डेटाबेस में रखा जा रहा है। इसका उद्देश्य अलग-अलग दिखाई देने वाली कॉल्स या घटनाओं के बीच संबंध स्थापित करना है।

सरकार के मुताबिक, डेटाबेस की मदद से पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं अलग-अलग मामलों के पीछे एक ही गैंग या आपराधिक नेटवर्क तो सक्रिय नहीं है। प्रत्येक मामले की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की जा रही है। पुलिस तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों का विश्लेषण करने के साथ आरोपियों और उनके सहयोगियों की पहचान पर भी काम कर रही है।

जहां जरूरत पड़ती है, वहां अंतर-जिला और अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। इसका मकसद स्थानीय स्तर पर दर्ज किसी मामले को बड़े आपराधिक नेटवर्क से जोड़कर उसके पूरे ढांचे तक पहुंचना है।

STF और ATS की कार्रवाई तेज

नायब सिंह सैनी ने बताया कि हरियाणा की STF और Anti-Terror Squad (ATS) संगठित अपराध, गैंगस्टरों, अवैध हथियारों तथा गंभीर और आतंक से जुड़े मामलों में शामिल अपराधियों के खिलाफ खुफिया जानकारी के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।

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सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024, 2025 और जुलाई 2026 तक कुल 3,210 गैंग सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। वर्ष 2025-26 के दौरान विदेशों में मौजूद 19 गैंगस्टरों को डिपोर्ट कराया गया, जबकि 12 लोगों को विदेश में हिरासत में लिया गया। इसके अलावा पुलिस ने 144 लुक आउट सर्कुलर (LOC) और 50 रेड कॉर्नर नोटिस (RCN) जारी किए तथा इंटरपोल के साथ 53 संदर्भ साझा किए।

ये आंकड़े बताते हैं कि सरकार ने स्थानीय पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ विदेशों में मौजूद अपराधियों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर भी जोर दिया है।

संदिग्ध कॉल रोकने के लिए ‘अभेद्य’ ऐप

विदेशी और संदिग्ध नंबरों से आने वाली वसूली की कॉल्स को रोकने के लिए हरियाणा पुलिस ने ‘अभेद्य’ ऐप विकसित किया है। Haryana मुख्यमंत्री ने बताया कि यह ऐप संदिग्ध और अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल्स को ब्लॉक करने में मदद करता है।

तकनीक का इस्तेमाल अपराधी कर रहे हैं, तो पुलिस भी उसी तकनीक को अपराध रोकने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ऐसे ऐप की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि संदिग्ध नंबरों की पहचान कितनी तेजी से होती है और अपराधी नए नंबरों या नए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करने पर पुलिस की व्यवस्था कितनी जल्दी प्रतिक्रिया देती है।

‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ से हजारों गिरफ्तारियां

Haryana मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि वांछित और घोषित अपराधियों को पकड़ने के लिए ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ चलाया जा रहा है। इसके तहत उन अपराधियों पर भी कार्रवाई की जा रही है जो जमानत या पैरोल मिलने के बाद फरार हो गए हैं।

1 से 15 अगस्त 2026 के बीच चलाए गए विशेष अभियान में 4,771 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान पुलिस ने 216 हथियार, 287 कारतूस और 15 मैगजीन बरामद कीं। बरामद हथियारों में देसी पिस्तौल, पिस्तौल, रिवॉल्वर और बंदूकें शामिल थीं। पुलिस ने 241 नए अपराधियों की हिस्ट्रीशीट खोली, जबकि 1,406 पुराने अपराधियों की हिस्ट्रीशीट अपडेट की गई।

इससे पहले दिसंबर 2025 में चलाए गए ‘ऑपरेशन हॉटस्पॉट डोमिनेशन’ के दौरान भी 1,213 मामले दर्ज किए गए और 2,200 अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था।

विपक्ष ने उठाया ड्रग्स का मुद्दा

विधानसभा में चर्चा केवल जबरन वसूली तक सीमित नहीं रही। INLD विधायक आदित्य देवी लाल ने सरकार से सवाल किया कि बढ़ते नशे के खतरे पर पर्याप्त चर्चा क्यों नहीं हो रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के गांवों और शहरों में सिंथेटिक ड्रग्स की बिक्री एक गंभीर समस्या बन चुकी है और पूछा कि क्या नशे का मुद्दा कानून-व्यवस्था के दायरे में नहीं आता।

वहीं विधायक अर्जुन चौटाला ने मुख्यमंत्री के जवाब पर राजनीतिक पलटवार किया और आरोप लगाया कि सरकार ने पिछली सरकारों की घटनाओं का उल्लेख तो किया, लेकिन वर्तमान चुनौतियों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। इस दौरान सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक बहस भी देखने को मिली।

आगे की चुनौती: डिजिटल अपराध पर लगाम

Haryana में जबरन वसूली के मामलों में 17 प्रतिशत की वृद्धि सरकार के लिए चिंता का विषय है। खासकर तब, जब अपराधी राज्य से बाहर या विदेश में बैठकर डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल कर रहे हों। ऐसे मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर पुलिस कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी। दूरसंचार कंपनियों, डिजिटल प्लेटफॉर्म, केंद्रीय एजेंसियों और विदेशी कानून-प्रवर्तन संस्थाओं के साथ समन्वय भी जरूरी होगा।

सरकार ने STF, ATS, केंद्रीय डेटाबेस, इंटरपोल सहयोग और ‘अभेद्य’ ऐप जैसे उपायों के जरिए अपनी रणनीति स्पष्ट की है। अब चुनौती इन उपायों को प्रभावी ढंग से लागू करने की है। यदि पुलिस तकनीकी साक्ष्यों का तेजी से विश्लेषण कर अपराधियों और उनके वित्तीय नेटवर्क तक पहुंचने में सफल रहती है, तो विदेश से संचालित जबरन वसूली के मामलों पर अंकुश लगाया जा सकता है।

फिलहाल विधानसभा में सामने आए आंकड़े यह संकेत देते हैं कि हरियाणा में जबरन वसूली का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अपराधी जहां डिजिटल तकनीक और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का सहारा ले रहे हैं, वहीं राज्य सरकार भी तकनीक और विशेष पुलिस अभियानों के जरिए इस चुनौती का मुकाबला करने की कोशिश कर रही है।

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